पटना: भारत में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों को प्रभावित करने वाले शीर्ष दस कैंसरों में शामिल हो चुका है। वर्ष 2025 तक देश में 14 लाख से अधिक नए कैंसर मामलों का अनुमान है, और यह आंकड़ा किसी भी परिवार के लिए चिंता और डर पैदा कर सकता है जो डॉक्टर के सामने बैठा हो। लेकिन आज प्रोस्टेट कैंसर की कहानी सिर्फ डर तक सीमित नहीं रह गई है।
पिछले एक दशक में यह कहानी चुपचाप प्रिसिशन, तेज रिकवरी और जल्दी घर लौटने की बन गई है। एक आम गलतफहमी यह है कि रोबोटिक सर्जरी में कंप्यूटर खुद ही इंसान के शरीर का ऑपरेशन करता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के यूरोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. तुषार आदित्य नारायण ने बताया “रोबोट दरअसल सर्जन के हाथों का ही एक एक्सटेंशन होता है, उससे ज्यादा कुछ नहीं। इसे ऐसे समझें जैसे सर्जन ने ऐसे ग्लव्स पहन रखे हों जो मानव कलाई से कहीं ज्यादा लचीलापन और मूवमेंट दे सकते हैं। डॉक्टर कुछ दूरी पर एक कंसोल पर बैठकर हर मूवमेंट को रियल टाइम में कंट्रोल करता है। जैसे ही सर्जन रुकता है, रोबोट भी रुक जाता है। इसमें न कोई ऑटोमैटिक निर्णय होता है और न ही कोई अंदाजा। करीब दस साल पहले प्रोस्टेट सर्जरी का मतलब होता था बड़ा चीरा, ज्यादा ब्लड लॉस और अस्पताल में लगभग एक हफ्ते तक भर्ती रहना। आज वही सर्जरी बेहद छोटे छेदों के जरिए की जाती है, जो एक छोटे बटनहोल जितने होते हैं। शरीर जल्दी ठीक होता है क्योंकि उसे कम नुकसान पहुंचता है।“
इस बदलाव की असली पहचान चीरे के आकार से नहीं, बल्कि उन हिस्सों से है जिन्हें सर्जन सुरक्षित रख पाता है। प्रोस्टेट के आसपास बेहद नाजुक नर्व्स होती हैं जो ब्लैडर कंट्रोल और सेक्सुअल हेल्थ को प्रभावित करती हैं। पहले इन नर्व्स को बचाना लगभग असंभव था, और कई मरीज कैंसर से तो ठीक हो जाते थे लेकिन अपनी जीवन गुणवत्ता का एक अहम हिस्सा खो देते थे।
डॉ. तुषार ने आगे बताया “आज रोबोटिक सिस्टम सर्जन को थ्री-डायमेंशनल और मैग्निफाइड व्यू देता है, जिससे नर्व्स को सुरक्षित रखना न केवल संभव हुआ है, बल्कि ज्यादा सटीक और लगातार बेहतर तरीके से किया जा सकता है। खासकर 50 वर्ष के आसपास के मरीजों के लिए यह फर्क बहुत मायने रखता है, क्योंकि यह सिर्फ जीवन बचाने नहीं, बल्कि बेहतर जीवन जीने की संभावना देता है। अगर आप उन लोगों से बात करें जिन्होंने दस साल पहले प्रोस्टेट सर्जरी करवाई थी, तो वे बताते हैं कि सामान्य जीवन में लौटने में कई हफ्ते लग जाते थे। आज ज्यादातर मरीज अगले ही दिन चलने लगते हैं और 2 से 3 दिन के भीतर घर वापस जा सकते हैं।“
प्रोस्टेट कैंसर का निदान आज भी गंभीर है और रहेगा। लेकिन आज उपलब्ध एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के कारण यह गंभीरता अब विनाशकारी नहीं रह गई है। यदि आप या आपके परिवार में कोई इस स्थिति का सामना कर रहा है, तो किसी विशेषज्ञ से समय पर सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। जितनी जल्दी यह बातचीत होगी, उतने ज्यादा उपचार के विकल्प आपके सामने उपलब्ध रहेंगे।







