आज के दौर में लगभग हर व्यक्ति के पास स्मार्टफोन है, ऐसे में मोबाइल में जब भी नोटिफिकेशन की घंटी बजती है, तो व्यक्ति उसको चेक किये बिना खुद को नहीं रोक पाते हैं। अगर आप भी हर नोटिफिकेशन को चेक करते हैं तो यह समय के साथ ही आपकी मानसिक शांति, एकाग्रता और तनाव को प्रभावित कर सकता है।
आज के दौर में स्मार्टफोन हमारे जीवन का इतना अहम हिस्सा बन चुका है कि फोन पर आने वाला लगभग हर पिंग, वाइब्रेशन और नोटिफिकेशन हमें तुरंत उसे देखने के लिए मजबूर कर देता है। मैसेज हो, सोशल मीडिया अपडेट, ईमेल या किसी ऐप का अलर्ट, बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन धीरे-धीरे हमारी अटेंशन को छोटे-छोटे हिस्सों में फैला सकते हैं। खास बात यह है कि कई बार फोन को हाथ में लिए बिना भी नोटिफिकेशन की आवाज या वाइब्रेशन हमारे चल रहे काम से ध्यान भटका सकती है।
रिसर्च में भी स्मार्टफोन नोटिफिकेशन को अटेंशन और टास्क परफॉर्मेंस पर असर डालने से जोड़ा गया है। ऐसे में सवाल सिर्फ स्क्रीन टाइम का नहीं, बल्कि यह भी है कि हमारा ब्रेन कितनी बार किसी बाहरी अलर्ट के कारण अपना फोकस बदल रहा है। अगर आपको भी हर थोड़ी देर में फोन चेक करने की बेचैनी रहती है, तो यह आदत आपकी मेंटल पीस, फोकस और रोजमर्रा की प्रोडक्टिविटी को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
नोटिफिकेशन हमारे ब्रेन का अटेंशन कैसे कैप्चर करते हैं?
जब फोन पर अचानक कोई पिंग, वाइब्रेशन या पॉप-अप आता है, तो हमारा ध्यान कुछ पल के लिए उस स्टिमुलस की ओर मुड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि नोटिफिकेशन हमारे लिए एक सामान्य आवाज भर नहीं होता। अक्सर उसके पीछे किसी व्यक्ति का मैसेज, ईमेल, सोशल मीडिया अपडेट या जरूरी काम की संभावना छिपी होती है।
एनसीबीआई के अनुसार एक न्यूरोसाइंस स्टडी में पाया गया कि अपना मोबाइल फोन बजने जैसी व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण आवाजों को ब्रेन तेजी से प्रोसेस कर सकता है। यानी फोन की आवाज हमारे लिए इसलिए भी ज्यादा प्रभावशाली हो सकती है क्योंकि वह व्यक्तिगत महत्व रखता है।
लगातार Notifications स्ट्रेस और एंग्जायटी को कैसे बढ़ा सकते हैं?
एक के बाद एक आने वाले अलर्ट आपको लगातार “Available” और “Reachable” रहने का एहसास करा सकते हैं। खासकर वर्क ईमेल, व्हाट्सएप मैसेज, या सोशल मीडिया नोटिफिकेशन्स का लगातार आना व्यक्ति को ऐसा महसूस करा सकता है कि उसे हर समय जवाब देना चाहिए। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हर नोटिफिकेशन सीधे एंग्जायटी का कारण बनता है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। लेकिन लगातार ध्यान भटकना, फोन को चेक करना और FoMO जैसी चीजें मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं।
साइंस डायरेक्ट के अनुसार 2019 के फील्ड एक्सप्रीमेंट में नोटिफिकेशन को दिन में तीन बार चैक करने वाले प्रतिभागियों में सामान्य नोटिफिकेशन पैटर्न की तुलना में स्ट्रेस कम और अन्य सेहत बेहतर पाई गई। इसके विपरीत पूरी तरह अलर्ट बंद करने पर कुछ लोगों में FoMO और Anxiety बढ़ी।
इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—समाधान हमेशा “फोन पूरी तरह बंद कर देना” नहीं है। कई लोगों के लिए Notifications को व्यवस्थित करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
साल 2022 में प्रकाशित एक रिसर्च में स्मार्टफोन नोटिफिकेशन के हमारी अटेंशन और काम को सीखने की क्षमता (Cognitive Performance) पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की कोशिश की गई। अध्ययन के मुताबिक, काम के बीच Notification जैसी आवाज सुनाई देने पर लोगों की रिस्पान्स स्पीड प्रभावित हो सकती है और उन्हें किसी टास्क को पूरा करने में अधिक समय लग सकता है। हालांकि, इसका असर हर स्थिति में एक जैसा नहीं होता। आसान कामों के दौरान Notification जल्दी ध्यान भटका सकता है, जबकि ज्यादा चुनौतीपूर्ण या एकाग्रता वाले टास्क में व्यक्ति कई बार उस अलर्ट को नजरअंदाज करने में सक्षम रहता है।
Dr. Gaurav Gupta के अनुसार, बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन और उन्हें तुरंत चेक करने की आदत व्यक्ति की एकाग्रता और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है। लेकिन परेशानी सिर्फ नोटिफिकेशन की आवाज तक सीमित नहीं है। बार-बार अलर्ट मिलने से हमारे दिमाग में एक तरह की चैकिंग हैबिट विकसित हो सकती है। धीरे-धीरे व्यक्ति को बिना किसी नए मैसेज या नोटिफिकेशन के भी फोन देखने की इच्छा होने लगती है। यानी कई बार फोन हमें नहीं बुला रहा होता, बल्कि हमारा दिमाग खुद ही अगले अलर्ट का इंतजार कर रहा होता है।
“Notification Anxiety” क्या है?
Notification Anxiety कोई स्टैंडर्ड मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है। जैक्सन हेल्थ के अनुसार यह आम तौर पर उस बेचैनी या मानसिक दबाव को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो लगातार नोटिफिकेशन, मैसेज या फोन अपडेट्स से जुड़ा महसूस हो सकता है। इसके उदाहरण आगे बताए गए हैं।
नोटिफिकेशन आने पर तुरंत फोन चेक करना
मैसेज का जवाब न देने पर बेचैनी महसूस करना
बार-बार लॉक स्क्रीन देखना
नोटिफिकेशन न आने पर भी फोन चेक करना
काम के दौरान भी सोशल मीडिया अपडेट्स के बारे में पता लगाना
फोन साइलेंट होने के बावजूद किसी अलर्ट का इंतजार करना
स्मार्टफोन नोटिफिकेशन्स हमारी जिंदगी को आसान बनाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन हर पिंग हमारे अटेंशन के लिए एक छोटा सा इंटरप्शन भी बन सकता है। रिसर्च से पता चलता है कि नोटिफिकेशन की आवाज या अलर्ट सिर्फ फोन उठाने पर ही नहीं, बल्कि फोन को बिना छुए भी अटेंशन और टास्क परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है।






