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February 28, 2026

इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के खिलाफ मजबूत होती शरीर की रक्षा प्रणाली

इम्यूनोथेरेपी से कैंसर के खिलाफ मजबूत होती शरीर की रक्षा प्रणाली

 रोहतक: पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। इन बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति इम्यूनोथेरेपी के रूप में सामने आई है। यह ऐसा उपचार है जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत और सक्रिय बनाता है।


इम्यूनोथेरेपी एक ऐसी थेरेपी है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने में मदद करती है। सामान्य रूप से हमारा इम्यून सिस्टम संक्रमण और असामान्य कोशिकाओं से हमारी रक्षा करता है। लेकिन कैंसर कोशिकाएं बहुत चालाक होती हैं और वे अक्सर इम्यून सिस्टम से छिप जाती हैं। इम्यूनोथेरेपी दवाएं इन छिपी हुई कैंसर कोशिकाओं को फिर से पहचानने में मदद करती हैं। इसे सरल शब्दों में समझें तो यह इम्यून सिस्टम पर लगेब्रेकको हटाने जैसा हैजिससे वह कैंसर पर अधिक प्रभावी तरीके से हमला कर सके।


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारका के मेडिकल ऑन्कोलॉजी,  विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. पियूष बाजपेयी ने बताया “शुरुआत में इम्यूनोथेरेपी का उपयोग मुख्य रूप से एडवांस स्टेज के कैंसर में किया गयाजहां इसके अच्छे परिणाम सामने आए। खासतौर पर फेफड़ों का कैंसरमेलेनोमा (स्किन कैंसर)ब्लैडर कैंसरब्रेस्ट कैंसरहेड एंड नेक कैंसर और कुछ पेट इसोफेगस (फूड पाइप) के कैंसर में इसका लाभ देखा गया। कुछ एडवांस कैंसर मरीजों में इस थेरेपी से कई वर्षों तक बीमारी को कंट्रोल में रखने में मदद मिली है। कुछ विशेष प्रकार के कैंसर में लगभग 15–20 प्रतिशत मरीजों को लंबे समय तक फायदा मिलता है।


डॉ. पियूष ने आगे बताया “अब इम्यूनोथेरेपी का उपयोग सर्जरी से पहले भी किया जाने लगा है। पहले इसे अधिकतर एडवांस बीमारी में दिया जाता थालेकिन अब शोध से यह पता चला है कि जब ट्यूमर शरीर में मौजूद होता हैउसी समय इम्यूनोथेरेपी देने से इम्यून सिस्टम बेहतर प्रतिक्रिया दे सकता है। फेफड़ों का कैंसरमेलेनोमाब्लैडर कैंसरब्रेस्ट कैंसर और गैस्ट्रो-इसोफेगल कैंसर जैसे मामलों में यह तरीका उत्साहजनक परिणाम दिखा रहा है। इससे ट्यूमर को पूरी तरह निकालने की संभावना बढ़ सकती है और कैंसर दोबारा होने का रिस्क कम हो सकता है। हालांकि इम्यूनोथेरेपी हर मरीज पर एक जैसा असर नहीं करती। कुछ मरीजों में बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिलता हैजबकि कुछ में अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। कई बार डॉक्टर ट्यूमर या खून में कुछ विशेष मार्कर की जांच करते हैंजिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि इलाज से कितना फायदा होगा। मरीज की अच्छी पोषण स्थिति और सामान्य फिटनेस भी इलाज को सहने और बेहतर परिणाम पाने में मदद करती है।


साइड इफेक्ट्स की बात करें तो इम्यूनोथेरेपी में आमतौर पर कीमोथेरेपी की तुलना में कम बाल झड़ते हैं और कम मतली होती है। लेकिन चूंकि यह इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती हैइसलिए कभी-कभी यह शरीर के सामान्य अंगों पर भी असर डाल सकती है। इसके कारण दस्त (लूज मोशन्स)त्वचा पर रैश या खुजलीसांस लेने में तकलीफहार्मोन असंतुलन से थकान या वजन में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि इन लक्षणों की जानकारी समय पर डॉक्टर को दे दी जाए तो अधिकांश साइड इफेक्ट्स का सफल इलाज संभव है।


यदि किसी मरीज को लगातार दस्तसांस फूलना या खांसीअत्यधिक कमजोरी या चक्करतेजी से फैलता हुआ स्किन रैशबुखार या तेज पेट दर्द होतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साइड इफेक्ट्स का समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।


मरीजों और उनके परिवारों के लिए यह समझना जरूरी है कि इम्यूनोथेरेपी कोई जादू नहीं हैलेकिन यह कैंसर उपचार में एक बड़ी मेडिकल प्रगति जरूर है। इसने कई प्रकार के कैंसर में मरीजों की जीवन अवधि और जीवन की गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है। सही मरीज का चयननियमित मॉनिटरिंग और समय पर सलाह के साथ इम्यूनोथेरेपी आज कैंसर देखभाल में नई उम्मीद लेकर आई है।

February 27, 2026

हाई-एंड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी से कैंसर उपचार में नई क्रांति

हाई-एंड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी से कैंसर उपचार में नई क्रांति

आगरा: रेडियोथेरेपी के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसने कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बना दिया है। आज के समय में EDGE 3.0 HyperArc with ExacTrac 2.0 जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ने इलाज की सटीकता को नई ऊंचाई दी है। यह सिस्टम ट्यूमर को बेहद प्रिसिशन के साथ टारगेट करता है और आसपास के स्वस्थ टिश्यू को सुरक्षित रखता है। इससे न केवल इलाज की सफलता दर बढ़ती है, बल्कि साइड इफेक्ट्स भी कम होते हैं और मरीज को ज्यादा आरामदायक अनुभव मिलता है।



EDGE 3.0 HyperArc और ExacTrac 2.0 का कॉम्बिनेशन आधुनिक रेडियोथेरेपी का सबसे उन्नत रूप माना जाता है। इस तकनीक के माध्यम से रेडिएशन अत्यंत सटीकता से दिया जाता है, जिससे ट्यूमर पर प्रभावी नियंत्रण संभव होता है। उपचार के दौरान जटिलताएं कम होती हैं, सेशन की अवधि कम होती है और अस्पताल के चक्कर भी घटते हैं, जिससे रिकवरी तेज होती है। खास बात यह है कि पहले जिन हिस्सों में रेडिएशन दिया जा चुका है, वहां भी दोबारा उपचार की संभावना बनती है। साथ ही शरीर के उन कठिन हिस्सों में स्थित ट्यूमर का भी सफल इलाज संभव हो पाया है, जिन्हें पहले चुनौतीपूर्ण माना जाता था।



मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के क्लीनिकल एडमिनिस्ट्रेटर एवं प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर डायरेक्टर डॉ. राशि अग्रवाल ने बताया “इन तकनीकी प्रगति का वास्तविक प्रभाव मरीजों की कहानियों में साफ दिखाई देता है। 35 वर्षीय स्तन कैंसर से पीड़ित एक महिला को रेडिएशन से हृदय को नुकसान पहुंचने की चिंता थी। हार्ट-स्पेरिंग रेडिएशन थेरेपी और एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने ट्यूमर को सटीक रूप से टारगेट किया और हृदय को सुरक्षित रखा। इस पर्सनलाइज्ड अप्रोच से हृदय संबंधी रिस्क कम हुआ और दीर्घकालिक सर्वाइवल बेहतर हुई। इसी तरह 20 वर्षीय युवती, जिसे सर्वाइकल कैंसर के एक दुर्लभ और आक्रामक रूप का निदान हुआ था, ने एडवांस्ड रेडियोथेरेपी की मदद से कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त की।