पटना: ब्रेन ट्यूमर एक कॉम्प्लेक्स स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में असामान्य सेल्स की वृद्धि होने लगती है। ये ट्यूमर मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकते हैं और नॉन-कैंसरस या कैंसरस दोनों प्रकार के हो सकते हैं। हालांकि ब्रेन ट्यूमर अपेक्षाकृत दुर्लभ बीमारी है, लेकिन इसका प्रभाव मरीज और उसके परिवार के जीवन पर गहरा पड़ सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कुछ जोखिम कारक इसके विकास की संभावना बढ़ा सकते हैं। इनमें बढ़ती उम्र, रेडिएशन के संपर्क में आना, परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास होना और न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस जैसी कुछ आनुवंशिक या चिकित्सीय स्थितियां शामिल हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट, डॉ. (प्रो.) विवेक यादव ने बताया “ब्रेन ट्यूमर के लक्षण उसके आकार, प्रकार और मस्तिष्क में उसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं। अधिकांश मामलों में लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और समय के साथ गंभीर होते जाते हैं। लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ना, धुंधला दिखाई देना, बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से की गतिविधि में कमी या चलने-फिरने में परेशानी, तथा व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं। कई बार शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता और समस्या तब सामने आती है जब ट्यूमर आसपास के ऊतकों पर दबाव डालने लगता है। यदि किसी व्यक्ति में ब्रेन ट्यूमर की आशंका होती है, तो उसे न्यूरोसर्जन के पास भेजा जाता है। निदान की प्रक्रिया में सबसे पहले शारीरिक जांच और विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है। इसके बाद एमआरआई (MRI) या सीटी स्कैन (CT Scan) जैसे इमेजिंग परीक्षण किए जाते हैं, जिनकी मदद से ट्यूमर की स्थिति, आकार और उसके प्रभाव का सटीक आकलन किया जाता है।“
ब्रेन ट्यूमर का उपचार उसकी प्रकृति, आकार और स्थान के आधार पर तय किया जाता है। कई मामलों में माइक्रोस्कोपिक, एंडोस्कोपिक या नेविगेशन-गाइडेड सर्जरी के माध्यम से ट्यूमर को निकालने की सलाह दी जाती है। कुछ मरीजों में रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी का उपयोग ट्यूमर को छोटा करने और उसकी वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। गंभीर परिस्थितियों में बेहतर परिणामों के लिए इन उपचारों का संयोजन भी अपनाया जा सकता है।
डॉ. (प्रो.) विवेक ने आगे बताया “ब्रेन ट्यूमर और उसके उपचार से जुड़े कुछ जोखिम भी होते हैं, जिनके बारे में मरीज और उनके परिजनों को जानकारी होना आवश्यक है। सर्जरी के दौरान या बाद में संक्रमण, रक्तस्राव और मस्तिष्क में सूजन जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में ट्यूमर को पूरी तरह निकालना संभव नहीं होता, जिसके कारण अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, रेडिएशन और कीमोथेरेपी के दौरान थकान, मतली और बाल झड़ने जैसे दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी स्थिति है जिसमें समय पर पहचान और शीघ्र उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को इसके संभावित लक्षण दिखाई दें, तो उसे बिना देरी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।“
शुरुआती निदान और उचित उपचार से न केवल बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, बल्कि मरीज सामान्य और स्वस्थ जीवन भी जी सकता है। साथ ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और हानिकारक रसायनों के अनावश्यक संपर्क से बचकर समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।







