This is default featured slide 1 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.This theme is Bloggerized by Lasantha Bandara - Premiumbloggertemplates.com.

November 20, 2025

Epilepsy Could Be More Than Seizures A Warning of Serious Brain Disorders

Epilepsy Could Be More Than Seizures A Warning of Serious Brain Disorders
By Dr. Aditya Gupta, Director – Neurosurgery and Cyberknife, Artemis Hospital, Gurugram 

Epilepsy, a neurological condition marked by recurrent seizures, continues to impact millions worldwide. Yet, what often goes unnoticed is its deep connection with other brain disorders such as tumors and arteriovenous malformations (AVMs). Understanding these links is vital — not only for improving treatment outcomes but also for raising awareness that can lead to timely diagnosis and intervention.


Epilepsy is frequently not a disease in isolation but a symptom of underlying neurological abnormalities. Brain tumors, for instance, are a major cause of secondary epilepsy. Studies suggest that seizures are often among the earliest warning signs of a hidden tumor, signaling the need for thorough neurological evaluation.


Similarly, AVMs — abnormal tangles of blood vessels in the brain — can disrupt normal blood flow and trigger seizures. In both cases, epilepsy serves as a warning signal, drawing attention to deeper issues within the brain. Recognizing these interconnections helps physicians tailor treatment plans that address the root cause rather than merely controlling symptoms.


espite these well-established links, public awareness about epilepsy’s association with brain tumors and AVMs remains limited. This gap often leads to delays in diagnosis and treatment. Public education, advocacy initiatives, and collaboration between doctors, patient support groups, and the media are essential to bridge this divide. Awareness is not just about understanding epilepsy — it’s about recognizing what it could be signaling beneath the surface.


Advances in medical technology are transforming how complex neurological disorders are treated. Among them, Cyberknife radiosurgery has emerged as a revolutionary tool. Unlike conventional surgery, Cyberknife is completely non-invasive — it uses precisely targeted beams of radiation to treat affected brain areas with sub-millimeter accuracy, sparing surrounding healthy tissue.


For patients with epilepsy linked to brain tumors or AVMs, Cyberknife offers a highly targeted solution. By shrinking or eliminating tumors and stabilizing abnormal blood vessels, it directly addresses the underlying cause of seizures. The procedure is painless, incision-free, and usually performed on an outpatient basis, allowing patients to resume normal life quickly.


While technology like Cyberknife holds tremendous promise, its true potential can only be realized when patients and families are aware of such options. Hospitals, neurosurgeons, and health advocates must work together to promote public understanding of advanced treatments available in India today.


As we continue to explore the intricate workings of the human brain, knowledge and awareness remain our strongest allies. By connecting the dots between epilepsy and related brain disorders — and embracing innovations like Cyberknife radiosurgery — we can move closer to a future where neurological care is more precise, compassionate, and effective than ever before.

मैक्स अस्पताल, द्वारका, ने शुरू की समर्पित पीडियाट्रिक सर्जरी ओपीडी सेवाएं

 

मैक्स अस्पताल, द्वारका, ने शुरू की समर्पित पीडियाट्रिक सर्जरी ओपीडी सेवाएं

रोहतकनवंबर 20, 2025: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलद्वारका ने आज प्रगति हॉस्पिटलरोहतक में अपनी विशेष पीडियाट्रिक सर्जरी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत की। इन सेवाओं का शुभारंभ मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलद्वारका, के पीडियाट्रिक सर्जरीपीडियाट्रिक यूरोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर - डॉ. प्रशांत जैन की उपस्थिति में किया गया।

 

डॉ. प्रशांत जैन, अब हर महीने के पहले और तीसरे गुरुवार को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक प्रगति हॉस्पिटलरोहतक, में उपलब्ध रहेंगेजहाँ वे प्राथमिक परामर्श और फॉलो-अप सेवाएं प्रदान करेंगे। 

 

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलद्वारका के पीडियाट्रिक सर्जरीपीडियाट्रिक यूरोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर - डॉ. प्रशांत जैन, ने कहा, “पीडियाट्रिक सर्जरी से जुड़े मामलों में समय पर जांच और मूल्यांकन बेहद जरूरी होता हैलेकिन कई परिवार विशेष उपचार के लिए दूर जाने में हिचकिचाते हैं। इस ओपीडी के माध्यम से हमारा उद्देश्य रोहतक और आसपास के बच्चों को सुरक्षितभरोसेमंद और विशेषज्ञ पीडियाट्रिक सर्जिकल परामर्श आसानी से उपलब्ध कराना है। पीडियाट्रिक सर्जरी और पीडियाट्रिक यूरोलॉजी में आधुनिक तकनीकखासकर रोबोटिक्सने छोटे बच्चों की सर्जरी के परिणामों को तेज रिकवरी और बेहतर कॉस्मेसिस के साथ बदलकर रख दिया है।”

 

डॉ. प्रशांत, ने आगे बताया कि, “यह एडवांस्ड ओपीडीबच्चों के अनुकूल विशेषज्ञ देखभाल को परिवारों के नजदीक ला रही हैताकि विभिन्न बाल रोग स्थितियों के लिए समय पर परामर्श और उचित मार्गदर्शन मिल सके। इन सेवाओं को समुदाय के करीब लाकर हमारा लक्ष्य है — समय पर निदानप्रभावी उपचार और हर कदम पर माता-पिता को स्पष्ट व संवेदनशील मार्गदर्शन प्रदान करना।”

 

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटलद्वारका, अपने पीडियाट्रिक सर्जिकल सेवाओं को लगातार मजबूत कर रहा हैजिसमें स्टेट-ऑफ-द-आर्ट तकनीकएडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव सिस्टमऔर अनुभवी विशेषज्ञों की टीम शामिल हैजो जटिल जन्मजात विकारोंट्यूमरगैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यूरोलॉजिकल स्थितियों के प्रबंधन में दक्ष हैं। 

November 14, 2025

सेंटर फॉर साइट ने बढ़ते डायबिटिक आई डिज़ीज़ को लेकर चेताया, समय पर स्क्रीनिंग की दी सलाह

सेंटर फॉर साइट ने बढ़ते डायबिटिक आई डिज़ीज़ को लेकर चेताया, समय पर स्क्रीनिंग की दी सलाह

नई दिल्ली : भारत में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज़ के मामलों को देखते हुए सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्स ने डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए रेगुलर आई चेकअप करवाने के महत्व पर जोर दिया है, ताकि समय रहते दृष्टि संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके। इस वर्ष की थीम “डायबिटीज एंड वेल बीइं” के अनुरूप, इस अग्रणी निजी आईकेयर चेन ने कहा कि डायबिटीज़ मैनेजमेंट केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता, विशेषकर दृष्टि की सुरक्षा पर भी ध्यान देना आवश्यक है। 


डायबिटीज़ केवल एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर नहीं है, बल्कि यह एक आजीवन स्थिति है जो शरीर के कई अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा सकती है, जिनमें आँखें प्रमुख हैं। समय के साथ बढ़ा हुआ ब्लड शुगर स्तर रेटिना (आँख के पिछले हिस्से की प्रकाश-संवेदनशील परत) की सूक्ष्म ब्लड वेसल्स को क्षति पहुँचा सकता है, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी नामक स्थिति उत्पन्न होती है, जो एडल्ट्स में ब्लाइंडनेस के प्रमुख कारणों में से एक है। चूंकि यह रोग अक्सर बिना किसी प्रारंभिक लक्षण के विकसित होता है, इसलिए रेगुलर आई चेकअप अत्यंत आवश्यक है।  


सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. महिपाल सिंह सचदेव ने कहा, “डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में कम उम्र में मोतियाबिंद (Cataract) और ग्लूकोमा (Glaucoma) जैसी बीमारियों का खतरा अधिक होता है। बार-बार दृष्टि धुंधली होना, पढ़ने में कठिनाई, या विजन में उतार-चढ़ाव जैसे लक्षण डायबिटीज़ के शुरुआती प्रभाव हो सकते हैं, जिनके लिए समय पर जांच आवश्यक है। यदि दृष्टि धुंधली या अस्थिर हो, दृष्टि क्षेत्र में काले धब्बे या खाली स्थान दिखें, रंगों में फर्क करना मुश्किल हो या अचानक एक या दोनों आँखों की दृष्टि चली जाए, तो तत्काल विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। एक साधारण और बिना दर्द वाली आँखों की जांच से शुरुआती अवस्था में समस्या का पता लगाकर दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।”


रोकथाम के उपायों पर जोर देते हुए डॉ. सचदेव ने कहा कि “ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना अत्यंत जरूरी है। नियमित एक्सरसाइज, फलों और सब्ज़ियों से भरपूर संतुलित आहार, धूम्रपान से परहेज़ और स्वस्थ बॉडी वेट बनाए रखना, आँखों की सेहत और समग्र स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि भले ही कोई लक्षण न हों, फिर भी साल में कम से कम एक बार डायलेटेड रेटिनल एग्ज़ामिनेशन सहित संपूर्ण आँखों की जांच करवानी चाहिए, ताकि शुरुआती परिवर्तन समय रहते पहचाने और इलाज किए जा सकें।”


उपचार में प्रगति पर बात करते हुए डॉ. महिपाल ने कहा, “आज की आधुनिक नेत्र चिकित्सा में डायबिटिक आई डिज़ीज़ के इलाज के कई प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं। लेज़र फोटोकोएगुलेशन से लीकिंग ब्लड वेसल्स को सील किया जा सकता है, एंटी-VEGF ड्रग्स की इंट्राविट्रियल इंजेक्शन रेटिना की सूजन और रक्तस्राव को कम करते हैं, और विट्रेक्टॉमी सर्जरी के माध्यम से आँख से खून या स्कार टिश्यू हटाकर एडवांस्ड मामलों में दृष्टि को बहाल किया जा सकता है। यदि समय रहते निदान और उपचार किया जाए, तो दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनी रह सकती है।”  


डायबिटीज़ का बेहतर प्रबंधन केवल ग्लूकोज मीटर पर दिखने वाली संख्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की आत्मनिर्भरता, दैनिक जीवन का आनंद लेने और गरिमा बनाए रखने की क्षमता को भी सुरक्षित रखता है। आँखों का स्वास्थ्य, संपूर्ण कल्याण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


जागरूकता, नियमित नेत्र परीक्षण और स्वस्थ जीवनशैली, डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए दृष्टि सुरक्षा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। समय पर हस्तक्षेप और सही चिकित्सा मार्गदर्शन से व्यक्ति न केवल अपनी दृष्टि को सुरक्षित रख सकता है, बल्कि जीवन का आनंद भी भरपूर ले सकता है — यही इस वर्ष का संदेश है: “डायबिटीज एंड वेल बीइंग”

November 04, 2025

Vidyamandir Classes Launches “VEEVA” – An AI Learning Companion to Transform Student Learning

Vidyamandir Classes Launches “VEEVA” – An AI Learning Companion to Transform Student Learning

New Delhi :  Vidyamandir Classes (VMC), one of India’s most trusted and pioneering institutes for IIT JEE, NEET, and Foundation coaching, today announced the launch of its latest innovation – VEEVA, an advanced AI-powered learning companion designed to revolutionize the way students study, solve problems, and interact with learning content.

 

VEEVA represents a significant leap forward in VMC’s commitment to integrating technology with education. The platform leverages Artificial Intelligence to help students learn smarter, solve faster, and understand better. Through VEEVA, VMC aims to create a personalized and interactive learning environment that enhances conceptual understanding and develops continuous learning.

 

During the launch, Manmohan Gupta Co-founder (IIT Alumnus), Vidyamandir said, “At Vidyamandir Classes, we have always believed in blending innovation with academic excellence. The launch of VEEVA highlights our vision of empowering students with the best of technology and pedagogy. VEEVA empowers students to engage in real-time problem-solving, clarify doubts instantly, and explore multiple approaches to solving a single question. With the AI-driven system, students can now get step-by-step solutions, alternate methods, and interactive counter-questions—mirroring the experience of one-on-one mentorship.With AI now becoming an integral part of education, VEEVA will serve as a personal learning assistant for every student, available anytime, anywhere.”

 

The platform allows students to clear their doubts anytime, whether related to theoretical concepts or numerical problems. They can upload images of challenging questions to receive detailed explanations and access both VMC’s proprietary AI model, QUINT, and OpenAI’s ChatGPT for comprehensive answers and diverse perspectives. Moreover, VEEVA supports multi-turn conversations, enabling interactive and dynamic learning experiences that closely resemble real-time academic discussions.

 

VEEVA’s integration with VMC’s Learning Management System (LMS) is also underway, which will make the experience even more seamless. Once integrated, students will be able to switch effortlessly between their course content, assessments, and AI-powered assistance within a single interface.

 

This initiative reaffirms Vidyamandir Classes’ leadership in the EdTech-driven evolution of coaching education in India. With VEEVA, VMC is not only equipping its students to perform better in competitive exams but also preparing them for a future where AI and human learning coexist harmoniously.

 

Accessing VEEVA is simple and intuitive. Students can log in at https://veeva.vidyamandir.com or by scanning the QR code provided by the institute. Using their LMS roll number and activation code, learners can instantly start interacting with VEEVA and ask their doubts 24×7.

October 31, 2025

रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट से ऑर्थोपेडिक सर्जरी में नई क्रांति

रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट से ऑर्थोपेडिक सर्जरी में नई क्रांति

मेरठ: आर्थराइटिस एक आम बीमारी है जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। यह एक डिजेनरेटिव जॉइंट डिज़ीज़ है जिसमें जोड़ों के बीच मौजूद चिकनी कार्टिलेज धीरे-धीरे घिस जाती है। कार्टिलेज के खत्म होने से जोड़ों में दर्दअकड़नसूजन और मूवमेंट में कमी आ जाती हैजिससे व्यक्ति के दैनिक जीवन और उसकी जीवन-गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। 


हालांकि आर्थराइटिस आमतौर पर 50 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलता हैलेकिन यह चोटआनुवंशिक कारणों या अधिक वजन की वजह से पहले भी हो सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस इसका सबसे आम प्रकार हैजो धीरे-धीरे बढ़ता है और चलनासीढ़ियाँ चढ़ना या कुर्सी से उठना जैसी सामान्य गतिविधियाँ भी कठिन बना देता है। इस बीमारी का आर्थिक असर भी बड़ा है क्योंकि यह इलाज के खर्च और कार्यक्षमता की कमी दोनों से जुड़ा है। 


मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत के ऑर्थोपेडिक्सजॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन एवं  रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चीफ,डॉ. रमणीक महाजन ने बताया कि आर्थराइटिस का अर्थ है जोड़ों में सूजन। ऑस्टियोआर्थराइटिस तब होता है जब कार्टिलेज घिस जाती है। इसके मुख्य कारणों में बढ़ती उम्रमोटापापुरानी चोटेंआनुवंशिक प्रवृत्ति और काम या खेल से बार-बार होने वाला दबाव शामिल हैं। घुटनेकूल्हे और कंधे के जोड़ों में यह सबसे अधिक देखा जाता है। यदि आपको लगातार जोड़ों में दर्दसुबह की अकड़नसूजनदैनिक कार्यों में कठिनाईमूवमेंट की कमी या नींद में बाधा जैसी शिकायतें हैंतो तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती इलाज से बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है और लक्षणों में राहत मिल सकती है। सर्जरी से पहलेडॉक्टर अक्सर वजन नियंत्रणस्विमिंग या साइक्लिंग जैसी लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइजफिजियोथेरेपीदर्द निवारक दवाइयाँजॉइंट इंजेक्शनब्रेस या वॉकिंग एड्स और ग्लूकोसामीन या कॉन्ड्रॉयटिन जैसे सप्लीमेंट्स की सलाह देते हैं। कई मरीजों को इन उपायों से ही पर्याप्त राहत मिल जाती है।“ 


जब नॉन-सर्जिकल तरीकों से राहत नहीं मिलती और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होने लगती हैतब जॉइंट रिप्लेसमेंट की जरूरत होती है। लगातार तेज दर्दनींद में बाधासीमित गतिशीलतादैनिक कार्यों में कठिनाई और एक्स-रे में बोन-ऑन-बोन डैमेज दिखना इसके प्रमुख संकेत हैं। 


डॉ. रमणीक ने आगे बताया कि  “यूनिकॉन्डायलर नी रिप्लेसमेंट (UKR) में केवल प्रभावित हिस्से को बदला जाता है – चाहे वह अंदरूनीबाहरी या नी-कैप क्षेत्र हो। इसमें छोटा चीरातेज रिकवरी और स्वस्थ ऊतकों का संरक्षण जैसे लाभ होते हैं। हालांकियह केवल उन्हीं मरीजों के लिए उपयुक्त है जिनका आर्थराइटिस एक हिस्से तक सीमित है और लिगामेंट्स मजबूत हैं। टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) में जांघ की हड्डीपिंडली की हड्डी और कभी-कभी नी-कैप के पीछे का हिस्सा धातु और प्लास्टिक से बदल दिया जाता है। यह उन मरीजों के लिए आदर्श है जिनका आर्थराइटिस कई हिस्सों को प्रभावित कर चुका है। आधुनिक इम्प्लांट्स 15 से 20 साल या उससे अधिक समय तक टिक सकते हैं।“ 


नेविगेशन-असिस्टेड सर्जरी में कंप्यूटर और ट्रैकर की मदद से सर्जन इम्प्लांट्स को सही स्थिति और एलाइनमेंट में लगाते हैंजैसे किसी GPS सिस्टम की तरह। रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी इससे एक कदम आगे हैजिसमें सर्जन इमेजिंग की मदद से सर्जरी की विस्तृत योजना बनाता है और फिर रोबोटिक आर्म की सहायता से सब-मिलीमीटर प्रिसिशन के साथ बोन कट्स किए जाते हैं। यह सिस्टम सर्जन को योजना से भटकने नहीं देता और पूरी सर्जरी को अत्यंत सटीक बनाता है। 

रोबोटिक सर्जरी से सटीकता बढ़ती हैइम्प्लांट का कस्टमाइजेशन संभव होता हैस्वस्थ हड्डियों को बचाया जा सकता हैजॉइंट एलाइनमेंट बेहतर होता हैरिकवरी तेज होती है और इम्प्लांट की उम्र बढ़ने की संभावना होती है। हालांकिइसमें ऑपरेशन का समय थोड़ा अधिक लग सकता है और लागत व तकनीकी उपलब्धता पर भी निर्भर करता है। सामान्य सर्जिकल रिस्क जैसे संक्रमणब्लीडिंग या एनेस्थीसिया से जुड़े खतरे भी मौजूद रहते हैं। 


डॉ. रमणीक का कहना है कि अधिकांश मरीज जो जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए योग्य हैंवे रोबोटिक सर्जरी के लिए भी उपयुक्त होते हैं। सर्जन आपके जोड़ों की स्थितिशरीर रचनास्वास्थ्य और अपेक्षाओं का मूल्यांकन कर सर्वोत्तम विकल्प सुझाते हैं। जटिल मामलों में रोबोटिक तकनीक विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। मरीज आमतौर पर सर्जरी के 24 घंटे के भीतर चलना शुरू कर देते हैंतीन महीने में अधिकांश दैनिक कार्य करने लगते हैं और छह से बारह महीनों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। रोबोटिक सिस्टम की सटीकता इम्प्लांट की दीर्घायु को बढ़ा सकती हैहालांकि इसके दीर्घकालिक आंकड़े अभी अध्ययनाधीन हैं।“ 


अपने सर्जन से पारंपरिकनेविगेशन-असिस्टेड और रोबोटिक तकनीकों में उनके अनुभव के बारे में चर्चा करें। साथ ही केस की जटिलतातकनीक की उपलब्धतालागतसंभावित परिणाम और आपकी प्राथमिकताओं पर भी विचार करें। अंततःसबसे महत्वपूर्ण कारक एक अनुभवी और विश्वसनीय सर्जन का चयन हैजो आपकी आवश्यकताओं के अनुसार सर्वोत्तम निर्णय ले सके।

October 24, 2025

रोबोटिक तकनीक से जोड़ों की सर्जरी हुई और भी सटीक और असरदार

रोबोटिक तकनीक से जोड़ों की सर्जरी हुई और भी सटीक और असरदार

मथुरा: जोड़ों का दर्द, जिसे पहले एक सक्रिय जीवनशैली में बाधा माना जाता था, अब एक्टिव रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी नवीनतम ऑर्थोपेडिक तकनीकों की मदद से प्रभावी रूप से इलाज किया जा रहा है। यह अत्याधुनिक तकनीक नी और हिप की सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है, जिससे मरीजों को अधिक सटीक परिणाम, तेज़ रिकवरी, कम दर्द और प्राकृतिक जोड़ों की गति का अनुभव हो रहा है।

 

एक्टिव रोबोटिक सिस्टम 3डी इमेजिंग और रोबोटिक सटीकता का संयोजन करते हैं। सर्जरी से पहले उन्नत इमेजिंग तकनीकों से एक विस्तृत योजना तैयार की जाती है, और सर्जरी के दौरान रोबोटिक सहायता से हर कट और इम्प्लांट की पोजीशन बेहद सटीकता से सुनिश्चित की जाती है। यह सटीक एलाइनमेंट जोड़ों को अधिक स्थायित्व और लंबी उम्र प्रदान करता है, साथ ही आसपास के सॉफ्ट टिशूस को कम नुकसान पहुंचाता है, जिससे रिकवरी सुगम और तेज़ होती है।

 

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन डॉ. सुजॉय भट्टाचार्य ने बताया कि"इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ तेज़ गतिशीलता है। पारंपरिक सर्जरी में जहां रिकवरी में समय लगता है, वहीं एक्टिव रोबोटिक रिप्लेसमेंट के बाद मरीज कुछ घंटों के भीतर खड़े होकर चलना शुरू कर सकते हैं। मांसपेशियों और लिगामेंट्स को बड़ी कटिंग से बचाया जाता है, जिससे शरीर को कम आघात लगता है, दर्द कम होता है और रिकवरी तेज़ होती है। प्रारंभिक गतिशीलता से ब्लड क्लॉट की संभावना भी कम होती है और मांसपेशियां जल्द मजबूत होती हैं।" 


October 20, 2025

26 अक्टूबर को होगा विद्यामंदिर क्लासेस का विद्यामंदिर इंटेलेक्ट क्वेस्ट (VIQ) परीक्षा

26 अक्टूबर को होगा विद्यामंदिर क्लासेस का विद्यामंदिर इंटेलेक्ट क्वेस्ट (VIQ) परीक्षा

लखनऊ : आईआईटी-जेईई (मेन व एडवांस्ड), नीट, बोर्ड्स और ओलंपियाड्स की तैयारी में अग्रणी विद्यामंदिर क्लासेस (VMC) ने अपने बहुप्रतीक्षित, सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित परीक्षा विद्यामंदिर इंटेलेक्ट क्वेस्ट (VIQ) 2025 की तारीखों की घोषणा कर दी है। यह परीक्षा 26 अक्टूबर 2025 को कई स्लॉट्स में आयोजित होगी और इसमें कक्षा 5 से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। 


यह परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में होगी। यह एक राष्ट्रीय स्तर की योग्यता एवं छात्रवृत्ति परीक्षा है, जो विद्यार्थियों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक और शैक्षणिक क्षमता को आंकने का अवसर देती है। विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सीमित समय तक पंजीकरण निःशुल्क रखा गया है। 


इस अवसर पर संस्थापक, श्री संदीप मेहता (आईआईटी दिल्ली एलुमनस) ने कहा,“VIQ केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि गंभीर छात्रों के लिए शैक्षणिक सफलता की ओर पहला कदम है। इसमें सफल विद्यार्थियों को 100% तक की छात्रवृत्ति और ₹2.5 करोड़ तक के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। साथ ही, प्रतिभागियों को वर्ष की सबसे कम शैक्षणिक फीस, निःशुल्क ऑफलाइन कक्षाएं, ई-स्टडी मैटेरियल, प्रैक्टिस टेस्ट और मॉक बोर्ड परीक्षाओं का लाभ मिलेगा।” 


ऑफलाइन मोड से पंजीकरण करने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक गुडी बैग्स (स्टडी किट्स, वाटर टम्बलर, रिस्टबैंड आदि) भी प्रदान किए जाएंगे। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जबकि टॉपर छात्रों को मैडल, ट्रॉफी और VMC की प्रतिष्ठित बैचों Citadel of Excellence (COE) तथा Illuminati में प्रवेश का सुनहरा अवसर मिलेगा। 


विद्यामंदिर क्लासेस हमेशा से अपने अनोखे पैडागॉजी, कठोर टेस्टिंग और समर्पित मेंटरशिप के लिए जानी जाती है। VIQ इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए देशभर के मेधावी छात्रों को सही दिशा और संसाधन उपलब्ध कराने का एक सुनहरा मंच है। 


पंजीकरण हेतु : www.vidyamandir.com
VIQ 2025, हजारों छात्रों के लिए शैक्षणिक उत्कृष्टता और भविष्य की सफलता की ओर पहला कदम साबित होगा।