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December 17, 2024

क्या सर्दियों की ठंड आपके मूड को प्रभावित कर रही है?

क्या सर्दियों की ठंड आपके मूड को प्रभावित कर रही है?
 

सर्दियों के आगमन के साथ ही जहां एक ओर ठंडी हवा और त्योहारों की खुशी का माहौल होता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के लिए यह मौसम, मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां लेकर आता है। सैड, जो आमतौर पर सर्दियों के महीनों में होता है, एक प्रकार का अवसाद है जो दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करता है।  


सर्दियों के दौरान दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं, जिससे प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश का संपर्क कम हो जाता है। ये परिवर्तन शरीर की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को बाधित कर सकते हैं, जिससे मनोभाव और ऊर्जा स्तर में गिरावट सकती है। सैड की विशेषता है कि यह हर वर्ष एक विशेष मौसम, मुख्यतः सर्दियों, में अवसाद के लक्षणों के साथ प्रकट होता है। मौसमी भावात्मक विकार के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, तुलसी हेल्थकेयर के निदेशक और प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. गोरव गुप्ता ने बताया कि सैड से पीड़ित व्यक्ति अक्सर लगातार उदासी, गतिविधियों में रुचि को कमी, नींद की आदतों में बदलाव, अत्यधिक थकान, एकाग्रता में कठिनाई और भूख में बदलाव जैसी समस्याओं से जूझते हैं।  


हालांकि, इन लक्षणों को प्रमुख अवसाद विकार से मिलता-जुलता माना जा सकता है, लेकिन सैड के मामले में ये लक्षण मौसमी होते हैं और वसंत के आगमन के साथ कम हो जाते हैं। सैड के सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह माना जाता है कि सूर्य के प्रकाश की कमी शरीर की सर्केडियन रिदम और सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन को प्रभावित करती है। साथ ही, आनुवंशिक कारक, हार्मोनल बदलाव और पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। जो लोग पेशेवर मदद चाहते हैं, उनके लिए साइकोथेरेपी, विशेषकर कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), सैड के इलाज में प्रभावी है। यह नकारात्मक विचारों को पहचानने और उन्हें बदलने के लिए व्यक्ति को सशक्त बनाता है। गंभीर मामलों में, जहां लक्षण दैनिक कार्यक्षमता को बाधित करते हैं, वहां एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाइयां सुझाई जा सकती हैं।  


उचित उपचार के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है। डॉ. गोरव ने आगे बताया कि सैड के लक्षणों को प्रबंधित करने और सर्दियों के महीनों को सकारात्मक रूप से अपनाने के लिए कुछ प्रभावी उपायों में लाइट थेरेपी, बाहरी गतिविधियां, शारीरिक व्यायाम और माइंड-बॉडी प्रैक्टिस शामिल हैं। लाइट थेरेपी उज्ज्वल प्रकाश के संपर्क से सर्केडियन रिदम को संतुलित करती है और लक्षणों को कम करने में मददगार होती है। ठंड के बावजूद दिन के समय बाहर समय बिताने से प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश के जरिए सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ता है, जो मनोदशा सुधारने में सहायक होता है।  


December 13, 2024

मोटापा और उससे जुड़ी समस्याओं का बैरिएट्रिक सर्जरी से दीर्घकालिक समाधान

मोटापा और उससे जुड़ी समस्याओं का बैरिएट्रिक सर्जरी से दीर्घकालिक समाधान

बहादुरगढ़ : मोटापा आजकल एक ऐसी समस्या बन चुकी है, जो कई गंभीर और घातक बीमारियों को जन्म देती है। भारत दुनिया में मोटापे के मामले में तीसरे स्थान पर है, अमेरिका और चीन के बाद। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, नींद संबंधी विकार, जोड़ों का दर्द, पीठ दर्द, उच्च कोलेस्ट्रॉल, फैटी लीवर, थायरॉयड विकार, पीसीओडी, बांझपन और कैंसर जैसी बीमारियां मोटापे से जुड़ी होती हैं।

 

बैरिएट्रिक सर्जरी वजन घटाने का एक प्रभावी तरीका है, जिसमें पेट के आकार को छोटा करना या आंतों के कुछ हिस्सों को बाईपास करके कैलोरी अवशोषण को नियंत्रित किया जाता है। यह प्रक्रिया केवल भोजन की खपत को सीमित करती है, बल्कि शरीर के मेटाबोलिज्म में भी बदलाव लाती है, जिससे मोटापे से जुड़ी बीमारियों में सुधार होता है।

 

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, मिनिमल एक्सेस और बैरिएट्रिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अरुण भारद्वाज का कहना है, "मोटापा केवल वजन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। बैरिएट्रिक सर्जरी ने वजन कम करने और मोटापे से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करने में दीर्घकालिक सफलता प्रदान की है। यह सर्जरी केवल वजन घटाने में मदद करती है, बल्कि डायबिटीज, फैटी लीवर, नींद के विकार, गठिया और थायरॉयड विकार जैसी समस्याओं को भी प्रभावी रूप से सुधारती है। भारत में सबसे सामान्य बैरिएट्रिक प्रक्रियाओं में स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी, गैस्ट्रिक बाईपास और मिनी-गैस्ट्रिक बाईपास शामिल हैं। ये प्रक्रियाएं लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीक से की जाती हैं। इसके अलावा, इंट्रागैस्ट्रिक बैलून जैसी गैर-सर्जिकल प्रक्रियाएं भी उपलब्ध हैं, जिन्हें ओपीडी में किया जा सकता है।

 

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बैरिएट्रिक सर्जरी अन्य आम सर्जिकल प्रक्रियाओं जैसे पित्ताशय की पथरी या हर्निया ऑपरेशन जितनी ही सुरक्षित है। फिर भी, इसे एक बहु-आयामी दृष्टिकोण के तहत किया जाना चाहिए, जिसमें सर्जरी से पहले व्यापक स्वास्थ्य मूल्यांकन और रोगी का सही तरीके से अनुकूलन शामिल हो।

 

सफलता की दर व्यक्ति की जीवनशैली और प्रक्रिया के बाद डॉक्टर द्वारा सुझाई गई डाइट और व्यायाम पर निर्भर करती है। अधिकतर लोग बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद दीर्घकालिक वजन घटाने और जीवनशैली में सुधार का अनुभव करते हैं। डॉ. भारद्वाज ने यह भी बताया, "यह सर्जरी एक साधन है, लेकिन सफलता का वास्तविक मापदंड आपकी जीवनशैली में बदलाव और मोटिवेशन है। सर्जरी के बाद स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम और परिवार दोस्तों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।"

 

मोटापे से निपटने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी एक दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है। सही विकल्प चुनने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना और सर्जरी के बाद स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना अनिवार्य है।

December 11, 2024

Park Hospital Palam Vihar, Gurugram Successfully Performs Complex ABO-Incompatible Kidney Transplant, Providing a New Lease of Life to a 53-Year-Old Patient

Park Hospital Palam Vihar, Gurugram Successfully Performs Complex ABO-Incompatible Kidney Transplant, Providing a New Lease of Life to a 53-Year-Old Patient

Palam Vihar, Gurugram, Haryana: Demonstrating its commitment to advanced healthcare, Park Hospital Palam Vihar, Gurugram has successfully performed a complex ABO-incompatible kidney transplant, giving 53-year-old Md. Shamshad Khan a second chance at life. Mr. Khan, suffering from end-stage renal disease due to renal stone complications, had been dependent on hemodialysis three times a week for six months. His brother, Md. Parvej Khan, courageously stepped forward as the donor despite having an AB-positive blood group, while the recipient had an A-negative blood group, presenting a significant medical challenge. 

The transplant, conducted on October 25, 2024, was spearheaded by a team of highly experienced surgeons led by Dr. Surjit Kumar, Director - Kidney Transplant, alongside Dr. Uday Kumar and Dr. Vaseem Shaikh, with preoperative protocols and post-transplant care meticulously managed by Dr. Neha Singh, Consultant - Nephrology. 


Key Highlights of the Procedure

Preoperative Preparation:

The patient underwent an advanced desensitization protocol to reduce the high levels of anti-A and anti-B antibodies. This included the administration of Rituximab, plasmapheresis, and ATG under the guidance of nephrologist Dr. Neha Singh. A specialized dialysis filter called Vitrosorb was utilized to further lower the antibody levels, minimizing the risk of organ rejection. 


Surgical Excellence:

The transplant surgery was executed with precision, overcoming the inherent complexities of ABO-incompatible transplants. Post-surgery, the patient demonstrated excellent urine output and a marked improvement in creatinine levels, which normalized by the fifth postoperative day. 


Postoperative Recovery:

Both the donor and recipient recovered without complications. The donor, Md. Parvej Khan, was discharged on the fifth postoperative day, while the patient was discharged on the eighth day in stable condition, with instructions for regular follow-ups in the Nephrology and Urology OPD. 


Expert Testimonials

Dr. Surjit Kumar, Director - Kidney Transplant, said:

"This was a challenging case due to blood group incompatibility. However, with cutting-edge technology, rigorous preparation, and our team’s expertise, we successfully overcame the barriers to perform a life-saving transplant. We are thrilled with the outcome and proud to have given Mr. Shamshad Khan a chance at a healthier life." 


Dr. Neha Singh, Consultant - Renal Transplant, added:

"ABO-incompatible kidney transplants are among the most complex procedures in renal transplantation. The success of this case showcases the synergy of advanced medical science, precise planning, and compassionate care. We are deeply grateful for the trust the Khan family placed in us." 


Patient’s Perspective

For Md. Shamshad Khan, the surgery has been transformative. Reflecting on his experience, he said:

"I had lost hope of ever leading a normal life again. The doctors at Park Hospital not only saved my life but gave me hope for the future. Their care and expertise have been nothing short of miraculous." 


A Landmark Achievement in Renal Care

This success underscores Park Hospital Palam Vihar, Gurugram’s position as a leader in renal transplantation, especially in the realm of ABO-incompatible procedures that were once deemed experimental. These surgeries require a multidisciplinary approach, involving nephrologists, transplant surgeons, immunologists, and specialized nursing teams to ensure positive outcomes. 


The successful surgery reaffirms Park Hospital’s dedication to pushing the boundaries of medical science and delivering innovative treatments to patients who face seemingly insurmountable challenges.

December 07, 2024

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा और आईएमए, हापुड़ द्वारा जागरूकता सत्र का आयोजन

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा और आईएमए, हापुड़ द्वारा जागरूकता सत्र का आयोजन

हापुड़: यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), हापुड़ के सहयोग से एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और नवाचारों के बारे में जानकारी साझा करना था। यह सत्र हापुड़ के जिमखाना रेलवे रोड पर आयोजित किया गया, जिसमें कई प्रतिष्ठित डॉक्टरों और आईएमए के वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया। 

 

कार्यक्रम का उद्घाटन आईएमए हापुड़ के अध्यक्ष डॉ. मनोज जैन, सचिव डॉ. गौरव मित्तल, वैज्ञानिक सचिव – डॉ. पालकी नारंग और कोषाध्यक्ष – डॉ. रेनू बंसल की उपस्थिति में किया गया। इस मौके पर यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा के, जीआई ऑन्कोलॉजी रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी विभाग के निदेशक एवं एचओडी, डॉ. नीरज चौधरीन्यूरोइंटरवेंशन विभाग के ग्रुप निदेशक और न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक एवं एचओडी डॉ. सुमित गोयल और किडनी प्रत्यारोपण एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग केवरिष्ठ सलाहकार डॉ. विपिन सिसोदिया भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपने विचार साझा किए। 

 

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा के, जीआई ऑन्कोलॉजी रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी विभाग के निदेशक एवं एचओडी, डॉ. नीरज चौधरी, ने जीआई कैंसर और इसके उपचार में रोबोटिक तकनीकों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जीआई कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाकर और रोबोटिक सर्जरी का उपयोग करके मरीजों को बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। यह तकनीक न केवल सर्जरी को अधिक सटीक बनाती है, बल्कि मरीजों की रिकवरी को भी तेज करती है। 

 

नए शोध और तकनीकों पर चर्चा 

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा के, न्यूरोइंटरवेंशन विभाग के ग्रुप निदेशक और न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक एवं एचओडी डॉ. सुमित गोयल, ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में हो रहे नए शोध और तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “एडवांस न्यूरोसर्जरी तकनीक जैसे न्यूरोइंटरवेंशन ने जटिल मामलों में सर्जरी की आवश्यकता को कम कर दिया है। यह मरीजों को कम जोखिम और तेजी से ठीक होने का अवसर प्रदान करता है।      


रोबोटिक्स के उपयोग की जानकारी दी 
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा 1, ग्रेटर नोएडा के किडनी प्रत्यारोपण एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विपिन सिसोदियाने यूरोलॉजी में रोबोटिक्स के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “यूरोलॉजी में रोबोटिक्स ने पारंपरिक प्रक्रियाओं को अत्यधिक सटीक और कम जटिल बना दिया है। यह तकनीक कैंसर और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे मामलों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।    


आईएमए हापुड़ के अध्यक्ष डॉ. मनोज जैन ने कहा, “इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम चिकित्सा समुदाय को एक साथ लाने और स्वास्थ्य सेवा में हो रहे विकास को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। रोबोटिक सर्जरी और न्यूरोइंटरवेंशन जैसी तकनीकें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सेवाओं की खाई को पाटने में मदद कर सकती हैं।  


स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक उन्नत और प्रभावी बनाया जा सके

यथार्थ हॉस्पिटल और आईएमए हापुड़ के इस सहयोगात्मक प्रयास को स्थानीय चिकित्सा समुदाय से अत्यधिक सराहना मिली। इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक उन्नत और प्रभावी बनाया जा सके।