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September 10, 2026

Notification आते ही सीधा फोन पर जाता है ध्यान? धीरे-धीरे दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाती है ये आदत?


Notification आते ही सीधा फोन पर जाता है ध्यान? धीरे-धीरे दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाती है ये आदत?

आज के दौर में लगभग हर व्यक्ति के पास स्मार्टफोन है, ऐसे में मोबाइल में जब भी नोटिफिकेशन की घंटी बजती है, तो व्यक्ति उसको चेक किये बिना खुद को नहीं रोक पाते हैं। अगर आप भी हर नोटिफिकेशन को चेक करते हैं तो यह समय के साथ ही आपकी मानसिक शांति, एकाग्रता और तनाव को प्रभावित कर सकता है।

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारे जीवन का इतना अहम हिस्सा बन चुका है कि फोन पर आने वाला लगभग हर पिंग, वाइब्रेशन और नोटिफिकेशन हमें तुरंत उसे देखने के लिए मजबूर कर देता है। मैसेज हो, सोशल मीडिया अपडेट, ईमेल या किसी ऐप का अलर्ट, बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन धीरे-धीरे हमारी अटेंशन को छोटे-छोटे हिस्सों में फैला सकते हैं। खास बात यह है कि कई बार फोन को हाथ में लिए बिना भी नोटिफिकेशन की आवाज या वाइब्रेशन हमारे चल रहे काम से ध्यान भटका सकती है।

रिसर्च में भी स्मार्टफोन नोटिफिकेशन को अटेंशन और टास्क परफॉर्मेंस पर असर डालने से जोड़ा गया है। ऐसे में सवाल सिर्फ स्क्रीन टाइम का नहीं, बल्कि यह भी है कि हमारा ब्रेन कितनी बार किसी बाहरी अलर्ट के कारण अपना फोकस बदल रहा है। अगर आपको भी हर थोड़ी देर में फोन चेक करने की बेचैनी रहती है, तो यह आदत आपकी मेंटल पीस, फोकस और रोजमर्रा की प्रोडक्टिविटी को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

नोटिफिकेशन हमारे ब्रेन का अटेंशन कैसे कैप्चर करते हैं?

जब फोन पर अचानक कोई पिंग, वाइब्रेशन या पॉप-अप आता है, तो हमारा ध्यान कुछ पल के लिए उस स्टिमुलस की ओर मुड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि नोटिफिकेशन हमारे लिए एक सामान्य आवाज भर नहीं होता। अक्सर उसके पीछे किसी व्यक्ति का मैसेज, ईमेल, सोशल मीडिया अपडेट या जरूरी काम की संभावना छिपी होती है।

एनसीबीआई के अनुसार एक न्यूरोसाइंस स्टडी में पाया गया कि अपना मोबाइल फोन बजने जैसी व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण आवाजों को ब्रेन तेजी से प्रोसेस कर सकता है। यानी फोन की आवाज हमारे लिए इसलिए भी ज्यादा प्रभावशाली हो सकती है क्योंकि वह व्यक्तिगत महत्व रखता है।

लगातार Notifications स्ट्रेस और एंग्जायटी को कैसे बढ़ा सकते हैं?

एक के बाद एक आने वाले अलर्ट आपको लगातार “Available” और “Reachable” रहने का एहसास करा सकते हैं। खासकर वर्क ईमेल, व्हाट्सएप मैसेज, या सोशल मीडिया नोटिफिकेशन्स का लगातार आना व्यक्ति को ऐसा महसूस करा सकता है कि उसे हर समय जवाब देना चाहिए। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हर नोटिफिकेशन सीधे एंग्जायटी का कारण बनता है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। लेकिन लगातार ध्यान भटकना, फोन को चेक करना और FoMO जैसी चीजें मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं।

साइंस डायरेक्ट के अनुसार 2019 के फील्ड एक्सप्रीमेंट में नोटिफिकेशन को दिन में तीन बार चैक करने वाले प्रतिभागियों में सामान्य नोटिफिकेशन पैटर्न की तुलना में स्ट्रेस कम और अन्य सेहत बेहतर पाई गई। इसके विपरीत पूरी तरह अलर्ट बंद करने पर कुछ लोगों में FoMO और Anxiety बढ़ी।

इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—समाधान हमेशा “फोन पूरी तरह बंद कर देना” नहीं है। कई लोगों के लिए Notifications को व्यवस्थित करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

साल 2022 में प्रकाशित एक रिसर्च में स्मार्टफोन नोटिफिकेशन के हमारी अटेंशन और काम को सीखने की क्षमता (Cognitive Performance) पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की कोशिश की गई। अध्ययन के मुताबिक, काम के बीच Notification जैसी आवाज सुनाई देने पर लोगों की रिस्पान्स स्पीड प्रभावित हो सकती है और उन्हें किसी टास्क को पूरा करने में अधिक समय लग सकता है। हालांकि, इसका असर हर स्थिति में एक जैसा नहीं होता। आसान कामों के दौरान Notification जल्दी ध्यान भटका सकता है, जबकि ज्यादा चुनौतीपूर्ण या एकाग्रता वाले टास्क में व्यक्ति कई बार उस अलर्ट को नजरअंदाज करने में सक्षम रहता है।

Dr. Gaurav Gupta के अनुसार, बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन और उन्हें तुरंत चेक करने की आदत व्यक्ति की एकाग्रता और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है। लेकिन परेशानी सिर्फ नोटिफिकेशन की आवाज तक सीमित नहीं है। बार-बार अलर्ट मिलने से हमारे दिमाग में एक तरह की चैकिंग हैबिट विकसित हो सकती है। धीरे-धीरे व्यक्ति को बिना किसी नए मैसेज या नोटिफिकेशन के भी फोन देखने की इच्छा होने लगती है। यानी कई बार फोन हमें नहीं बुला रहा होता, बल्कि हमारा दिमाग खुद ही अगले अलर्ट का इंतजार कर रहा होता है।

“Notification Anxiety” क्या है?

Notification Anxiety कोई स्टैंडर्ड मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है। जैक्सन हेल्थ के अनुसार यह आम तौर पर उस बेचैनी या मानसिक दबाव को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो लगातार नोटिफिकेशन, मैसेज या फोन अपडेट्स से जुड़ा महसूस हो सकता है। इसके उदाहरण आगे बताए गए हैं।

  • नोटिफिकेशन आने पर तुरंत फोन चेक करना

  • मैसेज का जवाब न देने पर बेचैनी महसूस करना

  • बार-बार लॉक स्क्रीन देखना

  • नोटिफिकेशन न आने पर भी फोन चेक करना

  • काम के दौरान भी सोशल मीडिया अपडेट्स के बारे में पता लगाना

  • फोन साइलेंट होने के बावजूद किसी अलर्ट का इंतजार करना

स्मार्टफोन नोटिफिकेशन्स हमारी जिंदगी को आसान बनाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन हर पिंग हमारे अटेंशन के लिए एक छोटा सा इंटरप्शन भी बन सकता है। रिसर्च से पता चलता है कि नोटिफिकेशन की आवाज या अलर्ट सिर्फ फोन उठाने पर ही नहीं, बल्कि फोन को बिना छुए भी अटेंशन और टास्क परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है।

September 08, 2026

फैटी लिवर: शरीर का वह अलार्म जिसे नजरअंदाज न करें

फैटी लिवर: शरीर का वह अलार्म जिसे नजरअंदाज न करें

अलीगढ़  - बदलती जीवनशैली, बढ़ता मोटापा और खान-पान की गलत आदतों का असर हमारे लिवर पर भी पड़ रहा है। आजकल कई लोगों में जांच के दौरान लिवर में फैट जमा होने की समस्या सामने आ रही है, जिसे फैटी लिवर कहा जाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. पंकज सिंह ने बताया, “फैटी लिवर का संबंध अक्सर मोटापा, पेट की चर्बी, डायबिटीज, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और कम शारीरिक गतिविधि से होता है। शराब का सेवन भी लिवर में फैट बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण है।” 


फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण नहीं होते। कई बार यह अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट के दौरान अचानक पता चलता है। कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच जरूरी है। 


हर फैटी लिवर गंभीर बीमारी में नहीं बदलता, लेकिन कुछ लोगों में लिवर में सूजन और धीरे-धीरे जख्म यानी फाइब्रोसिस हो सकता है। इसकी जांच के लिए डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन की सलाह दे सकते हैं। 


डॉ. पंकज ने बताया कि "फैटी लिवर से बचाव और इलाज में जीवनशैली में बदलाव सबसे जरूरी है। वजन अधिक होने पर धीरे-धीरे वजन कम करें, नियमित व्यायाम करें और लंबे समय तक बैठे रहने से बचें। मीठे पेय, ज्यादा चीनी, तला-भुना और प्रोसेस्ड खाना कम करें। भोजन में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।"

फैटी लिवर को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर लिवर को गंभीर नुकसान से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

September 07, 2026

Vidyamandir Classes brings VIQ 2026, meritorious students to get up to 100% scholarship

Vidyamandir Classes brings VIQ 2026, meritorious students to get up to 100% scholarship

Vidyamandir Classes (VMC), one of the country's leading competitive exam coaching institutes, has announced the dates for its annual national scholarship and talent identification exam, Vidyamandir Intellect Quest (VIQ) 2026. The exam will be conducted for students currently studying in grades 5 to 12.

 

The objective of VIQ 2026 is to identify students' academic talent and potential at an early stage. Through this test, students will be able to assess their aptitude and receive scholarships of up to 100%, cash prizes totaling up to Rs. 2.5 crore, and various educational benefits to helpthem prepare for IIT-JEE, NEET, Olympiads, and board exams.

 

This year, the exam will be conducted both offline and online, so that a greater number of students from across the country can participate. The offline exam will be held on October 4 (outside Delhi-NCR), October 11, October 18, and November 1 (NCR only). The online exam will be held on October 4, 10, 17, and 24, and November 1, in various morning and evening slots.  


Speaking on the occasion, Sandeep Mehta, co-founder of Vidyamandir Classes and an IIT Delhi alumnus, said, Every student has unique potential, and the right guidance at the right time can shape their future. Through VIQ, our aim is to identify talented students across the country and provide them with quality education, scholarships, and systematic guidance.

 

This test is not just about financial assistance, but also allows students to assess their academic potential, gain opportunities to perform better, and be part of VMC's academic environment, which has produced excellent results in competitive exams over the years. In addition to scholarships and cash prizes, VIQ 2026 participants will also receive a number of other educational benefits. These include access to free online or offline classes, practice and mock board tests, curriculum-based e-study materials, and personalized academic guidance.

 

High-performing students will also be considered for admission to VMC's prestigious Citadel of Excellence (CoE) and Illuminati batches. Premium participants will also receive access to the AI Empowerment Online Course free of charge. Each student taking the exam will also receive a participation certificate.

 

For the past four decades, Vidyamandir Classes has been guiding thousands of IIT-JEE, NEET, and Olympiad aspirants through its research-based curriculum, experienced faculty, and student-centered teaching methodology. VIQ 2026 continues this tradition by identifying talented students early and providing them with a strong academic foundation and better opportunities.

September 01, 2026

गर्दन की छोटी गांठ को न करें नजरअंदाज, हो सकता है थायरॉइड कैंसर का संकेत

गर्दन की छोटी गांठ को न करें नजरअंदाज, हो सकता है थायरॉइड कैंसर का संकेत

करनाल - थायरॉइड गर्दन के निचले हिस्से में मौजूद तितली के आकार की छोटी ग्रंथि है, लेकिन शरीर के लिए इसका काम बेहद महत्वपूर्ण है। यह मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर का तापमान और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है। जब थायरॉइड की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो इसे थायरॉइड कैंसर कहा जाता है। 


थायरॉइड कैंसर कई प्रकार का होता है। इनमें पैपिलरी थायरॉइड कैंसर सबसे आम है और ज्यादातर मामलों में इसका इलाज प्रभावी रहता है। फॉलिक्युलर, मेडुलरी और दुर्लभ एनाप्लास्टिक थायरॉइड कैंसर भी इसके अन्य प्रकार हैं। यह बीमारी महिलाओं में अधिक देखी जाती है। परिवार में थायरॉइड कैंसर का इतिहास, बचपन में रेडिएशन के संपर्क में आना और कुछ आनुवंशिक कारण इसका खतरा बढ़ा सकते हैं। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. रोहित नैय्यर ने बताया, “गर्दन में बिना दर्द वाली गांठ या सूजन थायरॉइड कैंसर का संकेत हो सकती है। इसके अलावा आवाज में लगातार बदलाव या भारीपन, निगलने में परेशानी, गर्दन में लिम्फ नोड्स की सूजन, गर्दन में दर्द और लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, थायरॉइड की हर गांठ कैंसर नहीं होती, इसलिए घबराने के बजाय सही जांच जरूरी है।” 


थायरॉइड की गांठ की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर फाइन नीडल बायोप्सी की जाती है। इलाज बीमारी के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। कई मामलों में सर्जरी से थायरॉइड का कुछ हिस्सा या पूरी ग्रंथि निकाल दी जाती है। कुछ मरीजों को रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी और बाद में थायरॉइड हार्मोन की दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है। 


डॉ. रोहित ने आगे बताया "समय पर पहचान और इलाज से थायरॉइड कैंसर के मरीजों में परिणाम काफी अच्छे हो सकते हैं। इसलिए गर्दन में किसी भी असामान्य गांठ, सूजन या आवाज में लगातार बदलाव को नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।"