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March 26, 2026

Vidyamandir Classes to conduct National Admission test in March 2026

Vidyamandir Classes to conduct National Admission test in March 2026.

Vidyamandir Classes (VMC), the nation's leading institution and a hub for JEE (Main & Advanced), NEET preparation, is gearing to conduct its flagship test for Admission & Scholarships, National Admission Test (NAT). The scholarship cum admission test will be conducted on 14, 15, 21 and 22 March through online and offline mode, in order to reward and encourage good students across the country and elevate them towards academic growth. 


This test is for Students going to class 6th, 7th 8th, 9th, 10th 11th and 12th, as they have the chance to take this test to enrol in one of the many programs offered at Vidyamandir Classes, giving them a head-start and the chance to receive scholarships of up to 100%. This Test will also give a significant boost to the preparation of exams like JEE and NEET with mentorship / Motivational Sessions by VMC Founders & Experts, Free Doubt Resolution and Academic support at the nearest VMC centre, Well Researched & Scientifically driven E-study material and unlimited mock tests. 


VMC conducts the National Admission Test across the country to choose students for its very successful and sought-after classroom and online programs. These programs have been specially designed to help students conquer prominent tests like the JEE and NEET as well as other competitive/scholastic exams like the OLYMPIADS & BOARDS. 


Mr. Brij Mohan, Co-Founder, Vidyamandir Classes said “Understanding students’ needs at different stages of their preparation has been the guiding force behind the teaching methodology at VMC. It is also the secret behind the success of our students in various National and International Level exams. At VMC the classes are led by the Founders & a team of highly experienced faculty who prepare students for competitive exams like JEE and NEET.” 


Building a solid foundation of scientific and technical knowledge and thus to prepare competent and motivated engineers and doctors is the primary motto of Vidyamandir Classes. Students aspiring for the JEE & NEET who wish to study at nation's top engineering and medical schools should not miss this test. 


To Know more & to Register for NAT, visit www.vidyamandir.com

March 03, 2026

शादीशुदा महिलाओं को क्यों होते हैं डिप्रेशन-एंग्जायटी जैसे 7 मानसिक रोग? डॉ. गौरव गुप्ता ने बताईं वजहें और बचाव के आसान तरीके

 
शादीशुदा महिलाओं को क्यों होते हैं डिप्रेशन-एंग्जायटी जैसे 7 मानसिक रोग? डॉ. गौरव गुप्ता ने बताईं वजहें और बचाव के आसान तरीके

प्रश्न 1: भारत में शादीशुदा महिलाओं को सबसे ज्यादा कौन-सी मानसिक समस्याएं क्यों घेर लेती हैं?
डॉ. गौरव गुप्ता, जो एक प्रमुख मनोचिकित्सक हैं और जिनके पास अनुभव की भरमार है, बताते हैं कि भारत में शादी के बाद महिलाओं का एक बड़ा तबका मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौतियों से जूझता है। उनके अनुसारडिप्रेशन, एंग्जायटी, पोस्टपार्टम डिप्रेशन, एडजस्टमेंट डिसऑर्डर, घरेलू हिंसा से जुड़ा PTSD, OCD और स्लीप डिसऑर्डर जैसी सात प्रमुख मानसिक बीमारियां शादीशुदा महिलाओं में सबसे आम हैं। डॉ. गुप्ता के क्लिनिक में कई ऐसी महिला मरीज आती हैं, जो यह महसूस ही नहीं करतीं कि उनकी खराब मानसिक स्थिति का मूल कारण उनका वैवाहिक जीवन है। डॉ. गौरव गुप्ता जोर देकर कहते हैं कि अधिकतर मामलों में समस्या इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि महिलाओं को लक्षणों का एहसास नहीं होता और अगर हो भी जाए, तो इलाज का सही रास्ता नहीं पता। इससे रिकवरी लंबी खिंच जाती है।

प्रश्न 2: इन मानसिक समस्याओं से बचने के लिए सबसे पहला कदम क्या उठाना चाहिए?
डॉ. गौरव गुप्ता सलाह देते हैं कि लक्षणों को पहचानना, वजहें समझना और समय पर इलाज की जानकारी रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से हम यहां इन सात समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं, ताकि आप खुद को जागरूक बना सकें।

प्रश्न 3: डिप्रेशन शादीशुदा महिलाओं को क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और बचाव कैसे करें?
डॉ. गौरव गुप्ता के अनुसार, डिप्रेशन के मुख्य कारण हैं भावनात्मक उपेक्षा, पति-पत्नी में कलह, फर्टिलिटी इश्यूज, पोस्टपार्टम बदलाव, आर्थिक दबाव या परिवार का सपोर्ट न मिलना। लक्षण: हर वक्त उदासी, काम में मन न लगना, नींद की गड़बड़ी, लगातार थकान और उम्मीदों का अंत। बचाव: पति से खुलकर बात करें, हेल्दी दोस्तों का सर्कल बनाएं और खुद को प्राथमिकता दें। डॉ. गुप्ता कहते हैं, अगर ये लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा रहें और दैनिक जीवन प्रभावित हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें।

प्रश्न 4: एंग्जायटी डिसऑर्डर की क्या वजहें हैं, कैसे पहचानें और इससे कैसे निपटें?
ससुराल के दबाव, आर्थिक असुरक्षा, पेरेंटिंग स्ट्रेस या सास-ससुर से खराब रिश्ते एंग्जायटी को जन्म देते हैं, जैसा कि डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं। लक्षण: लगातार चिंता, बिना वजह पसीना, बेचैनी, चिड़चिड़ापन। बचाव: हेल्दी बॉउंड्री सेट करें, मेडिटेशन जैसी शांत करने वाली एक्टिविटीज अपनाएं और दिनचर्या में अनुशासन लाएं। डॉ. गुप्ता चेतावनी देते हैं कि अगर पैनिक अटैक शुरू हो जाएं, तो देर न करें—एक्सपर्ट की मदद लें।

प्रश्न 5: पोस्टपार्टम डिप्रेशन डिलीवरी के बाद क्यों आता है, इसके संकेत क्या हैं?
डॉ. गौरव गुप्ता स्पष्ट करते हैं कि हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी और इमोशनल सपोर्ट न मिलना इसके पीछे हैं। लक्षण: अचानक रोना, बेबसी, खुद को ब्लेम करना, बच्चे से कनेक्ट न होना, गहरी थकान। बचाव: परिवार का मजबूत सपोर्ट, पति की मदद और पर्याप्त आराम। डॉ. गुप्ता सख्ती से कहते हैं, अगर खुद या बच्चे को नुकसान पहुंचाने के विचार आएं, तो फौरन विशेषज्ञ के पास जाएं—ये जानलेवा हो सकता है।

प्रश्न 6: एडजस्टमेंट डिसऑर्डर शादी के बाद नए घर में क्यों होता है, कैसे संभालें?
नई जगह का अचानक बदलाव, जॉइंट फैमिली की परेशानियां या करियर छूटना कारण हैंडॉ. गौरव गुप्ता के मुताबिक। लक्षण: मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, सोशल लाइफ से कटना। बचाव: धीरे-धीरे एडजस्ट करें, पार्टनर से बात शेयर करें। अगर खुद के प्रयास नाकाम हों, तो डॉ. गुप्ता काउंसलिंग या थेरेपी की सलाह देते हैं।

प्रश्न 7: घरेलू हिंसा से PTSD कैसे होता है और इससे बाहर निकलने का रास्ता क्या?
डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि शारीरिक, मानसिक, इमोशनल या आर्थिक प्रताड़ना इसके जड़ में है। लक्षण: फ्लैशबैक, ट्रस्ट की कमी, हमेशा असुरक्षा का अहसास, भावनाओं का शून्य होना। बचाव: तुरंत पेशेवर और कानूनी मदद लें। डॉ. गुप्ता जोर देते हैं कि महिला की सुरक्षा पहले—हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करें।

प्रश्न 8: OCD शादीशुदा महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है, इसके लक्षण और उपाय?
परफेक्शनिज्म, फैमिली हिस्ट्री या ट्रॉमेटिक बचपन कारण हैं, जैसा डॉ. गौरव गुप्ता कहते हैं। लक्षण: बार-बार सफाई या चेकिंग, अनचाहे विचार। बचाव: आदतों पर नजर रखें, स्ट्रेस मैनेज करें, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं, परिवार की मदद लें। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि अगर जीवन प्रभावित हो, तो कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और दवाएं जरूरी हैं।

प्रश्न 9: स्लीप डिसऑर्डर और बर्नआउट घर-ऑफिस के बोझ से कैसे जुड़े हैं?
घर के कामों का अतिरिक्त भार, डबल जिम्मेदारी, आराम की कमी और सेल्फ-केयर न होना वजहें हैंडॉ. गौरव गुप्ता के अनुसार। लक्षण: लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, फोकस की कमी। बचाव: पति-परिवार से बात करें, जिम्मेदारियां बांटें, खुद के लिए टाइम निकालें। डॉ. गुप्ता कहते हैं, दो हफ्ते बाद अगर लक्षण बने रहें या पैनिक/मूड स्विंग्स बढ़ें, तो एक्सपर्ट से मिलें।

प्रश्न 10: समय पर मदद न मिले तो क्या गंभीर परिणाम हो सकते हैं?
डॉ. गौरव गुप्ता चेताते हैं कि देरी से जटिलताएं बढ़ती हैं, जो मानसिक, शारीरिक और वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकती हैं। साइकियाट्रिस्ट को स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता है। उनकी सलाह: फिजिकल-मेंटल हेल्थ पर बराबर ध्यान दें, प्रोफेशनल मदद से न हिचकें। डॉ. गुप्ता का मंत्र है—जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

प्रश्न 11: कुल मिलाकर, शादीशुदा महिलाएं इन समस्याओं से कैसे पूरी तरह सुरक्षित रहें?
डॉ. गौरव गुप्ता की विशेष सलाह: खुली बातचीत, सपोर्ट सिस्टम, सेल्फ-केयर और समय पर एक्सपर्ट मदद। भारत जैसे समाज में जहां महिलाओं पर दबाव ज्यादा है, ये कदम जीवन बदल सकते हैं। जागरूक बनें, स्वस्थ रहें!

February 28, 2026

इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के खिलाफ मजबूत होती शरीर की रक्षा प्रणाली

इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के खिलाफ मजबूत होती शरीर की रक्षा प्रणाली

 रोहतक: पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। इन बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति इम्यूनोथेरेपी के रूप में सामने आई है। यह ऐसा उपचार है जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत और सक्रिय बनाता है।


इम्यूनोथेरेपी एक ऐसी थेरेपी है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने में मदद करती है। सामान्य रूप से हमारा इम्यून सिस्टम संक्रमण और असामान्य कोशिकाओं से हमारी रक्षा करता है। लेकिन कैंसर कोशिकाएं बहुत चालाक होती हैं और वे अक्सर इम्यून सिस्टम से छिप जाती हैं। इम्यूनोथेरेपी दवाएं इन छिपी हुई कैंसर कोशिकाओं को फिर से पहचानने में मदद करती हैं। इसे सरल शब्दों में समझें तो यह इम्यून सिस्टम पर लगेब्रेकको हटाने जैसा हैजिससे वह कैंसर पर अधिक प्रभावी तरीके से हमला कर सके।


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारका के मेडिकल ऑन्कोलॉजी,  विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. पियूष बाजपेयी ने बताया “शुरुआत में इम्यूनोथेरेपी का उपयोग मुख्य रूप से एडवांस स्टेज के कैंसर में किया गयाजहां इसके अच्छे परिणाम सामने आए। खासतौर पर फेफड़ों का कैंसरमेलेनोमा (स्किन कैंसर)ब्लैडर कैंसरब्रेस्ट कैंसरहेड एंड नेक कैंसर और कुछ पेट इसोफेगस (फूड पाइप) के कैंसर में इसका लाभ देखा गया। कुछ एडवांस कैंसर मरीजों में इस थेरेपी से कई वर्षों तक बीमारी को कंट्रोल में रखने में मदद मिली है। कुछ विशेष प्रकार के कैंसर में लगभग 15–20 प्रतिशत मरीजों को लंबे समय तक फायदा मिलता है।


डॉ. पियूष ने आगे बताया “अब इम्यूनोथेरेपी का उपयोग सर्जरी से पहले भी किया जाने लगा है। पहले इसे अधिकतर एडवांस बीमारी में दिया जाता थालेकिन अब शोध से यह पता चला है कि जब ट्यूमर शरीर में मौजूद होता हैउसी समय इम्यूनोथेरेपी देने से इम्यून सिस्टम बेहतर प्रतिक्रिया दे सकता है। फेफड़ों का कैंसरमेलेनोमाब्लैडर कैंसरब्रेस्ट कैंसर और गैस्ट्रो-इसोफेगल कैंसर जैसे मामलों में यह तरीका उत्साहजनक परिणाम दिखा रहा है। इससे ट्यूमर को पूरी तरह निकालने की संभावना बढ़ सकती है और कैंसर दोबारा होने का रिस्क कम हो सकता है। हालांकि इम्यूनोथेरेपी हर मरीज पर एक जैसा असर नहीं करती। कुछ मरीजों में बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिलता हैजबकि कुछ में अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। कई बार डॉक्टर ट्यूमर या खून में कुछ विशेष मार्कर की जांच करते हैंजिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि इलाज से कितना फायदा होगा। मरीज की अच्छी पोषण स्थिति और सामान्य फिटनेस भी इलाज को सहने और बेहतर परिणाम पाने में मदद करती है।


साइड इफेक्ट्स की बात करें तो इम्यूनोथेरेपी में आमतौर पर कीमोथेरेपी की तुलना में कम बाल झड़ते हैं और कम मतली होती है। लेकिन चूंकि यह इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती हैइसलिए कभी-कभी यह शरीर के सामान्य अंगों पर भी असर डाल सकती है। इसके कारण दस्त (लूज मोशन्स)त्वचा पर रैश या खुजलीसांस लेने में तकलीफहार्मोन असंतुलन से थकान या वजन में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि इन लक्षणों की जानकारी समय पर डॉक्टर को दे दी जाए तो अधिकांश साइड इफेक्ट्स का सफल इलाज संभव है।


यदि किसी मरीज को लगातार दस्तसांस फूलना या खांसीअत्यधिक कमजोरी या चक्करतेजी से फैलता हुआ स्किन रैशबुखार या तेज पेट दर्द होतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साइड इफेक्ट्स का समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।


मरीजों और उनके परिवारों के लिए यह समझना जरूरी है कि इम्यूनोथेरेपी कोई जादू नहीं हैलेकिन यह कैंसर उपचार में एक बड़ी मेडिकल प्रगति जरूर है। इसने कई प्रकार के कैंसर में मरीजों की जीवन अवधि और जीवन की गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है। सही मरीज का चयननियमित मॉनिटरिंग और समय पर सलाह के साथ इम्यूनोथेरेपी आज कैंसर देखभाल में नई उम्मीद लेकर आई है।