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August 28, 2025

मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज ने शुरू की किडनी ट्रांसप्लांट, रोबोटिक एवं यूरो-गायनी ओपीडी सेवाएं

मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज ने शुरू की किडनी ट्रांसप्लांट, रोबोटिक एवं यूरो-गायनी ओपीडी सेवाएं

 आगरा, अगस्त 28, 2025: मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज ने आज आगरा के श्री कृष्णा हॉस्पिटल, में समर्पित रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट और रोबोटिक गायनी सर्जरी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत की।


ये ओपीडी सेवाएं मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज के यूरोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर डॉ. शैलेश चंद्र सहाय की उपस्थिति में शुरू की गईं। डॉ. सहाय प्रत्येक महीने के दूसरे गुरुवार को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगे।


लॉन्च के अवसर पर मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज के यूरोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर डॉ. शैलेश चंद्र सहाय ने कहा, “इन ओपीडी सेवाओं की शुरुआत के साथ हमारा उद्देश्य मरीजों को विशेष चिकित्सा सेवाओं के लिए अन्य शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता को कम करना है। रोबोटिक तकनीक ने यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं में क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे संपूर्ण यूरोलॉजिकल देखभाल में एडवांस्ड ट्रीटमेंट संभव हुआ है। चूंकि यूरोलॉजिकल समस्याएं सभी आयु, जेंडर और बैकग्राउंड के लोगों को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए यह ओपीडी स्थानीय समुदाय की विभिन्न स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई है।”  


डॉ. शैलेश  ने आगे कहा, “किडनी ट्रांसप्लांट में हाल के एडवांस्मेंट्स  में रोबोट-असिस्टेड रीनल ट्रांसप्लांटेशन प्रमुख है, जो मरीजों को तेज़ रिकवरी, कम दर्द, न्यूनतम निशान और कम रक्तस्राव के फायदे देता है। पारंपरिक सर्जरी में जहां बड़े मांसपेशी कट की आवश्यकता होती है, वहीं रोबोटिक सर्जरी छोटे चीरे से की जाती है, मांसपेशियों को काटने से बचाती है और ह्यूमन एरर की संभावना को कम करती है।”  


किडनी फेलियर के बढ़ते मामलों को देखते हुए आगरा में यूरो-गायनी और किडनी ट्रांसप्लांट ओपीडी सेवाओं की शुरुआत इस क्षेत्र के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

August 26, 2025

लिवर ट्रांसप्लांट: जब दवाइयाँ और जीवनशैली बदलाव पड़ जाएँ कमज़ोर

लिवर ट्रांसप्लांट: जब दवाइयाँ और जीवनशैली बदलाव पड़ जाएँ कमज़ोर

लखनऊ: गंभीर लिवर रोग से जूझ रहे लोगों के लिए लिवर ट्रांसप्लांट जीवनरक्षक विकल्प साबित हो सकता है। जब लिवर सही तरीके से काम करना बंद कर देता हैतो दवाइयाँ और जीवनशैली में बदलाव  पर्याप्त नहीं होते। ऐसे में लिवर ट्रांसप्लांट मरीजों को एक नई उम्मीद और जीवन देने का माध्यम बन जाता है। 


लिवर ट्रांसप्लांट एक शल्यक्रिया है जिसमें खराब हो चुके लिवर को स्वस्थ डोनर के लिवर से बदला जाता है। लिवर शरीर से विषैले तत्वों को निकालनेप्रोटीन बनाने और पाचन में मदद करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। जब यह अंग असफल हो जाता है तो पूरा शरीर प्रभावित होता है। लिवर की एक अद्भुत विशेषता यह है कि यह स्वयं को पुनर्जीवित कर सकता है। इसी वजह से लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट में डोनर के लिवर का केवल एक हिस्सा मरीज को प्रत्यारोपित किया जाता है और कुछ ही हफ्तों में दोनों का लिवर पूर्ण आकार में वापस आ जाता है। 


बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलनई दिल्ली के एचपीबी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांटेशन विभाग के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी  डॉ. अभिदीप चौधरी ने बताया कि हर लिवर के मरीज़ को ट्रांसप्लांट की आवश्यकता नहीं होती। यह तभी किया जाता है जब लिवर पूरी तरह काम करना बंद कर देता है। इसके प्रमुख कारणों में हेपेटाइटिस बी या सी से होने वाला सिरोसिसअल्कोहल से संबंधित लिवर रोगफैटी लिवरशुरुआती अवस्था का लिवर कैंसरजेनेटिक बीमारियाँ जैसे विल्सन डिज़ीज़ और हेमोक्रोमैटोसिसतथा शिशुओं में बिलियरी एट्रेशिया शामिल हैं। मरीज की गंभीरता का आकलन करने के लिए डॉक्टर ‘मेल्ड स्कोर’ का उपयोग करते हैंजहाँ अधिक स्कोर का मतलब अधिक गंभीर लिवर क्षति होती है।“ 


डॉ. अभिदीप ने आगे बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट दो प्रकार से किया जाता है – पहलाडीसीज़्ड डोनर ट्रांसप्लांटजिसमें अंग दान करने वाले मृत व्यक्ति के परिवार की सहमति से लिवर लिया जाता है। दूसरालिविंग डोनर ट्रांसप्लांटजिसमें जीवित रिश्तेदार (भारतीय कानून के अनुसार) अपना लिवर का हिस्सा दान करते हैं। यह तरीका इंतजार का समय घटाता है और सर्जरी को योजनाबद्ध तरीके से संभव बनाता है। यह शल्यक्रिया सामान्यतः से 12 घंटे तक चल सकती है। ऑपरेशन के बाद मरीज को कुछ दिन आईसीयू में रखा जाता है और लगभग से सप्ताह तक अस्पताल में निगरानी की जाती है। मरीज को आजीवन इम्यूनोसप्रेसिव दवाएँ लेनी पड़ती हैं ताकि नया लिवर शरीर द्वारा अस्वीकार न किया जाए। अधिकतर मरीज से महीने के भीतर अपनी सामान्य गतिविधियों में लौट सकते हैं।“ 


हालाँकि यह एक जटिल शल्यक्रिया है और इसमें संक्रमणबाइल डक्ट की समस्या या अंग अस्वीकृति जैसी जटिलताएँ हो सकती हैंलेकिन आधुनिक तकनीकों और प्रभावी दवाओं की मदद से सफलता दर में काफी वृद्धि हुई है। आज हजारों मरीज सफल लिवर ट्रांसप्लांट के बाद लंबा और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। 


लिवर ट्रांसप्लांट सिर्फ एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं हैबल्कि यह जीवन का दूसरा मौका है। यदि किसी को इसकी आवश्यकता हो सकती हैतो उन्हें विशेषज्ञ ट्रांसप्लांट सेंटर से संपर्क कर पात्रताप्रक्रिया और रिकवरी के बारे में जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

दिल को कमजोर बना रहा है आपका गुस्सा, नहीं किया कंट्रोल तो बढ़ जाएगा हार्ट अटैक का खतरा

दिल को कमजोर बना रहा है आपका गुस्सा, नहीं किया कंट्रोल तो बढ़ जाएगा हार्ट अटैक का खतरा

गुस्सा एक भावना है जो मानसिक स्वास्थ्य के साथ साथ  शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार गुस्सा हार्ट डिजीज के खतरे को बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं कैसे दिल और पूरी सेहत के लिए हानिकारक है आपका गुस्सा।

 

हम सभी समय-समय पर अपनी भावनाएं जाहिर करते हैं। हम अक्सर हालात और व्यक्ति के मुताबिक अपनी फीलिंग्स जाहिर करते हैं। दुख-सुख और गुस्सा इन्हीं फीलिंग्स में से एक है, जिसका असर सिर्फ हमारी मेंटल हेल्थ पर ही नहीं, बल्कि फिजिकल हेल्थ पर भी पड़ता है। खासकर गुस्सा कई तरह से हमें प्रभावित करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका गुस्सा आपके दिल पर भी भारी पड़ सकता है।

 

जी हां, आपने सही सुना। गुस्सा करना आपके दिल को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी वजह से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। आइए आज इस आर्टिकल में तुलसी हेल्थकेयर नई दिल्ली में वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं सीईओ डॉ. गौरव गुप्ता से जानते हैं कैसे आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है आपका गुस्सा-

 

दिल पर भारी पड़ सकता है गुस्सा

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, गुस्से जैसी नेगेटिव फीलिंग हार्ट डिजीज के खतरे को बढ़ा सकती हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर गुस्सा दिल को नुकसान कैसे पहुंचाता है? दरअसल, एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और खून जमने की प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं, जो कमजोर व्यक्तियों में दिल के दौरे के लिए ट्रिगर का काम कर सकते हैं।

 

इसके अलावा साल 2022 की एक समीक्षा ने हजारों मरीजों पर किए गए कई अध्ययनों का विश्लेषण किया और यह पाया कि गुस्सा और डिप्रेशन सिर्फ हार्ट डिजीज के खतरे को बढ़ाते हैं, बल्कि दिल से जुडी बीमारियों के बाद रिकवरी को भी धीमा कर देते हैं।

 

गुस्से का सेहत पर असर

गुस्सा सिर्फ हार्ट हेल्थ पर ही नहीं, बल्कि आपको ओवरऑल हेल्थ पर भी बुरा असर डालता है। इसकी वजह से सेहत से जुड़ी अन्य कई समस्याएं भी होती हैं। आइए जानते हैं कैसे सेहत पर असर डालता है गुस्सा-

 

इम्यून सिस्टम पर असर

लगातार गुस्सा करने से आपकी इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम होने के कारण शरीर संक्रमणों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक गुस्सा इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और यह गुस्से के कारण पर निर्भर करता है।

 

डाइजेस्टिव सिस्टम पर असर

स्ट्रेस हार्मोन आपके पाचन को भी खराब करते हैं, जिससे पेट दर्द, एसिड रिफ्लक्स या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम हो सकता है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार गुस्सा इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में कोलन मोटर और मायोइलेक्ट्रिक एक्टिविटी को भी प्रभावित कर सकता है।

 

मांसपेशियों को भी होता है नुकसान

गुस्सा शरीर में बहुत ज्यादा तनाव पैदा कर सकता है। इसकी वजह से सिरदर्द, पीठ दर्द और अन्य मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं की समस्या हो सकती है। न्यूरोस्पाइन में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि जिन लोगों को मीडियम से लेकर ज्यादा गुस्सा आता है, उन्हें पीठ और गर्दन में दर्द की समस्या का अनुभव हुआ है।

 

दिल पर असर

गुस्सा हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है, जिससे लंबे समय के लिए दिल से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। जब हम गुस्सा करते हैं, तो कैटेकोलामाइन नामक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होने लगता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर और तेज दिल की धड़कन हो सकती है।

August 22, 2025

मैक्स हॉस्पिटल साकेत ने मथुरा में शुरू की ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट की विशेष ओपीडी सेवाएं

मैक्स हॉस्पिटल साकेत ने मथुरा में शुरू की ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट की विशेष ओपीडी सेवाएं

मथुरा. 22 अगस्त 2025: मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत ने मथुरा स्थित मैक्स पेशेंट असिस्टेंस सेंटर में ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट की विशेष ओपीडी सेवाओं की शुरुआत की है। 


रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में अग्रणी कार्य के लिए प्रसिद्ध मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन एवं चीफ़ डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी, अब मथुरा में प्रत्येक महीने के दूसरे शनिवार और चौथे रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक परामर्श के लिए उपलब्ध रहेंगे। 


भारत में ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है, जो आर्थराइटिस, जॉइंट डिफोर्मिटीज़, स्पोर्ट्स इंजरी और उम्र से संबंधित समस्याओं का उपचार करता है। रोबोटिक तकनीक से होने वाली जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अब और अधिक सटीक, कम दर्दनाक, कम हॉस्पिटल प्रवास वाली और तेज़ रिकवरी सुनिश्चित करती है। इन तकनीकों ने मरीजों की गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार करते हुए नए मानक स्थापित किए हैं। 


डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी ने जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में उत्कृष्ट परिणामों के साथ अहम बदलाव लाए हैं। आज मरीज सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद स्वतंत्र रूप से चल पाते हैं और अधिकांश को अगले दिन ही हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाती है। 


लॉन्च के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन एवं चीफ़ डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी ने कहा कि मथुरा में शुरू की गई यह नई ओपीडी सेवाएं शहर और आसपास के क्षेत्रों में एडवांस्ड आर्थोपेडिक देखभाल की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करेंगी। इससे मरीजों को विशेष परामर्श और सर्जिकल प्लानिंग की सुविधा सीधे उपलब्ध होगी। आज घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने वाले अधिकांश मरीज सर्जरी वाले दिन ही चलना शुरू कर देते हैं और 48 घंटों के भीतर घर जा सकते हैं। यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में एक बड़ा बदलाव है और जीवन की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार लाता है। 


उन्होंने आगे कहा कि रोबोटिक तकनीक से जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में अतुलनीय सटीकता, जटिलताओं में कमी और तेजी से स्वस्थ होने का लाभ मिलता है। मिनिमली-इनवेसिव तकनीक और रियल-टाइम इमेजिंग की मदद से अब हर मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार अत्यंत सटीक इम्प्लांट लगाए जा सकते हैं।” 


मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत लगातार अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश कर रहा है, ताकि मरीजों को चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों का लाभ मिल सके।