मुरादाबाद: ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (TN) एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें ट्राइजेमिनल नर्व प्रभावित हो जाती है। यह नर्व चेहरे से मस्तिष्क तक संवेदनाओं के संकेत पहुंचाने का काम करती है। जब इस नर्व पर असर पड़ता है, तो मरीज को चेहरे में बेहद तेज और असहनीय दर्द महसूस हो सकता है। इसे दुनिया की सबसे दर्दनाक बीमारियों में से एक माना जाता है। यह समस्या अक्सर तब होती है जब मस्तिष्क से निकलने वाली नर्व पर कोई ब्लड वेसल्स दबाव डालती है, जिससे नर्व की सुरक्षात्मक परत (मायलिन शीथ) क्षतिग्रस्त हो जाती है और नर्व सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती। कुछ मामलों में मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ट्यूमर, चेहरे की चोट या अन्य अज्ञात कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी, न्यूरो क्रिटिकल केयर एवं स्पाइन सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिनेश रतनानी ने बताया “इस बीमारी में दर्द अचानक शुरू हो सकता है और कुछ सेकंड से लेकर दो मिनट तक बना रह सकता है। मरीज इसे चुभने वाले, बिजली के झटके जैसे या तेज शूटिंग पेन के रूप में महसूस करते हैं। आमतौर पर दर्द चेहरे के एक तरफ होता है और होंठ, आंख, नाक, सिर की त्वचा, माथे या जबड़े जैसे हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। कई बार रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियां जैसे खाना खाना, बात करना, दांत साफ करना, चेहरे को छूना या ठंडी हवा के संपर्क में आना भी दर्द को ट्रिगर कर सकता है। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया दो प्रकार का होता है—पहले प्रकार में तेज और अचानक दर्द होता है, जबकि दूसरे प्रकार में लंबे समय तक रहने वाला जलन, दर्द और धड़कन जैसा एहसास अधिक होता है।“
इस बीमारी की पहचान के लिए कोई एक विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और चेहरे के दर्द से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे दांतों की बीमारी, टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) सिंड्रोम या क्लस्टर हेडेक को बाहर करके निदान करते हैं। MRI स्कैन के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं नर्व पर दबाव, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या ट्यूमर जैसी समस्या तो नहीं है।
डॉ. दिनेश ने आगे बताया “इलाज की शुरुआत आमतौर पर दवाओं से की जाती है, विशेष रूप से ऐसी दवाओं से जो नर्व की गतिविधि को स्थिर करने में मदद करती हैं। कई मरीजों में ये दवाएं प्रभावी होती हैं, लेकिन समय के साथ इनके असर में कमी आ सकती है या चक्कर और थकान जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। यदि दवाएं असर न करें, तो सर्जरी एक विकल्प बनती है। माइक्रोवैस्कुलर डिकम्प्रेशन (MVD) सबसे प्रभावी प्रक्रियाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें सर्जन नर्व और उस पर दबाव डालने वाली रक्त वाहिका के बीच सुरक्षात्मक परत लगाते हैं। इस प्रक्रिया की सफलता दर लगभग 80–90 प्रतिशत तक हो सकती है, हालांकि यह एक जटिल ब्रेन सर्जरी है। इसके अलावा, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RF Ablation) जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग भी दर्द की संवेदना कम करने के लिए किया जाता है।“
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के साथ जीवन जीना कई मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि अचानक होने वाले दर्द के दौरे चिंता, तनाव और अवसाद का कारण बन सकते हैं। ऐसे में दर्द को बढ़ाने वाले कारणों से बचना, जैसे बहुत ठंडी हवा से चेहरे की सुरक्षा करना, मुलायम भोजन लेना और डॉक्टरों या पेन स्पेशलिस्ट की सलाह लेना मददगार हो सकता है। यदि चेहरे में अचानक बिजली के झटके जैसा दर्द महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।













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