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May 14, 2026

हाई Pulse Pressure को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, दिल की बीमारी का हो सकता है शुरुआती संकेत

 

हाई Pulse Pressure को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, दिल की बीमारी का हो सकता है शुरुआती संकेत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेत है पल्स प्रेशर, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। सही जानकारी पाने और आप तक पहुंचाने के लिए हमने यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एंड एचओडी, इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर सुमित लावनिया से बात की। उनके मुताबिक, पल्स प्रेशर शरीर की हृदय संबंधी स्थिति को समझने में अहम भूमिका निभाता है। अगर इसे समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

 

लेकिन आप में बहुत ही कम लोग जानते हैं होंगे कि पल्स प्रेशर क्या होता है। इसलिए बता दें कि पल्स प्रेशर का मतलब सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच का अंतर होता है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg है, तो उसका पल्स प्रेशर 40 माना जाएगा। आमतौर पर 40 के आसपास का पल्स प्रेशर सही माना जाता है, लेकिन अगर यह लगातार 60 या उससे अधिक हो जाए, तो यह हृदय रोगों का शुरुआती संकेत हो सकता है। आइए इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

 

पल्स प्रेशर को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर का कहना है कि हाई पल्स प्रेशर धमनियों के सख्त होने, हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी का संकेत देता है। बढ़ती उम्र, धूम्रपान, मोटापा, तनाव, डायबिटीज और खराब खानपान इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई बार मरीज को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

 

दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं हेल्दी लाइफस्टाइल

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। जैसे-

नियमित व्यायाम- अगर दिल को हेल्दी रखना है तो सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप अपने शरीर की गतिविधियों को बढ़ाएं। इसके लिए आप घंटों जिम में पसीना बहाना की बजाए रोज के 30 मिनट तेज स्पीड से चलना शुरू करें, सीढ़ियां चढ़ें, योग या हल्की एक्सरसाइज करें क्योंकि यह भी काफी फायदेमंद हो सकती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता हैवजन कंट्रोल में रहता है और हार्ट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।


संतुलित आहार- पल्स प्रेशर और हार्ट हेल्थ काफी हद तक आपकी प्लेट पर निर्भर करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और मीठी चीजें खाने से बचें, क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल और वजन दोनों को बढ़ सकते है। कोशिश करें कि खाने में फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज जैसी हेल्दी चीजों को ही शामिल करें। आप जितना घर का सादा खाएंगे, उतनी ही हार्ट हेल्थ बेहतर होगी।


कम नमक का सेवन- डॉक्टर बताते हैं कि आप खाने में कितना नमक खा रहे हैं, यह सीधा-सीधा हमारी हार्ट हेल्थ और ब्लड प्रेशर से जुड़ा हुआ है। कई लोगों को खाने में नमक थोड़ा ज्यादा चाहिए होता है, ऐसे में यह उनके दिल को नुकसान पहुंचा सकता है।


पर्याप्त नींद- अगर आप पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं तो यह आपके शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। खासकर हार्ट को, क्योंकि जब शरीर को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता है तो स्ट्रेस और ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण बनता है। इसलिए कोशिश करें कि रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।


स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें- बच्चों से लेकर बड़ो तक, आजकल हर कोई इतना स्ट्रेस ले रहा है कि हर किसी को सेहत से जुड़ी कोई कोई समस्या हो रही है। इसे संभालना भी बहुत जरूरी है क्योंकि अगर लगातार तनाव बना रहा तो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में परिवार और दोस्तों से बात करें या मेडिटेशन और गहरी सांस लेने जैसी आदतें अपनाएं। यह सभी आदतें दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।


February 27, 2026

हाई-एंड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी से कैंसर उपचार में नई क्रांति

हाई-एंड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी से कैंसर उपचार में नई क्रांति

आगरा: रेडियोथेरेपी के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसने कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बना दिया है। आज के समय में EDGE 3.0 HyperArc with ExacTrac 2.0 जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ने इलाज की सटीकता को नई ऊंचाई दी है। यह सिस्टम ट्यूमर को बेहद प्रिसिशन के साथ टारगेट करता है और आसपास के स्वस्थ टिश्यू को सुरक्षित रखता है। इससे न केवल इलाज की सफलता दर बढ़ती है, बल्कि साइड इफेक्ट्स भी कम होते हैं और मरीज को ज्यादा आरामदायक अनुभव मिलता है।



EDGE 3.0 HyperArc और ExacTrac 2.0 का कॉम्बिनेशन आधुनिक रेडियोथेरेपी का सबसे उन्नत रूप माना जाता है। इस तकनीक के माध्यम से रेडिएशन अत्यंत सटीकता से दिया जाता है, जिससे ट्यूमर पर प्रभावी नियंत्रण संभव होता है। उपचार के दौरान जटिलताएं कम होती हैं, सेशन की अवधि कम होती है और अस्पताल के चक्कर भी घटते हैं, जिससे रिकवरी तेज होती है। खास बात यह है कि पहले जिन हिस्सों में रेडिएशन दिया जा चुका है, वहां भी दोबारा उपचार की संभावना बनती है। साथ ही शरीर के उन कठिन हिस्सों में स्थित ट्यूमर का भी सफल इलाज संभव हो पाया है, जिन्हें पहले चुनौतीपूर्ण माना जाता था।



मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के क्लीनिकल एडमिनिस्ट्रेटर एवं प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर डायरेक्टर डॉ. राशि अग्रवाल ने बताया “इन तकनीकी प्रगति का वास्तविक प्रभाव मरीजों की कहानियों में साफ दिखाई देता है। 35 वर्षीय स्तन कैंसर से पीड़ित एक महिला को रेडिएशन से हृदय को नुकसान पहुंचने की चिंता थी। हार्ट-स्पेरिंग रेडिएशन थेरेपी और एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने ट्यूमर को सटीक रूप से टारगेट किया और हृदय को सुरक्षित रखा। इस पर्सनलाइज्ड अप्रोच से हृदय संबंधी रिस्क कम हुआ और दीर्घकालिक सर्वाइवल बेहतर हुई। इसी तरह 20 वर्षीय युवती, जिसे सर्वाइकल कैंसर के एक दुर्लभ और आक्रामक रूप का निदान हुआ था, ने एडवांस्ड रेडियोथेरेपी की मदद से कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त की।