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January 31, 2026

कैंसर में अर्ली डिटेक्शन की भूमिका जीवन बचाने की सबसे मजबूत कड़ी

कैंसर में अर्ली डिटेक्शन की भूमिका जीवन बचाने की सबसे मजबूत कड़ी

सोनीपत: कैंसर असामान्य सेल्स की अनियंत्रित वृद्धि से होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो आज भी दुनिया भर में मृत्यु का बड़ा कारण बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल लगभग एक करोड़ लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, कैंसर को अब केवल मौत का पर्याय नहीं माना जाता। समय रहते पहचान यानी अर्ली डिटेक्शन से केवल इलाज के विकल्प बढ़ते हैं, बल्कि मरीज के जीवित रहने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।


कैंसर आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआत में यह सीमित दायरे में असामान्य सेल्स के छोटे समूह के रूप में होता है। जैसे-जैसे ये सेल्स बढ़ते हैं, ट्यूमर बनता है और अगर समय पर इलाज हो तो कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है। एक बार कैंसर फैल जाए तो उसका इलाज अधिक जटिल हो जाता है और उपचार का असर भी सीमित हो सकता है। इसी वजह से शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रारंभिक स्टेज में पकड़े गए कैंसर में सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी जैसे उपचार अधिक प्रभावी होते हैं और कई मामलों में बीमारी पूरी तरह ठीक भी हो सकती है।


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. संजीव कुमार ने बतायाअर्ली डिटेक्शन का सबसे बड़ा फायदा सर्वाइवल रेट में स्पष्ट बढ़ोतरी है। ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर जैसे कई कैंसर यदि शुरुआती स्टेज में पकड़ में जाएं, तो मरीज के लंबे और स्वस्थ जीवन की संभावना काफी बढ़ जाती है। शुरुआती अवस्था में कैंसर सीमित क्षेत्र तक रहता है, जिससे इलाज के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं और अत्यधिक आक्रामक उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके साथ ही, अर्ली डिटेक्शन इलाज की लागत को भी कम करता है क्योंकि शुरुआती इलाज अपेक्षाकृत सरल, कम समय वाला और कम खर्चीला होता है, जबकि एडवांस स्टेज में लंबे इलाज और अस्पताल में भर्ती होने से आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।


समय रहते पहचान से मरीज की जीवन गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। शुरुआती स्टेज के इलाज आमतौर पर कम इनवेसिव होते हैं और उनके साइड इफेक्ट भी कम होते हैं, जिससे मरीज शारीरिक और मानसिक रूप से कम तनाव महसूस करता है। कई मरीज इलाज के बाद जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं। इसके विपरीत, एडवांस स्टेज के कैंसर में थकान, दर्द, बाल झड़ना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।


डॉ. संजीव ने आगे बतायाकैंसर की अर्ली डिटेक्शन के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट, इमेजिंग तकनीक, जेनेटिक टेस्टिंग और ब्लड टेस्ट का सहारा लिया जाता है। मैमोग्राफी, पैप स्मियर, कोलोनोस्कोपी, पीएसए टेस्ट और स्किन एग्जाम जैसे स्क्रीनिंग टेस्ट लक्षण दिखने से पहले ही कैंसर की पहचान में मदद करते हैं। वहीं सीटी स्कैन, एमआरआई और पीईटी स्कैन जैसी इमेजिंग तकनीकें शरीर के अंदर मौजूद असामान्य बदलावों को स्पष्ट रूप से दिखाती हैं। जिन लोगों में पारिवारिक इतिहास होता है, उनके लिए जेनेटिक टेस्टिंग जोखिम को समझने और समय से जांच शुरू करने में सहायक हो सकती है। इसके अलावा, लिक्विड बायोप्सी जैसे ब्लड टेस्ट भविष्य में बिना सर्जरी के बहुत शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।



हालांकि अर्ली डिटेक्शन के कई फायदे हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। सभी प्रकार के कैंसर के लिए प्रभावी स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं हैं, जैसे पैंक्रियाटिक या ओवेरियन कैंसर। इसके अलावा, ग्रामीण या कम संसाधन वाले क्षेत्रों में जांच सुविधाओं की सीमित उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या है। कुछ मामलों में ओवर-डायग्नोसिस की आशंका भी रहती है, जहां धीमी गति से बढ़ने वाले कैंसर का पता चल जाता है, जो शायद जीवन भर कोई नुकसान करता। इसलिए जरूरी है कि स्क्रीनिंग का निर्णय व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक इतिहास को ध्यान में रखकर विशेषज्ञ की सलाह से लिया जाए।



कुल मिलाकर, कैंसर से लड़ाई में अर्ली डिटेक्शन सबसे प्रभावी हथियार है। नियमित जांच, सही जानकारी और समय पर चिकित्सकीय सलाह से केवल जान बचाई जा सकती है, बल्कि मरीज को बेहतर और सम्मानजनक जीवन भी दिया जा सकता है।

January 30, 2026

जीपीएस जैसी न्यूरो-नेविगेशन तकनीक से ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में आई नई सटीकता

जीपीएस जैसी न्यूरो-नेविगेशन तकनीक से ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में आई नई सटीकता

हल्दवानी: जब भी ब्रेन सर्जरी की बात आती हैतो अधिकतर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि यह बेहद जोखिम भरी प्रक्रिया हैजिसमें स्वस्थ ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुँचने की आशंका रहती है। हालांकिब्रेन ट्यूमर की सर्जरी आज भी मेडिकल साइंस की सबसे नाज़ुक सर्जरी में गिनी जाती हैलेकिन नई टेक्नोलॉजी ने इसे पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और सटीक बना दिया है। ऐसी ही एक आधुनिक तकनीक है न्यूरो-नेविगेशनजिसे अक्सर ब्रेन के लिए जीपीएस कहा जाता है। 


न्यूरो-नेविगेशन एक कंप्यूटर-असिस्टेड टेक्नोलॉजी हैजो सर्जरी के दौरान सर्जन को ब्रेन के भीतर सही दिशा और रास्ता दिखाती है। जैसे कार में लगा जीपीएस ड्राइवर को सबसे सुरक्षित और छोटा रास्ता बताता हैवैसे ही न्यूरो-नेविगेशन न्यूरोसर्जन को ब्रेन ट्यूमर तक पहुँचने के लिए सबसे सटीक और सुरक्षित सर्जिकल पाथ प्लान करने में मदद करता है। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलवैशाली के न्यूरोसर्जरी (ब्रेन एंड स्पाइनविभाग के एसोसिएट डायरेक्टरडॉ. ऋषिकेश चक्रवर्ती ने बताया“MRI या CT इमेजिंग की मदद से न्यूरो-नेविगेशन मरीज के ब्रेन का एक डिटेल्ड थ्री-डायमेंशनल मैप तैयार करता हैजो सर्जरी के दौरान रियल-टाइम में सर्जन को गाइड करता है। इससे किसी भी चीरा लगाने से पहले ट्यूमर की सटीक लोकेशन का पता चल जाता हैहेल्दी ब्रेन टिश्यू को कम से कम प्रभावित करते हुए सबसे सुरक्षित रास्ता चुना जा सकता है और पूरी सर्जरी के दौरान इंस्ट्रूमेंट्स की मूवमेंट पर लगातार नज़र रखी जा सकती है।” 


एक गाइड की तरह काम करते हुए न्यूरो-नेविगेशन अनुमान पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर देता है। सर्जन साफ-साफ देख सकता है कि ट्यूमर कहाँ से शुरू होता है और कहाँ खत्म होता हैसाथ ही उसके आसपास मौजूद ब्लड वेसल्स और सेंसिटिव ब्रेन एरियाज़ भी दिखाई देते हैं। इससे सर्जरी के बाद बोलने में दिक्कतकमजोरी या दृष्टि हानि जैसी जटिलताओं का रिस्क कम हो जाता है। इसके अलावाट्यूमर को पूरी तरह निकालने की संभावना भी बढ़ती हैजो रिक्रेन्स को रोकने और लॉन्ग-टर्म सर्वाइवल के लिए बेहद ज़रूरी है। 


डॉ. ऋषिकेश ने आगे कहा, “न्यूरो-नेविगेशन हेल्दी ब्रेन टिश्यू को होने वाले नुकसान के खतरे को काफी कम कर देता हैजिससे ब्रेन ट्यूमर सर्जरी अधिक सुरक्षित और कंट्रोल्ड बनती है। बेहतर सर्जिकल प्रिसिशन के कारण ऑपरेशन का समय कम होता हैब्लड लॉस घटता हैरिकवरी तेज़ होती है और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन बेहतर तरीके से सुरक्षित रहता है। यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए बहुत उपयोगी हैजिनका ट्यूमर ब्रेन के गहरे हिस्सों में या उन एरियाज़ के पास होता है जो महत्वपूर्ण फंक्शंस को कंट्रोल करते हैं। हालांकि हर केस में इसकी ज़रूरत नहीं होतीलेकिन कई मरीजों के लिए यह इलाज को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाती है।” 


कुल मिलाकरन्यूरो-नेविगेशन न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। ब्रेन के लिए जीपीएस की तरह काम करते हुए यह सर्जन को सही प्लानिंगक्रिटिकल स्ट्रक्चर्स से बचाव और ट्यूमर तक बेहद सटीक पहुँच बनाने में मदद करती है। मरीजों के लिए इसका मतलब है अधिक सुरक्षित सर्जरीबेहतर रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार।

बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एडवांस्ड रोबोटिक सर्जरी से 62-वर्षीय महिला के ओवेरियन कैंसर का किया सफल इलाज

बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एडवांस्ड रोबोटिक सर्जरी से 62-वर्षीय महिला के ओवेरियन कैंसर का किया सफल इलाज

पटना: बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बिहार की 62-वर्षीय महिला में पाए गए ओवेरियन ट्यूमर का कॉम्प्लेक्स रोबोटिक कैंसर सर्जरी के जरिए सफल इलाज किया। इस एडवांस्ड उपचार से मरीज को तेज रिकवरी मिली और जीवन की नई उम्मीद जगी। नर्सिंग प्रोफेशन से जुड़ी इस मरीज को परिवार में ओवेरियन या गाइनेकोलॉजिकल कैंसर का कोई इतिहास नहीं था, लेकिन उन्हें करीब दो–तीन महीनों से मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो रही थी, जिसके बाद मेडिकल जांच कराई गई।

 

शुरुआत में, मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग की शिकायत के चलते पटना के एक स्थानीय केंद्र में मरीज की लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय हटाने की सर्जरी) की गई। सर्जरी के बाद बायोप्सी रिपोर्ट में लो-ग्रेड सीरस ओवेरियन ट्यूमर की पुष्टि हुई।

 

 बीमारी की कैंसरस प्रवृत्ति को देखते हुए, उन्हें एक्सपर्ट जांच और एडवांस्ड कैंसर मैनेजमेंट के लिए बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल रेफर किया गया। हॉस्पिटल में की गई डिटेल्ड समीक्षा में बॉर्डरलाइन ओवेरियन ट्यूमर के साथ छोटा इनवेसिव फोकस पाया गया, जिससे कैंसर के फैलाव को रोकने के लिए कम्प्लीशन कैंसर सर्जरी की आवश्यकता स्पष्ट हुई। 


मामले पर टिप्पणी करते हुए, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के गाइनेकोलॉजिकल सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट - डॉ. अल्का दहिया, ने कहा,मरीज का केस मेडिकल रूप से काफी कॉम्प्लेक्स था क्योंकि उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी। इसके अलावा, पिछली सर्जरी के कारण अंदरूनी हिस्सों में घनी एडहेशन्स भी थीं। पूरी जांच के बाद हमने रोबोटिक कम्प्लीशन कैंसर सर्जरी का निर्णय लिया, जिससे बचे हुए कैंसर-रिस्क टिश्यू को बेहद सटीकता से हटाया जा सका, सर्जिकल ट्रॉमा कम रहा और रिकवरी तेज हुई।” 


डॉ. अलका, ने आगे बताया, “मरीज की रोबोटिक सर्जरी पेट में छोटे कट्स के जरिए की गई, जो कीहोल सर्जरी का एक अत्याधुनिक रूप है। इस प्रक्रिया में ओमेंटम (आंतों को ढकने वाली फैटी लेयर) और पास के लिम्फ नोड्स को हटाकर कैंसर के फैलाव की जांच की गई। रोबोटिक सर्जरी सर्जन्स को बेहतर प्रिसिशन, क्लियर विज़ुअलाइजेशन और बेहतर डेक्सटेरिटी देती है, जो पहले से सर्जरी करा चुके और कई मेडिकल कंडीशन्स वाले मरीजों में खास तौर पर फायदेमंद होती है। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और कोई कॉम्प्लिकेशन नहीं हुआ।” 


सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बेहद अच्छी रही। वह जल्दी ही खाना खाने और चलने-फिरने लगीं और सर्जरी के सिर्फ दो दिन बाद उन्हें स्टेबल कंडीशन में डिस्चार्ज कर दिया गया। खास बात यह रही कि सर्जरी के पांचवें दिन वह हवाई यात्रा कर घर लौटने में सक्षम थीं, जो पारंपरिक ओपन ओवेरियन कैंसर सर्जरी के बाद बहुत कम देखने को मिलता है। 


वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें ऑब्ज़र्वेशन में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, बॉर्डरलाइन ओवेरियन ट्यूमर आमतौर पर धीमी गति से बढ़ते हैं और इनके दोबारा होने की संभावना करीब 10–20 प्रतिशत होती है। पूरी सर्जिकल क्लियरेंस होने के कारण मरीज का लॉन्ग-टर्म प्रोग्नोसिस सकारात्मक है। 


मामले की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए, बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में ओवेरियन कैंसर सर्जरी अब भी ओपन सर्जिकल तरीके से की जाती है, जिससे हॉस्पिटल में लंबे समय तक भर्ती, अधिक दर्द और देर से रिकवरी होती है। पहले की सर्जरी से बनी एडहेशन्स और कई को-मॉर्बिडिटीज़ के बावजूद इस तरह की कॉम्प्लेक्स कैंसर सर्जरी को रोबोटिक तरीके से सफलतापूर्वक करना, हॉस्पिटल की एडवांस्ड रोबोटिक ऑन्कोलॉजिकल केयर में विशेषज्ञता और पेशेंट सेंट्रिक, मिनिमली इनवेसिव इलाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

January 28, 2026

सेंटर फॉर साइट ने मोहाली में अत्याधुनिक आई हॉस्पिटल की शुरुआत के साथ पंजाब में अपनी मौजूदगी का विस्तार किया

सेंटर फॉर साइट ने मोहाली में अत्याधुनिक आई हॉस्पिटल की शुरुआत के साथ पंजाब में अपनी मौजूदगी का विस्तार किया

मोहाली : भारत के सबसे भरोसेमंद सुपर-स्पेशलिटी आई केयर नेटवर्क्स में से एक, सेंटर फॉर साइट ने मोहाली में अपने अत्याधुनिक ​आई हॉस्पिटल की शुरुआत की है। इस नए सेंटर के शुरू होने से मोहाली, चंडीगढ़, पंचकुला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अब वर्ल्ड-क्लास ​आई केयर अपने घर के पास ही उपलब्ध होगा, जिससे विशेष इलाज के लिए महानगरों की यात्रा की आवश्यकता नहीं रहेगी। 

 

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब सरकार के इंडस्ट्री एवं कॉमर्स, इन्वेस्टमेंट प्रमोशन और पावर मंत्री श्री संजीव अरोड़ा उपस्थित रहे। उनके साथ सम्मानित अतिथियों के रूप में पंजाब सरकार के एनिमल हसबैंड्री, डेयरी डेवलपमेंट एवं फिशरीज विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, श्री राहुल भंडारी (आईएएस) तथा फूड प्रोसेसिंग विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीमतीराखी गुप्ता भंडारी (आईएएस), मौजूद रहीं।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि “मोहाली जैसे शहरी केंद्र तेजी से विकसित हो रहे हैं और इस विकास के साथ एडवांस्ड हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता भी बढ़ रही है। वर्ल्ड-क्लास आई केयर फैसिलिटी की स्थापना से शुरुआती डायग्नोसिस बेहतर होगा, इलाज की पहुंच बढ़ेगी और पूरे पंजाब में मरीजों को लंबे समय तक बेहतर विज़न आउटकम्स मिल सकेंगे।“

 

नए मोहाली सेंटर में एक ही छत के नीचे व्यापक नेत्र सेवाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें कटिंग-एज टेक्नोलॉजी और अनुभवी ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट्स की टीम का समर्थन प्राप्त है। यहां माइक्रो-इंसिजन फेकोइमल्सिफिकेशन तकनीक से एडवांस्ड कैटरैक्ट सर्जरी की जाती है, साथ ही ट्राइफोकल, मल्टीफोकल, टॉरिक और EDOF जैसे प्रीमियम इंट्राओक्यूलर लेंस विकल्प भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा ग्लूकोमा, रेटिना व विट्रियो-रेटिनल डिज़ऑर्डर्स, कॉर्निया से जुड़ी समस्याएं जैसे केराटोकोनस, स्क्विंट और पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी की विशेष सेवाएं भी यहां प्रदान की जाती हैं।

 

लॉन्च के दौरान सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मेडिकल डायरेक्टर, प्रो. डॉ. महिपाल एस. सचदेव ने कहा कि “भारत में विज़ुअल इम्पेयरमेंट अब भी एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चुनौती है। सेंटर फॉर साइट में हमेशा क्लिनिकल एक्सपर्टीज़ को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर हाई-क्वालिटी और प्रेडिक्टेबल रिज़ल्ट्स देने पर जोर दिया गया है। मोहाली सेंटर की शुरुआत इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, ताकि एडवांस्ड आई केयर उन समुदायों तक पहुंच सके जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। समय पर जांच, प्रिवेंटिव आई केयर और सही समय पर इंटरवेंशन विज़न को बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।“

 

मोहाली फैसिलिटी की एक प्रमुख खासियत यहां उपलब्ध एडवांस्ड रिफ्रैक्टिव सर्जरी सॉल्यूशंस हैं, जिनमें नेक्स्ट-जेनरेशन LASIK टेक्नोलॉजी शामिल है। इसके जरिए मरीज सुरक्षित, सटीक और पर्सनलाइज़्ड प्रोसीजर्स के माध्यम से चश्मा-मुक्त दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं। मरीजों को सहज अनुभव देने के लिए अस्पताल में आधुनिक कंसल्टेशन रूम्स, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सिस्टम्स और प्रिसिशन सर्जिकल सूट्स बनाए गए हैं, जो हर चरण में सुरक्षा, आराम और क्लिनिकल एक्सीलेंस सुनिश्चित करते हैं।

 

लगभग तीन दशकों के अनुभव, देशभर में 90 से अधिक सेंटर्स और 350 से ज्यादा विशेषज्ञ ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट्स की टीम के साथ सेंटर फॉर साइट लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। यह लॉन्च टेक्नोलॉजी-ड्रिवन, हाई-क्वालिटी और एथिकल आई केयर को सभी तक पहुंचाने के मिशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

 

पद्मश्री सम्मानित डॉ. महिपाल सिंह सचदेव द्वारा स्थापित सेंटर फॉर साइट आज 33 शहरों में फैले 90 से अधिक सेंटर्स का मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क संचालित करता है। संस्थान भारतीय ऑप्थैल्मोलॉजी में कई महत्वपूर्ण इनोवेशन्स का अगुवा रहा है, जिसमें भारत में पहली बार SMILE टेक्नोलॉजी की शुरुआत, SILK तकनीक का सह-विकास और एआई-पावर्ड FORESIGHT टेक्नोलॉजी के साथ एशिया का पहला SCHWIND AMARIS 1050RS LASIK लेज़र लॉन्च करना शामिल है। हर साल 15 लाख से अधिक मरीजों का उपचार करने वाला सेंटर फॉर साइट क्लिनिकल एक्सीलेंस, इनोवेशन और पेशेंट-सेंट्रिक आई केयर में लगातार नए बेंचमार्क स्थापित कर रहा है, क्योंकि विज़न के मामले में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।