April 20, 2026

फैटी लिवर को नजरअंदाज ना करें, समय रहते उठाएं सही कदम

फैटी लिवर को नजरअंदाज नहीं करें समय रहते उठाएं सही कदम

ग्वालियर: फैटी लिवर आजकल एक बहुत आम समस्या बन चुकी हैजो अक्सर किसी अन्य पेट की जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड में अचानक सामने आती है। भारत में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अनुमान है कि हर तीन में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित हो सकता है। फैटी लिवर कई कारणों से हो सकता हैजिनमें शराब का सेवनमेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ा फैटी लिवर (MASLD) और लिवर के वायरल संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस बी और सी प्रमुख हैं। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं हेड डॉ. विकास सिंगला ने बताया आज फैटी लिवर केवल मोटापे तक सीमित बीमारी नहीं रह गई हैबल्कि यह एक साइलेंट हेल्थ थ्रेट बन चुकी है। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे पेट के आसपास चर्बी बढ़नाटाइप डायबिटीजहाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल शामिल हैं। इसके अलावा खराब लाइफस्टाइलजैसे कम शारीरिक गतिविधिज्यादा कैलोरी वाला भोजनप्रोसेस्ड और ऑयली फूड का अधिक सेवनसाथ ही रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शुगर युक्त ड्रिंक्स का ज्यादा उपयोग भी इस समस्या को बढ़ाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है और पुरुषों में यह अधिक देखा जाता हैजबकि परिवार में डायबिटीज या मोटापे का इतिहास भी जोखिम को बढ़ा सकता है। 


अगर अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर का पता चलता हैतो घबराने की जरूरत नहीं हैलेकिन इसे नजरअंदाज करना भी गलत है। शुरुआती अवस्था में यह पूरी तरह ठीक हो सकता हैलेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह लिवर में सूजनफाइब्रोसिससिरोसिस और कुछ मामलों में लिवर कैंसर तक बढ़ सकता है। साथ ही यह डायबिटीजहृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ाता है। इसलिए जरूरी है कि मरीज किसी विशेषज्ञजैसे हेपेटोलॉजिस्ट से सलाह लेंजो ब्लड टेस्ट और फाइब्रोस्कैन जैसे सरल टेस्ट के जरिए बीमारी की सही स्थिति का आकलन कर सकते हैं। 


डॉ. विकास ने आगे बताया फैटी लिवर में सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि लिवर में फैट है या नहींबल्कि यह है कि क्या उसमें स्कारिंग (फाइब्रोसिस) शुरू हो गई है। फाइब्रोस्कैन एक आसान और नॉन-इनवेसिव टेस्ट हैजिससे लिवर में फैट और फाइब्रोसिस की मात्रा का पता लगाया जा सकता है। शुरुआती अवस्था में सही इलाज और देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसके इलाज की बुनियाद बहुत सरल लेकिन प्रभावी है—वजन कम करनाखासकर पेट की चर्बी घटानानियमित व्यायाम करना और मेटाबॉलिक जोखिम कारकों को नियंत्रित करना। सिर्फ 5% वजन कम करने से लिवर में फैट घट सकता है, 7% तक वजन कम करने से सूजन में सुधार आता है और 10% या उससे अधिक वजन कम करने से कुछ मामलों में फाइब्रोसिस भी रिवर्स हो सकता है। जिन मरीजों में केवल लाइफस्टाइल बदलाव से सुधार नहीं होताउनके लिए नई दवाओं के विकल्प भी उपलब्ध हैं।“ 


भारत में फैटी लिवर को लेकर सोच बदलने की जरूरत है। यह कोई छोटी समस्या नहींबल्कि शरीर का एक शुरुआती चेतावनी संकेत है। बेहतर खान-पान अपनाएंनियमित रूप से सक्रिय रहेंपेट की चर्बी कम करेंपर्याप्त नींद लेंशराब का सेवन सीमित करें और समय-समय पर डायबिटीज व कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं। यदि आपकी रिपोर्ट में फैटी लिवर आया हैतो डरने की नहींबल्कि तुरंत सही कदम उठाने की जरूरत है और विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे पहला कदम होना चाहिए।