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June 03, 2026

सेंटर फॉर साइट ने पूरे किए उत्कृष्टता के 30 वर्ष, सूरत में 5 वर्षों से दे रहा है एडवांस्ड विज़न करेक्शन और व्यापक नेत्र चिकित्सा सेवाएं

सेंटर फॉर साइट ने पूरे किए उत्कृष्टता के 30 वर्ष, सूरत में 5 वर्षों से दे रहा है एडवांस्ड विज़न करेक्शन और व्यापक नेत्र चिकित्सा सेवाएं

सूरत, 3 जून 2026: नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सेंटर फॉर साइट ​ग्रुप ऑफ़ आई हॉस्पिटल्स ने अपने सूरत केंद्र में "एडवांसिंग रिफ्रैक्टिव केयर एंड सेंटर एक्सीलेंस" विषय पर एक जन-जागरूकता एवं इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नेत्र रोग विशेषज्ञों, मरीजों और समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया तथा विज़न करेक्शन और व्यापक नेत्र देखभाल के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर चर्चा की। जहां सेंटर फॉर साइट राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तीन दशक लंबी उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, वहीं सिटी लाइट मेन रोड और रांदेर रोड स्थित इसके सूरत केंद्र दक्षिण गुजरात के लोगों की सेवा के पांच वर्ष पूरे होने का भी उत्सव मना रहे हैं। 


सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने रिफ्रैक्टिव सर्जरी के विकास और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में एडवांस्ड विज़न करेक्शन तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। सेंटर फॉर साइट सूरत ने व्यापक नेत्र चिकित्सा के लिए एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है और दक्षिण गुजरात में पहली बार SILK तकनीक जैसी रिफ्रैक्टिव इनोवेशन को अपनाकर अपनी अग्रणी भूमिका को भी मजबूत किया है। 


पिछले कुछ वर्षों में सेंटर फॉर साइट सूरत में छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और चश्मे व कॉन्टैक्ट लेंस पर निर्भरता से मुक्ति चाहने वाले लोगों के बीच एडवांस्ड रिफ्रैक्टिव प्रक्रियाओं की मांग लगातार बढ़ी है। इन बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र SILK, फेम्टो LASIK, ICL और PRK सहित विज़न करेक्शन की आधुनिक प्रक्रियाओं की पूरी श्रृंखला उपलब्ध कराता है, जिससे प्रत्येक मरीज की आंखों की स्थिति, जीवनशैली और विज़ुअल आवश्यकताओं के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सलाह दी जा सकती है। 


SILK लेजर विज़न करेक्शन तकनीक में नवीनतम प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जो बेहतर प्रिसिशन, अधिक आराम और तेज़ विज़ुअल रिकवरी प्रदान करती है। सेंटर फॉर साइट SILK सर्जरी के वैश्विक अग्रदूतों में शामिल है और अत्याधुनिक तकनीकों तथा क्लिनिकल विशेषज्ञता के माध्यम से रिफ्रैक्टिव नेत्र चिकित्सा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 


डॉ. परेश एम. वैद्य, मेडिकल डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइट सूरत, दक्षिण गुजरात के अग्रणी कैटरैक्ट और रिफ्रैक्टिव सर्जनों में से एक हैं और उन्हें इस क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। रिफ्रैक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी रहे डॉ. वैद्य लगभग तीन दशकों से LASIK प्रक्रियाएं कर रहे हैं और अब तक 22,000 से अधिक LASIK सर्जरी सफलतापूर्वक कर चुके हैं। 


इस अवसर पर सेंटर फॉर साइट सूरत के मेडिकल डायरेक्टर ​डॉ. परेश एम. वैद्य ने कहा,आज के मरीजों की अपेक्षाएं पहले की तुलना में काफी बदल चुकी हैं। वे ऐसे सटीक, सुरक्षित और व्यक्तिगत विज़न करेक्शन समाधान चाहते हैं जो उनकी जीवनशैली और दीर्घकालिक विज़ुअल लक्ष्यों के अनुरूप हों। पिछले तीन दशकों में रिफ्रैक्टिव सर्जरी के विकास को करीब से देखने के बाद मेरा मानना है कि SILK जैसी तकनीकें विज़न करेक्शन की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो हमें उत्कृष्ट परिणामों के साथ अत्यधिक व्यक्तिगत उपचार अनुभव प्रदान करने में सक्षम बनाती हैं। सेंटर फॉर साइट में हमारी प्रतिबद्धता केवल रिफ्रैक्टिव सर्जरी तक सीमित नहीं है। SILK जैसी एडवांस्ड तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहने के साथ-साथ हमारा मुख्य उद्देश्य एक ही छत के नीचे व्यापक नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। चाहे कैटरैक्ट हो, रेटिना, ग्लूकोमा, कॉर्निया, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी या एडवांस्ड विज़न करेक्शन, दक्षिण गुजरात के मरीज अपने घर के निकट विश्वस्तरीय उपचार प्राप्त कर सकते हैं।” 


सेंटर फॉर साइट सूरत में LASIK और SILK सर्जरी करा चुके मरीजों ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए और विज़न करेक्शन सर्जरी से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के लिए आभार व्यक्त किया। कई मरीजों ने वर्षों तक चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस पर निर्भर रहने के बाद मिली स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए बताया कि बेहतर दृष्टि ने उनके आत्मविश्वास, सुविधा, पेशेवर प्रदर्शन और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बेहतर बनाया है। 


रिफ्रैक्टिव सर्जरी के अलावा सेंटर फॉर साइट सूरत कैटरैक्ट, रेटिना, ग्लूकोमा, कॉर्निया, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी, स्क्विंट, ड्राई आई, ऑक्यूलोप्लास्टी और एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेवाओं सहित नेत्र चिकित्सा की व्यापक सेवाएं प्रदान करता है। यह समग्र दृष्टिकोण मरीजों को सभी प्रमुख नेत्र रोगों के लिए एक ही छत के नीचे विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराता है। 


पिछले पांच वर्षों में सेंटर फॉर साइट सूरत ने अनुभवी विशेषज्ञों, अत्याधुनिक तकनीक, नैतिक क्लिनिकल प्रथाओं और मरीज-केंद्रित देखभाल के माध्यम से सूरत और दक्षिण गुजरात के मरीजों का विश्वास अर्जित किया है। 


नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों की उत्कृष्टता के साथ, सेंटर फॉर साइट आज भारत में 95 से अधिक केंद्रों का संचालन करता है। 350 से अधिक विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों का इसका नेटवर्क हर वर्ष 15 लाख से अधिक मरीजों को सेवाएं प्रदान करता है। “Every Eye Deserves the Best” के अपने सिद्धांत के अनुरूप यह संस्थान नेत्र चिकित्सा की नवीनतम वैश्विक तकनीकों और उपचार सुविधाओं को देशभर के मरीजों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

May 30, 2026

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा एवं आईएमए आगरा ने आयोजित किया जागरूकता एवं सीएमई कार्यक्रम

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा एवं आईएमए आगरा ने आयोजित किया जागरूकता एवं सीएमई कार्यक्रम

आगरा, 30 मई 2026: यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) आगरा के सहयोग से एक भव्य कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में हो रही नवीनतम प्रगति, उन्नत उपचार पद्धतियों तथा रोगों की बेहतर रोकथाम एवं प्रबंधन के बारे में चिकित्सकों और स्वास्थ्य समुदाय को जागरूक करना था। इस अवसर पर चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने कैंसर, मोटापा, डायबिटिक किडनी रोग एवं प्रोस्टेट संबंधी बीमारियों के आधुनिक उपचारों पर विस्तृत चर्चा की।


इस अवसर पर सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा के प्रिंसिपल एवं डीन प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता चीफ़ गेस्ट के रूप में उपस्थित रहे, जबकि यथार्थ ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीईओ श्री अमित सिंह गेस्ट ऑफ़ हॉनर के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में यथार्थ हॉस्पिटल, आगरा के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. मनीष गुरुदत्ता की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और विशेष बनाया।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. अनिमेष गुप्ता ने “Beyond Chemotherapy: Decoding Immunotherapy & Targeted Therapies in Oncology” विषय पर कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी एवं टार्गेटेड थेरेपी की भूमिका पर प्रकाश डाला। लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सुमित लवानिया ने “Unraveling Obesity – The What, Why and How. Newer Agents” विषय पर मोटापे के बढ़ते खतरे और आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी दी। वहीं डॉ. विभांशु गुप्ता ने डायबिटिक किडनी डिजीज के प्रबंधन एवं हालिया प्रगति पर चर्चा की, जबकि डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने प्रोस्टेट समस्याओं के उपचार में MIST Therapy की उपयोगिता और लाभों को विस्तार से समझाया।


यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा के प्रबंधन ने कहा, “हमें इस अत्यंत सफल कार्यक्रम की झलकियाँ साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है, जिसमें चिकित्सा समुदाय और समाज के विभिन्न वर्गों से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारियों, सार्थक संवाद और सक्रिय सहभागिता ने इस कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रभावशाली बनाया। यथार्थ हॉस्पिटल का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है। हमें विश्वास है कि ऐसे कार्यक्रम चिकित्सकों के ज्ञान को समृद्ध करने के साथ-साथ मरीजों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”


यथार्थ हॉस्पिटल ने इस अवसर पर आईएमए आगरा के पदाधिकारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आईएमए आगरा के अध्यक्ष डॉ. पंकज नागायच, मानद सचिव डॉ. रजनीश कुमार मिश्रा, इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेंट डॉ. अनूप दीक्षित, प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. हरेंद्र गुप्ता, साइंटिफिक सेक्रेटरी डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल तथा कोषाध्यक्ष डॉ. मुकेश भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। नवीनतम चिकित्सा तकनीकों, उभरती उपचार पद्धतियों और रोग प्रबंधन की आधुनिक रणनीतियों पर हुए विचार-विमर्श ने उपस्थित चिकित्सकों को बहुमूल्य जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में शामिल चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ऐसे शैक्षणिक आयोजनों को चिकित्सा समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।


कार्यक्रम का समापन फेलोशिप एवं डिनर के साथ हुआ। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, आगरा ने सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी और सहयोग ने इस आयोजन को यादगार और अत्यंत सफल बनाया। अस्पताल भविष्य में भी इसी प्रकार के शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा ज्ञान से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

May 25, 2026

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया: चेहरे के तेज दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया: चेहरे के तेज दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

मुरादाबाद: ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (TN) एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें ट्राइजेमिनल नर्व प्रभावित हो जाती है। यह नर्व चेहरे से मस्तिष्क तक संवेदनाओं के संकेत पहुंचाने का काम करती है। जब इस नर्व पर असर पड़ता है, तो मरीज को चेहरे में बेहद तेज और असहनीय दर्द महसूस हो सकता है। इसे दुनिया की सबसे दर्दनाक बीमारियों में से एक माना जाता है। यह समस्या अक्सर तब होती है जब मस्तिष्क से निकलने वाली नर्व पर कोई ब्लड वेसल्स दबाव डालती है, जिससे नर्व की सुरक्षात्मक परत (मायलिन शीथ) क्षतिग्रस्त हो जाती है और नर्व सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती। कुछ मामलों में मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ट्यूमर, चेहरे की चोट या अन्य अज्ञात कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी, न्यूरो क्रिटिकल केयर एवं स्पाइन सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिनेश रतनानी ने बताया “इस बीमारी में दर्द अचानक शुरू हो सकता है और कुछ सेकंड से लेकर दो मिनट तक बना रह सकता है। मरीज इसे चुभने वाले, बिजली के झटके जैसे या तेज शूटिंग पेन के रूप में महसूस करते हैं। आमतौर पर दर्द चेहरे के एक तरफ होता है और होंठ, आंख, नाक, सिर की त्वचा, माथे या जबड़े जैसे हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। कई बार रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियां जैसे खाना खाना, बात करना, दांत साफ करना, चेहरे को छूना या ठंडी हवा के संपर्क में आना भी दर्द को ट्रिगर कर सकता है। ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया दो प्रकार का होता है—पहले प्रकार में तेज और अचानक दर्द होता है, जबकि दूसरे प्रकार में लंबे समय तक रहने वाला जलन, दर्द और धड़कन जैसा एहसास अधिक होता है।“


इस बीमारी की पहचान के लिए कोई एक विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और चेहरे के दर्द से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे दांतों की बीमारी, टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) सिंड्रोम या क्लस्टर हेडेक को बाहर करके निदान करते हैं। MRI स्कैन के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं नर्व पर दबाव, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या ट्यूमर जैसी समस्या तो नहीं है।


डॉ. दिनेश ने आगे बताया “इलाज की शुरुआत आमतौर पर दवाओं से की जाती है, विशेष रूप से ऐसी दवाओं से जो नर्व की गतिविधि को स्थिर करने में मदद करती हैं। कई मरीजों में ये दवाएं प्रभावी होती हैं, लेकिन समय के साथ इनके असर में कमी आ सकती है या चक्कर और थकान जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। यदि दवाएं असर न करें, तो सर्जरी एक विकल्प बनती है। माइक्रोवैस्कुलर डिकम्प्रेशन (MVD) सबसे प्रभावी प्रक्रियाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें सर्जन नर्व और उस पर दबाव डालने वाली रक्त वाहिका के बीच सुरक्षात्मक परत लगाते हैं। इस प्रक्रिया की सफलता दर लगभग 80–90 प्रतिशत तक हो सकती है, हालांकि यह एक जटिल ब्रेन सर्जरी है। इसके अलावा, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RF Ablation) जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग भी दर्द की संवेदना कम करने के लिए किया जाता है।“


ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के साथ जीवन जीना कई मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि अचानक होने वाले दर्द के दौरे चिंता, तनाव और अवसाद का कारण बन सकते हैं। ऐसे में दर्द को बढ़ाने वाले कारणों से बचना, जैसे बहुत ठंडी हवा से चेहरे की सुरक्षा करना, मुलायम भोजन लेना और डॉक्टरों या पेन स्पेशलिस्ट की सलाह लेना मददगार हो सकता है। यदि चेहरे में अचानक बिजली के झटके जैसा दर्द महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

May 14, 2026

हाई Pulse Pressure को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, दिल की बीमारी का हो सकता है शुरुआती संकेत

 

हाई Pulse Pressure को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, दिल की बीमारी का हो सकता है शुरुआती संकेत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेत है पल्स प्रेशर, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। सही जानकारी पाने और आप तक पहुंचाने के लिए हमने यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एंड एचओडी, इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर सुमित लावनिया से बात की। उनके मुताबिक, पल्स प्रेशर शरीर की हृदय संबंधी स्थिति को समझने में अहम भूमिका निभाता है। अगर इसे समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

 

लेकिन आप में बहुत ही कम लोग जानते हैं होंगे कि पल्स प्रेशर क्या होता है। इसलिए बता दें कि पल्स प्रेशर का मतलब सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच का अंतर होता है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg है, तो उसका पल्स प्रेशर 40 माना जाएगा। आमतौर पर 40 के आसपास का पल्स प्रेशर सही माना जाता है, लेकिन अगर यह लगातार 60 या उससे अधिक हो जाए, तो यह हृदय रोगों का शुरुआती संकेत हो सकता है। आइए इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

 

पल्स प्रेशर को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर का कहना है कि हाई पल्स प्रेशर धमनियों के सख्त होने, हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी का संकेत देता है। बढ़ती उम्र, धूम्रपान, मोटापा, तनाव, डायबिटीज और खराब खानपान इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई बार मरीज को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

 

दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं हेल्दी लाइफस्टाइल

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। जैसे-

नियमित व्यायाम- अगर दिल को हेल्दी रखना है तो सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप अपने शरीर की गतिविधियों को बढ़ाएं। इसके लिए आप घंटों जिम में पसीना बहाना की बजाए रोज के 30 मिनट तेज स्पीड से चलना शुरू करें, सीढ़ियां चढ़ें, योग या हल्की एक्सरसाइज करें क्योंकि यह भी काफी फायदेमंद हो सकती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता हैवजन कंट्रोल में रहता है और हार्ट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।


संतुलित आहार- पल्स प्रेशर और हार्ट हेल्थ काफी हद तक आपकी प्लेट पर निर्भर करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और मीठी चीजें खाने से बचें, क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल और वजन दोनों को बढ़ सकते है। कोशिश करें कि खाने में फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज जैसी हेल्दी चीजों को ही शामिल करें। आप जितना घर का सादा खाएंगे, उतनी ही हार्ट हेल्थ बेहतर होगी।


कम नमक का सेवन- डॉक्टर बताते हैं कि आप खाने में कितना नमक खा रहे हैं, यह सीधा-सीधा हमारी हार्ट हेल्थ और ब्लड प्रेशर से जुड़ा हुआ है। कई लोगों को खाने में नमक थोड़ा ज्यादा चाहिए होता है, ऐसे में यह उनके दिल को नुकसान पहुंचा सकता है।


पर्याप्त नींद- अगर आप पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं तो यह आपके शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। खासकर हार्ट को, क्योंकि जब शरीर को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता है तो स्ट्रेस और ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण बनता है। इसलिए कोशिश करें कि रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।


स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें- बच्चों से लेकर बड़ो तक, आजकल हर कोई इतना स्ट्रेस ले रहा है कि हर किसी को सेहत से जुड़ी कोई कोई समस्या हो रही है। इसे संभालना भी बहुत जरूरी है क्योंकि अगर लगातार तनाव बना रहा तो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में परिवार और दोस्तों से बात करें या मेडिटेशन और गहरी सांस लेने जैसी आदतें अपनाएं। यह सभी आदतें दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।