This is default featured slide 1 title
Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.
This is default featured slide 2 title
Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.
This is default featured slide 3 title
Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.
This is default featured slide 4 title
Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.
This is default featured slide 5 title
Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.
July 16, 2026
Vidyamandir Classes Launches VIQ 2026; Offers Scholarships up to 100%,Rs.2.5 Crore Rewards for Students of Classes 5–12
July 14, 2026
Blood Clot in Eye: Causes, Symptoms & Treatment
Prof. Dr. Mahipal S. Sachdev, Padma Shri Awardee,
Chairman , Center For Sight Group of Eye Hospitals
A blood clot in eye, often showing as a red spot in the eye is medically called a subconjunctival haemorrhage. It occurs when tiny blood vessels under the conjunctiva break and leak blood. While the appearance may seem serious, it is usually harmless and tends to clear on its own within 1-2 weeks.
However, understanding its causes,
symptoms, and treatment options can help you know when medical
intervention may be necessary.
What Is a Blood Clot in the Eye?
A blood clot in the eye happens
when tiny blood vessels within the eye rupture, leaking blood under the
conjunctiva (the transparent surface layer of the eye). This can lead to a red
or dark spot that looks like a blood clot but is technically a pooling of
blood, similar to a bruise. Known medically as a subconjunctival haemorrhage,
this condition is usually painless and often resolves on its own. However, in
some cases, it may indicate an underlying health issue, especially if it is
recurrent.
Blood Clot in Eye Causes: Why It
Happens
Several factors can lead to a blood
clot in the eye. Common causes are:
- Physical strain: Heavy lifting, intense
coughing, or even sneezing can cause blood vessels in the eye to break,
resulting in a subconjunctival haemorrhage.
- Eye trauma: Injuries to the eye, even minor ones, can
rupture blood vessels, leading to the appearance of a blood spot in the
eye.
- High blood pressure: Elevated blood pressure can
make blood vessels more susceptible to rupture, increasing the risk of
blood clots in the eye.
- Blood-thinning medications: Medications like aspirin
or anticoagulants may predispose the blood vessels in the eye to break.
- Diabetes: Diabetes can also increase the chances of a
broken blood vessel in the eye.
- Contact lens use: Improper use of contact lenses, including inserting or removing
them with excessive force, can result in a subconjunctival haemorrhage.
Blood Clot in Eye Symptoms
Common blood clot in eye symptoms
include:
- Bright red patch on the white part of the
eye – the
most noticeable symptom.
- Mild irritation - usually not
painful.
- A sensation of fullness in eye without pain - discomfort but no
sharp pain.
- Slight swelling of the conjunctiva - giving a puffy or
raised appearance.
How Is a Blood Clot in the Eye
Diagnosed
If you notice a blood spot in the
eye or experience recurrent episodes, consulting
an eye specialist is advisable. An ophthalmologist will conduct a
visual examination during a consultation to confirm. In some cases, especially
if the bleeding is recurrent or extensive, additional tests such as blood
pressure measurement or blood tests may be recommended to rule out systemic
causes like hypertension, diabetes, or clotting disorders.
Once a diagnosis has been made, the
ophthalmologist will suggest a treatment for broken blood vessels in the eye.
Blood Clot in Eye Treatment: How to
Heal Faster
Most cases of blood clots in the
eye resolve without medical intervention. Typically, it will heal on its own
within one to two weeks. The red spot gradually fades as the body reabsorbs the
blood. However, in some cases, the following protocols may be followed:
- Artificial tears: Over-the-counter
artificial tears can provide relief from any mild irritation or dryness
associated with the bleeding.
- Avoidance of blood-thinning medications: If the bleeding is
linked to blood-thinning medications, your doctor may adjust your dosage
or suggest alternative options.
- Protective eyewear: If the bleeding is due
to trauma, protective eyewear may be recommended to prevent further
injuries.
- Monitor for underlying conditions: In cases where high
blood pressure or diabetes is identified as a potential cause of
subconjunctival haemorrhage, managing these conditions becomes crucial for
prevention.
This is the usual line of
subconjunctival haemorrhage treatment followed by ophthalmologists in India and
everywhere else.
How to Prevent Blood Clots in the
Eye
To avoid frequent red spot in the
eye treatment:
- Manage chronic conditions (hypertension,
diabetes)
- Wear protective eyewear during risky activities
- Use lubricating drops for comfort
- Avoid excessive eye rubbing
Stay hydrated and follow a balanced
diet
Conclusion
Recognising the symptoms and understanding the causes of blood clots in the eye can help manage and prevent future occurrences. Proper care, attention to overall health, and lifestyle adjustments can reduce the risk of developing a blood clot and maintain healthy eyes.
June 15, 2026
विद्यामंदिर क्लासेज का नेशनल एडमिशन टेस्ट 28 जून को, स्कॉलरशिप, मेंटरशिप और मुफ़्त अकादमिक सपोर्ट के अवसर
देश
के जाने-माने कोचिंग संस्थान विद्यामंदिर क्लासेज (वीएमसी) अपना फ्लैगशिप नेशनल
एडमिशन टेस्ट (एनएटी) 28 जून को आयोजित करेगा। संस्थान ने बताया कि इस टेस्ट का
उद्देश्य देशभर के होनहार विद्यार्थियों को पहचानकर उन्हें दाखिले और 100% तक
की स्कॉलरशिप देने के साथ-साथ जेईई (मेन व एडवांस), नीट
और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अतिरिक्त सहायता प्रदान करना है।
एनएटी
के लिए योग्य छात्र वे हैं जो आगामी सत्र में कक्षा 6वीं
से 12वीं
तक में प्रवेश लेने वाले हैं। चयनित छात्रों को वीएमसी के विविध शैक्षणिक
प्रोग्रामों में जगह मिलने का अवसर मिलेगा तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को
आर्थिक रुचि के रूप में स्कॉलरशिप भी प्रदान की जाएगी। संस्थान ने बताया कि यह पहल
प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करने और उन्हें शैक्षिक सफलता की दिशा में
प्रेरित करने के लिए आयोजित की जा रही है।
वीएमसी
ने कहा कि एनएटी उत्तीर्ण छात्रों को कई तरह के शैक्षणिक लाभ मिलेंगे, जिनमें
संस्थापक और विशेषज्ञों द्वारा आयोजित मेंटॉरशिप व मोटिवेशनल सत्र, नि:शुल्क
डाउट रिज़ॉल्यूशन, निकटतम वीएमसी केंद्र पर अकादमिक सहायता, वैज्ञानिक
आधार पर तैयार ई-स्टडी मटेरियल और असीमित मॉक टेस्ट शामिल हैं। ये संसाधन खासतौर
पर जेईई, नीट, ओलंपियाड्स और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रखकर
तैयार किए गए हैं। वीएमसी के सह-संस्थापक श्री बृज मोहन ने कहा, “विद्यार्थियों
की आवश्यकता को विभिन्न चरणों में समझना हमारी शिक्षण पद्धति की प्रेरणा रहा है।
इसी दृष्टिकोण के कारण हमारे छात्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं
में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। वीएमसी में कक्षाओं का संचालन संस्थापकों और
अनुभवी फैकल्टी सदस्यों द्वारा किया जाता है, जो
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को पूरी तरह से तैयार करते हैं।”
संस्था
का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा की ठोस नींव तैयार करके योग्य तथा
प्रेरित इंजीनियर और डॉक्टर तैयार करना है। वीएमसी का कहना है कि जिन
छात्र-छात्राओं का लक्ष्य देश के शीर्ष इंजीनियरिंग व मेडिकल संस्थानों में अध्ययन
करना है, उन्हें इस परीक्षा में हिस्सा अवश्य लेना चाहिए क्योंकि यह
उन्हें सही दिशा और संसाधन प्रदान करती है।
एनएटी के लिए पंजीकरण और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इच्छुक अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट www.vidyamandir.com पर जा सकते हैं। संस्थान ने परीक्षा से जुड़ी अंतिम तिथियों, पात्रता मानदंड और परीक्षा प्रारूप के बारे में विस्तृत निर्देश अपनी साइट पर उपलब्ध कराए हैं।
ब्रेन ट्यूमर का समय पर इलाज देता है बेहतर जीवन की उम्मीद
पटना: ब्रेन ट्यूमर एक कॉम्प्लेक्स स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में असामान्य सेल्स की वृद्धि होने लगती है। ये ट्यूमर मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकते हैं और नॉन-कैंसरस या कैंसरस दोनों प्रकार के हो सकते हैं। हालांकि ब्रेन ट्यूमर अपेक्षाकृत दुर्लभ बीमारी है, लेकिन इसका प्रभाव मरीज और उसके परिवार के जीवन पर गहरा पड़ सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कुछ जोखिम कारक इसके विकास की संभावना बढ़ा सकते हैं। इनमें बढ़ती उम्र, रेडिएशन के संपर्क में आना, परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास होना और न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस जैसी कुछ आनुवंशिक या चिकित्सीय स्थितियां शामिल हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट, डॉ. (प्रो.) विवेक यादव ने बताया “ब्रेन ट्यूमर के लक्षण उसके आकार, प्रकार और मस्तिष्क में उसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं। अधिकांश मामलों में लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और समय के साथ गंभीर होते जाते हैं। लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ना, धुंधला दिखाई देना, बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से की गतिविधि में कमी या चलने-फिरने में परेशानी, तथा व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं। कई बार शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता और समस्या तब सामने आती है जब ट्यूमर आसपास के ऊतकों पर दबाव डालने लगता है। यदि किसी व्यक्ति में ब्रेन ट्यूमर की आशंका होती है, तो उसे न्यूरोसर्जन के पास भेजा जाता है। निदान की प्रक्रिया में सबसे पहले शारीरिक जांच और विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है। इसके बाद एमआरआई (MRI) या सीटी स्कैन (CT Scan) जैसे इमेजिंग परीक्षण किए जाते हैं, जिनकी मदद से ट्यूमर की स्थिति, आकार और उसके प्रभाव का सटीक आकलन किया जाता है।“
ब्रेन ट्यूमर का उपचार उसकी प्रकृति, आकार और स्थान के आधार पर तय किया जाता है। कई मामलों में माइक्रोस्कोपिक, एंडोस्कोपिक या नेविगेशन-गाइडेड सर्जरी के माध्यम से ट्यूमर को निकालने की सलाह दी जाती है। कुछ मरीजों में रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी का उपयोग ट्यूमर को छोटा करने और उसकी वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। गंभीर परिस्थितियों में बेहतर परिणामों के लिए इन उपचारों का संयोजन भी अपनाया जा सकता है।
डॉ. (प्रो.) विवेक ने आगे बताया “ब्रेन ट्यूमर और उसके उपचार से जुड़े कुछ जोखिम भी होते हैं, जिनके बारे में मरीज और उनके परिजनों को जानकारी होना आवश्यक है। सर्जरी के दौरान या बाद में संक्रमण, रक्तस्राव और मस्तिष्क में सूजन जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में ट्यूमर को पूरी तरह निकालना संभव नहीं होता, जिसके कारण अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, रेडिएशन और कीमोथेरेपी के दौरान थकान, मतली और बाल झड़ने जैसे दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी स्थिति है जिसमें समय पर पहचान और शीघ्र उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को इसके संभावित लक्षण दिखाई दें, तो उसे बिना देरी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।“
शुरुआती निदान और उचित उपचार से न केवल बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, बल्कि मरीज सामान्य और स्वस्थ जीवन भी जी सकता है। साथ ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और हानिकारक रसायनों के अनावश्यक संपर्क से बचकर समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
June 12, 2026
युवाओं में अचानक कार्डियक अरेस्ट क्यों बन रहा है गंभीर चिंता का विषय
हल्दवानी: हाल के वर्षों में हमने कई प्रसिद्ध हस्तियों की अचानक मृत्यु की खबरें पढ़ी हैं, जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगते थे और जिन्हें कोई गंभीर बीमारी भी नहीं थी। इनमें से कई लोग अपनी सामान्य दिनचर्या के काम कर रहे थे, तभी अचानक बेहोश होकर गिर पड़े और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। ऐसे अधिकांश मामलों के पीछे कारण अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट होता है।
हमारा हृदय एक जटिल विद्युत प्रणाली के माध्यम से काम करता है। हृदय के भीतर स्वतः उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म विद्युत संकेत पूरे हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचते हैं और उन्हें एक समन्वित तरीके से संकुचित होने के लिए प्रेरित करते हैं। यही प्रक्रिया हृदय को रक्त पंप करने में सक्षम बनाती है, जिससे शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। जब यह पंपिंग रुक जाती है, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं। कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय की विद्युत गतिविधि में अचानक गड़बड़ी आ जाती है और हृदय प्रभावी रूप से रक्त पंप करना बंद कर देता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. संजीव मल्होत्रा ने बताया “अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक जैसी स्थितियां नहीं हैं, हालांकि कई बार गंभीर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में से किसी एक में अचानक रुकावट आ जाती है, जो आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल की परत पर बने रक्त के थक्के के कारण होती है। इससे हृदय की मांसपेशियों के एक हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो जाता है और समय के साथ वहां निशान ऊतक बन सकता है। इससे हृदय की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है। कुछ मामलों में हार्ट अटैक के कारण हृदय की विद्युत प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। वास्तव में, कोरोनरी आर्टरी डिजीज आज भी अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट का सबसे प्रमुख कारण है।“
पिछले कुछ वर्षों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे खराब जीवनशैली एक प्रमुख कारण है। धूम्रपान, नशीले पदार्थों का सेवन, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी आदतें कम उम्र में ही धमनियों में वसा जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इसके अलावा, स्कूली बच्चों और किशोरों में बढ़ता मोटापा तथा डायबिटीज भी भविष्य में हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा रहा है। परिणामस्वरूप, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जीवन के सबसे उत्पादक वर्षों में ही सामने आ सकती है।
डॉ. संजीव ने आगे बताया “कुछ आनुवंशिक या जन्मजात स्थितियां भी अचानक कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी एक महत्वपूर्ण बीमारी है, जिसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। इसके कारण सीने में दर्द, सांस फूलना, बेहोशी के दौरे या कुछ मामलों में अचानक कार्डियक अरेस्ट भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, हृदय की धड़कनों से जुड़ी कुछ असामान्य स्थितियां, जैसे लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम और अरिद्मोजेनिक राइट वेंट्रिकुलर डिस्प्लेसिया, भी अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं। अच्छी बात यह है कि आधुनिक जांच तकनीकों की मदद से इन बीमारियों की पहचान समय रहते की जा सकती है और उचित उपचार के माध्यम से इनके जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।“
स्वस्थ जीवन की शुरुआत सही आदतों से होती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखना हृदय को स्वस्थ रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, समय-समय पर हेल्थ चेक-अप, आवश्यक लैब जांच, उपयुक्त इमेजिंग टेस्ट और विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श के माध्यम से जोखिम कारकों और छिपी हुई बीमारियों की शुरुआती पहचान की जा सकती है। समय पर की गई जांच और उपचार न केवल गंभीर हृदय रोगों को रोक सकते हैं, बल्कि जीवन के लिए खतरा बनने वाली जटिलताओं से भी बचा सकते हैं।
June 03, 2026
सेंटर फॉर साइट ने पूरे किए उत्कृष्टता के 30 वर्ष, सूरत में 5 वर्षों से दे रहा है एडवांस्ड विज़न करेक्शन और व्यापक नेत्र चिकित्सा सेवाएं
सूरत, 3 जून 2026: नेत्र चिकित्सा
के क्षेत्र में उत्कृष्टता के 30
वर्ष पूरे होने के अवसर पर
सेंटर फॉर साइट
ग्रुप ऑफ़ आई हॉस्पिटल्स ने अपने सूरत केंद्र में "एडवांसिंग
रिफ्रैक्टिव केयर एंड सेंटर एक्सीलेंस" विषय पर एक
जन-जागरूकता एवं इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नेत्र रोग
विशेषज्ञों, मरीजों
और समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया तथा विज़न करेक्शन और व्यापक नेत्र देखभाल के
क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर चर्चा की। जहां सेंटर फॉर साइट राष्ट्रीय स्तर पर
अपनी तीन दशक लंबी उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, वहीं सिटी लाइट मेन रोड और रांदेर रोड स्थित इसके सूरत
केंद्र दक्षिण गुजरात के लोगों की सेवा के पांच वर्ष पूरे होने का भी उत्सव मना
रहे हैं।
सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने
रिफ्रैक्टिव सर्जरी के विकास और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में
एडवांस्ड विज़न करेक्शन तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। सेंटर फॉर साइट
सूरत ने व्यापक नेत्र चिकित्सा के लिए एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान
बनाई है और दक्षिण गुजरात में पहली बार SILK
तकनीक जैसी रिफ्रैक्टिव इनोवेशन को अपनाकर अपनी अग्रणी भूमिका को भी मजबूत
किया है।
पिछले कुछ वर्षों में सेंटर फॉर
साइट सूरत में छात्रों,
कामकाजी पेशेवरों और चश्मे व कॉन्टैक्ट लेंस पर निर्भरता से मुक्ति चाहने वाले
लोगों के बीच एडवांस्ड रिफ्रैक्टिव प्रक्रियाओं की मांग लगातार बढ़ी है। इन बदलती
जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र SILK,
फेम्टो LASIK, ICL और PRK सहित विज़न
करेक्शन की आधुनिक प्रक्रियाओं की पूरी श्रृंखला उपलब्ध कराता है, जिससे प्रत्येक
मरीज की आंखों की स्थिति,
जीवनशैली और विज़ुअल आवश्यकताओं के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सलाह दी जा सकती
है।
SILK
लेजर विज़न करेक्शन तकनीक में नवीनतम प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक
मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है,
जो बेहतर प्रिसिशन,
अधिक आराम और तेज़ विज़ुअल रिकवरी प्रदान करती है। सेंटर फॉर साइट SILK सर्जरी के
वैश्विक अग्रदूतों में शामिल है और अत्याधुनिक तकनीकों तथा क्लिनिकल विशेषज्ञता के
माध्यम से रिफ्रैक्टिव नेत्र चिकित्सा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा
है।
डॉ. परेश एम.
वैद्य, मेडिकल
डायरेक्टर, सेंटर
फॉर साइट सूरत, दक्षिण
गुजरात के अग्रणी कैटरैक्ट और रिफ्रैक्टिव सर्जनों में से एक हैं और उन्हें इस
क्षेत्र में 30 वर्षों
से अधिक का अनुभव है। रिफ्रैक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी रहे डॉ. वैद्य
लगभग तीन दशकों से LASIK
प्रक्रियाएं कर रहे हैं और अब तक 22,000
से अधिक LASIK सर्जरी
सफलतापूर्वक कर चुके हैं।
इस अवसर पर सेंटर
फॉर साइट सूरत के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. परेश एम. वैद्य ने कहा, “आज के मरीजों की अपेक्षाएं पहले की तुलना में काफी बदल चुकी
हैं। वे ऐसे सटीक, सुरक्षित
और व्यक्तिगत विज़न करेक्शन समाधान चाहते हैं जो उनकी जीवनशैली और दीर्घकालिक
विज़ुअल लक्ष्यों के अनुरूप हों। पिछले तीन दशकों में रिफ्रैक्टिव सर्जरी के विकास
को करीब से देखने के बाद मेरा मानना है कि SILK
जैसी तकनीकें विज़न करेक्शन की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो हमें
उत्कृष्ट परिणामों के साथ अत्यधिक व्यक्तिगत उपचार अनुभव प्रदान करने में सक्षम
बनाती हैं। सेंटर फॉर साइट में हमारी प्रतिबद्धता केवल रिफ्रैक्टिव सर्जरी तक
सीमित नहीं है। SILK जैसी
एडवांस्ड तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहने के साथ-साथ हमारा मुख्य उद्देश्य एक
ही छत के नीचे व्यापक नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। चाहे कैटरैक्ट हो, रेटिना, ग्लूकोमा, कॉर्निया, पीडियाट्रिक
ऑप्थैल्मोलॉजी या एडवांस्ड विज़न करेक्शन,
दक्षिण गुजरात के मरीज अपने घर के निकट विश्वस्तरीय उपचार प्राप्त कर सकते
हैं।”
सेंटर फॉर साइट सूरत में LASIK और SILK सर्जरी करा
चुके मरीजों ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए और विज़न करेक्शन सर्जरी से
उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के लिए आभार व्यक्त किया। कई मरीजों ने वर्षों
तक चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस पर निर्भर रहने के बाद मिली स्वतंत्रता का उल्लेख करते
हुए बताया कि बेहतर दृष्टि ने उनके आत्मविश्वास, सुविधा,
पेशेवर प्रदर्शन और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बेहतर बनाया है।
रिफ्रैक्टिव सर्जरी के अलावा सेंटर
फॉर साइट सूरत कैटरैक्ट,
रेटिना, ग्लूकोमा, कॉर्निया, पीडियाट्रिक
ऑप्थैल्मोलॉजी, स्क्विंट, ड्राई आई, ऑक्यूलोप्लास्टी
और एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेवाओं सहित नेत्र चिकित्सा की व्यापक सेवाएं प्रदान
करता है। यह समग्र दृष्टिकोण मरीजों को सभी प्रमुख नेत्र रोगों के लिए एक ही छत के
नीचे विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराता है।
पिछले पांच वर्षों में सेंटर फॉर
साइट सूरत ने अनुभवी विशेषज्ञों,
अत्याधुनिक तकनीक, नैतिक
क्लिनिकल प्रथाओं और मरीज-केंद्रित देखभाल के माध्यम से सूरत और दक्षिण गुजरात के
मरीजों का विश्वास अर्जित किया है।
नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों की उत्कृष्टता के साथ, सेंटर फॉर साइट आज भारत में 95 से अधिक केंद्रों का संचालन करता है। 350 से अधिक विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों का इसका नेटवर्क हर वर्ष 15 लाख से अधिक मरीजों को सेवाएं प्रदान करता है। “Every Eye Deserves the Best” के अपने सिद्धांत के अनुरूप यह संस्थान नेत्र चिकित्सा की नवीनतम वैश्विक तकनीकों और उपचार सुविधाओं को देशभर के मरीजों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
May 30, 2026
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा एवं आईएमए आगरा ने आयोजित किया जागरूकता एवं सीएमई कार्यक्रम
आगरा, 30 मई 2026: यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) आगरा के सहयोग से एक भव्य कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में हो रही नवीनतम प्रगति, उन्नत उपचार पद्धतियों तथा रोगों की बेहतर रोकथाम एवं प्रबंधन के बारे में चिकित्सकों और स्वास्थ्य समुदाय को जागरूक करना था। इस अवसर पर चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने कैंसर, मोटापा, डायबिटिक किडनी रोग एवं प्रोस्टेट संबंधी बीमारियों के आधुनिक उपचारों पर विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा के प्रिंसिपल एवं डीन प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता चीफ़ गेस्ट के रूप में उपस्थित रहे, जबकि यथार्थ ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीईओ श्री अमित सिंह गेस्ट ऑफ़ हॉनर के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में यथार्थ हॉस्पिटल, आगरा के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. मनीष गुरुदत्ता की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और विशेष बनाया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. अनिमेष गुप्ता ने “Beyond Chemotherapy: Decoding Immunotherapy & Targeted Therapies in Oncology” विषय पर कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी एवं टार्गेटेड थेरेपी की भूमिका पर प्रकाश डाला। लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सुमित लवानिया ने “Unraveling Obesity – The What, Why and How. Newer Agents” विषय पर मोटापे के बढ़ते खतरे और आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी दी। वहीं डॉ. विभांशु गुप्ता ने डायबिटिक किडनी डिजीज के प्रबंधन एवं हालिया प्रगति पर चर्चा की, जबकि डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने प्रोस्टेट समस्याओं के उपचार में MIST Therapy की उपयोगिता और लाभों को विस्तार से समझाया।
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा के प्रबंधन ने कहा, “हमें इस अत्यंत सफल कार्यक्रम की झलकियाँ साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है, जिसमें चिकित्सा समुदाय और समाज के विभिन्न वर्गों से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारियों, सार्थक संवाद और सक्रिय सहभागिता ने इस कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रभावशाली बनाया। यथार्थ हॉस्पिटल का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है। हमें विश्वास है कि ऐसे कार्यक्रम चिकित्सकों के ज्ञान को समृद्ध करने के साथ-साथ मरीजों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
यथार्थ हॉस्पिटल ने इस अवसर पर आईएमए आगरा के पदाधिकारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आईएमए आगरा के अध्यक्ष डॉ. पंकज नागायच, मानद सचिव डॉ. रजनीश कुमार मिश्रा, इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेंट डॉ. अनूप दीक्षित, प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. हरेंद्र गुप्ता, साइंटिफिक सेक्रेटरी डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल तथा कोषाध्यक्ष डॉ. मुकेश भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। नवीनतम चिकित्सा तकनीकों, उभरती उपचार पद्धतियों और रोग प्रबंधन की आधुनिक रणनीतियों पर हुए विचार-विमर्श ने उपस्थित चिकित्सकों को बहुमूल्य जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में शामिल चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ऐसे शैक्षणिक आयोजनों को चिकित्सा समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
कार्यक्रम का समापन फेलोशिप एवं डिनर के साथ हुआ। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, आगरा ने सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी और सहयोग ने इस आयोजन को यादगार और अत्यंत सफल बनाया। अस्पताल भविष्य में भी इसी प्रकार के शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा ज्ञान से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
















.jpeg)
