
पटना: बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बिहार की 62-वर्षीय महिला में पाए गए ओवेरियन ट्यूमर का कॉम्प्लेक्स रोबोटिक कैंसर सर्जरी के जरिए सफल इलाज किया। इस एडवांस्ड उपचार से मरीज को तेज रिकवरी मिली और जीवन की नई उम्मीद जगी। नर्सिंग प्रोफेशन से जुड़ी इस मरीज को परिवार में ओवेरियन या गाइनेकोलॉजिकल कैंसर का कोई इतिहास नहीं था, लेकिन उन्हें करीब दो–तीन महीनों से मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो रही थी, जिसके बाद मेडिकल जांच कराई गई।
शुरुआत में, मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग की शिकायत के चलते पटना
के एक स्थानीय केंद्र में मरीज की लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय हटाने की
सर्जरी) की गई। सर्जरी के बाद बायोप्सी रिपोर्ट में लो-ग्रेड सीरस ओवेरियन ट्यूमर
की पुष्टि हुई।
बीमारी की कैंसरस प्रवृत्ति को देखते हुए, उन्हें एक्सपर्ट जांच और एडवांस्ड
कैंसर मैनेजमेंट के लिए बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल रेफर किया गया। हॉस्पिटल में की गई
डिटेल्ड समीक्षा में बॉर्डरलाइन ओवेरियन ट्यूमर के साथ छोटा इनवेसिव फोकस पाया गया, जिससे कैंसर के फैलाव को रोकने के लिए कम्प्लीशन कैंसर सर्जरी की आवश्यकता
स्पष्ट हुई।
मामले पर टिप्पणी करते हुए,
बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के
गाइनेकोलॉजिकल सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट - डॉ. अल्का दहिया, ने कहा, “मरीज का केस मेडिकल रूप से काफी कॉम्प्लेक्स था क्योंकि उन्हें डायबिटीज और
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी। इसके अलावा,
पिछली सर्जरी के कारण अंदरूनी हिस्सों में घनी
एडहेशन्स भी थीं। पूरी जांच के बाद हमने रोबोटिक कम्प्लीशन कैंसर सर्जरी का निर्णय
लिया, जिससे बचे हुए कैंसर-रिस्क टिश्यू को बेहद सटीकता से हटाया
जा सका, सर्जिकल ट्रॉमा कम रहा और रिकवरी तेज हुई।”
डॉ. अलका, ने आगे बताया,
“मरीज की रोबोटिक सर्जरी पेट में छोटे कट्स के जरिए की
गई, जो कीहोल सर्जरी का एक अत्याधुनिक रूप है। इस प्रक्रिया में
ओमेंटम (आंतों को ढकने वाली फैटी लेयर) और पास के लिम्फ नोड्स को हटाकर कैंसर के
फैलाव की जांच की गई। रोबोटिक सर्जरी सर्जन्स को बेहतर प्रिसिशन, क्लियर विज़ुअलाइजेशन और बेहतर डेक्सटेरिटी देती है, जो पहले से सर्जरी करा चुके और कई मेडिकल कंडीशन्स वाले मरीजों में खास तौर पर
फायदेमंद होती है। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और कोई कॉम्प्लिकेशन नहीं हुआ।”
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बेहद अच्छी रही। वह जल्दी ही खाना खाने और
चलने-फिरने लगीं और सर्जरी के सिर्फ दो दिन बाद उन्हें स्टेबल कंडीशन में
डिस्चार्ज कर दिया गया। खास बात यह रही कि सर्जरी के पांचवें दिन वह हवाई यात्रा
कर घर लौटने में सक्षम थीं,
जो पारंपरिक ओपन ओवेरियन कैंसर सर्जरी के बाद बहुत कम
देखने को मिलता है।
वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें ऑब्ज़र्वेशन में रखा गया है।
डॉक्टरों के अनुसार, बॉर्डरलाइन ओवेरियन ट्यूमर आमतौर पर धीमी गति से बढ़ते हैं
और इनके दोबारा होने की संभावना करीब 10–20
प्रतिशत होती है। पूरी सर्जिकल क्लियरेंस होने के
कारण मरीज का लॉन्ग-टर्म प्रोग्नोसिस सकारात्मक है।
मामले की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए, बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में ओवेरियन कैंसर सर्जरी अब भी ओपन सर्जिकल तरीके से की जाती है, जिससे हॉस्पिटल में लंबे समय तक भर्ती, अधिक दर्द और देर से रिकवरी होती है। पहले की सर्जरी से बनी एडहेशन्स और कई को-मॉर्बिडिटीज़ के बावजूद इस तरह की कॉम्प्लेक्स कैंसर सर्जरी को रोबोटिक तरीके से सफलतापूर्वक करना, हॉस्पिटल की एडवांस्ड रोबोटिक ऑन्कोलॉजिकल केयर में विशेषज्ञता और पेशेंट सेंट्रिक, मिनिमली इनवेसिव इलाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।






