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December 29, 2025

पीठ दर्द को नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज से बच सकती है सर्जरी

पीठ दर्द को नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज से बच सकती है सर्जरी

पलवलपीठ दर्द एक आम समस्या है जो किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है। आज लगभग हर व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी समय पीठ दर्द का अनुभव करता हैलेकिन राहत की बात यह है कि लगभग 95% मामलों में यह दर्द बिना सर्जरी के ही जीवनशैली में बदलावदवाओंफिजियोथेरेपी और अन्य नॉन-सर्जिकल थेरेपी से ठीक किया जा सकता है। केवल 5% मामलों में गंभीर दर्द या इलाज का असर न होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती है। 


पीठ दर्द से बचाव ही इसका सबसे अच्छा इलाज है। उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी के जोड़ोंडिस्क और हड्डियों में होने वाले बदलाव (डिजेनेरेटिव स्पाइन डिजीज) से होने वाले पुराने पीठ दर्द को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर काफी हद तक रोका या धीमा किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपना वजन नियंत्रित रखेरोजाना एक्सरसाइज करेसही पॉश्चर अपनाए और धूम्रपान से दूर रहे। यह सब रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लंबे समय तक स्पाइनल हेल्थ बनाए रखने में सहायक होता है। 


मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एंड यूनिट हेड डॉ. कपिल जैन ने बताया कि “हालांकिकुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी को लगातार बढ़ता हुआ पीठ दर्द होआराम करने पर भी राहत न मिलेपैरों या हाथों में सुन्नताकमजोरी या झनझनाहट होबुखार या पाचन/मूत्र संबंधी लक्षणों के साथ दर्द होया कैंसर के इतिहास वाले मरीजों को पीठ में दर्द होतो तुरंत न्यूरोसर्जन या स्पाइन स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए। ये संकेत किसी गंभीर रोग की ओर इशारा कर सकते हैं। पीठ दर्द के सही कारणों का पता लगाने के लिए आमतौर पर एमआरआई सबसे उपयुक्त जांच होती हैजिससे हर्नियेटेड डिस्कस्पाइनल स्टेनोसिससंक्रमणट्यूमर या अन्य डिजेनेरेटिव बदलावों का पता चल सकता है। इसके आधार पर डॉक्टर दवाएंफिजियोथेरेपीआराम और जीवनशैली में बदलाव जैसे कंजरवेटिव ट्रीटमेंट शुरू करते हैं और अधिकांश मरीज कुछ ही हफ्तों में बेहतर महसूस करते हैं।“ 


अगर इलाज के बावजूद लक्षण बने रहें या बढ़ जाएंतो फिर सर्जरी की सलाह दी जाती है। आजकल माइक्रोस्कोपिक और एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी जैसे आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव विकल्प मौजूद हैंजिनमें छोटा चीराकम मांसपेशियों की क्षति और जल्दी ठीक होने की संभावना होती है। ये सर्जरी सामान्यत: रीजनल या लोकल एनेस्थीसिया के तहत की जाती हैं और कुशल सर्जनों द्वारा बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। 


पीठ दर्द आम जरूर हैलेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विशेष संकेतों की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेंक्योंकि समय रहते इलाज से दर्द रहित और स्वस्थ जीवन संभव है।

December 24, 2025

जानलेवा ब्रेन एन्यूरिज़्म में मिनिमली इनवेसिव तकनीक बनी जीवनरक्षक

जानलेवा ब्रेन एन्यूरिज़्म में मिनिमली इनवेसिव तकनीक बनी जीवनरक्षक
एंडोवैस्कुलर तकनीक से ब्रेन एन्यूरिज़्म का इलाज अब पहले से ज्यादा सुरक्षित 

बरेलीएन्यूरिज़्म ब्लड वेसल्स की दीवारों में बनने वाला असामान्य उभार या फुलाव होता हैजो अधिकतर आर्टरीज़ में देखा जाता है। यह शरीर के विभिन्न हिस्सों में हो सकता हैजैसे दिमागएओर्टा या पेरिफेरल आर्टरीज़ में। कई बार एन्यूरिज़्म छोटे रहते हैं और कोई लक्षण नहीं देतेलेकिन कुछ मामलों में यह धीरे-धीरे बढ़ते हैं और फटने पर जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं। जब एन्यूरिज़्म दिमाग की  ब्लड वेसल्स में होता हैतो उसे सेरेब्रल एन्यूरिज़्म कहा जाता है। इसके फटने से सबएरैक्नॉइड हैमरेज हो सकता हैजो समय पर इलाज न होने पर गंभीर कॉम्प्लीकेशन्स और मृत्यु का कारण बन सकता है। 


परंपरागत रूप से ब्रेन एन्यूरिज़्म का इलाज ओपन सर्जरी से किया जाता थाजिसमें न्यूरोसर्जन को क्रैनियोटॉमी करके सीधे प्रभावित ब्लड वेसल्स तक पहुंचना पड़ता था और एन्यूरिज़्म के बेस पर क्लिप लगाई जाती थी। यह तरीका प्रभावी जरूर थालेकिन काफी इनवेसिव होने के कारण इसमें रिकवरी का समय ज्यादा लगता था और खासकर बुजुर्ग मरीजों या अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों में जोखिम भी अधिक रहता था। 


मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलनोएडा के न्यूरोइंटरवेंशन एवं स्ट्रोक विभाग के डायरेक्टर डॉ. गिरिश राजपाल ने बताया कि आज के समय में एंडोवैस्कुलर थेरेपी ब्रेन एन्यूरिज़्म के इलाज के लिए एक मिनिमली इनवेसिव और अत्यंत प्रभावी विकल्प के रूप में उभरी है। इस तकनीक में ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं होतीबल्कि ग्रोइन या कलाई में एक छोटे से पंक्चर के जरिए ब्लड वेसल्स के भीतर से ही एन्यूरिज़्म तक पहुंचा जाता है। डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी जैसी एडवांस इमेजिंग तकनीकों की मदद से माइक्रोकैथेटर को बेहद सटीक तरीके से दिमाग की ब्लड वेसल्स के भीतर आगे बढ़ाया जाता है। एन्यूरिज़्म तक पहुंचने के बाद उसका इलाज विभिन्न आधुनिक तरीकों से किया जाता है। कॉइलिंग तकनीक में प्लैटिनम की बेहद पतली कॉइल्स को एन्यूरिज़्म के अंदर डाला जाता हैजिससे वहां ब्लड क्लॉट बन जाता है और एन्यूरिज़्म में ब्लड फ्लो रुक जाता है। वहीं फ्लो डाइवर्टर जैसे स्टेंट-लाइक डिवाइस एन्यूरिज़्म की गर्दन पर लगाए जाते हैंजिससे खून का बहाव उभार से हटकर सामान्य ब्लड वेसल्स की ओर मुड़ जाता है और समय के साथ एन्यूरिज़्म खुद ही बंद होने लगता है।“    


डॉ. गिरिश ने आगे बताया कि एंडोवैस्कुलर थेरेपी के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। यह मिनिमली इनवेसिव होने के कारण मरीज को कम दर्दकम ब्लड लॉस और कम समय में अस्पताल से छुट्टी मिलने का लाभ देती है। रिकवरी तेजी से होती है और रोजमर्रा की जिंदगी में वापसी भी जल्दी संभव होती है। जो मरीज ओपन सर्जरी के लिए हाई रिस्क माने जाते हैंउनके लिए यह तकनीक कहीं अधिक सुरक्षित विकल्प साबित होती है। आधुनिक इमेजिंग और नेविगेशन सिस्टम की मदद से डिवाइस की सटीक प्लेसमेंट संभव होती हैजिससे इलाज की सफलता दर भी बेहतर होती है और कॉम्प्लिकेशन का खतरा कम होता है।“ 


हालांकिकिसी भी मेडिकल प्रोसीजर की तरह एंडोवैस्कुलर इलाज में भी कुछ जोखिम हो सकते हैंजैसे पंक्चर साइट पर ब्लीडिंगब्लड वेसल्स को नुकसान या क्लॉट बनने की संभावना। कुछ मामलों में एन्यूरिज़्म दोबारा उभर सकता हैजिसके लिए फॉलो-अप इमेजिंग और कभी-कभी दोबारा इलाज की जरूरत पड़ती है। लेकिन अनुभवी विशेषज्ञों और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 


कुल मिलाकरएंडोवैस्कुलर थेरेपी ने ब्रेन एन्यूरिज़्म के इलाज की दिशा ही बदल दी है। यह मरीजों को एक ऐसा लाइफ-सेविंग विकल्प देती हैजिसमें प्रिसिशनसेफ्टी और तेज रिकवरी का बेहतरीन संतुलन होता है। एन्यूरिज़्म के प्रति जागरूकतासमय पर जांच और सही समय पर इलाज मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। लगातार विकसित हो रही डिवाइस टेक्नोलॉजी और तकनीकों के साथ भविष्य में एन्यूरिज़्म का इलाज पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनता जा रहा है।

December 18, 2025

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत ने डे-केयर रोबोटिक आर्म-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सफल शुरुआत की

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत ने डे-केयर रोबोटिक आर्म-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सफल शुरुआत की
 

गुवाहाटी: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत ने जॉइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में एक नया बेंचमार्क स्थापित करते हुए अपने डे-केयर रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट प्रोग्राम की सफल शुरुआत की है। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहनेसर्जरी के बाद होने वाले दर्द और देर से रिकवरी जैसी पुरानी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह एडवांस प्रोग्राम योग्य मरीजों को रोबोटिक आर्म-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद उसी दिन घर लौटने की सुविधा देता है। यह पहल भारत में जॉइंट रिप्लेसमेंट के इलाज के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। 


आर्थराइटिस या जॉइंट डीजेनेरेशन के कारण होने वाला क्रॉनिक घुटनों का दर्द अक्सर चलने-फिरने की क्षमता को सीमित कर देता है और जीवन की गुणवत्ता पर असर डालता है। चलनासीढ़ियां चढ़ना या घर के सामान्य काम भी कठिन हो जाते हैं। हालांकि पारंपरिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी प्रभावी रही हैलेकिन लंबी रिकवरी और अस्पताल में रुकने की आशंका के कारण कई मरीज हिचकिचाते हैं। डे-केयर रोबोटिक अप्रोच एडवांस टेक्नोलॉजी को पेशेंट-सेंट्रिक प्रोटोकॉल के साथ जोड़ती हैजिससे ज्यादा प्रिसिशनमिनिमल इनवेसिव सर्जरी और तेज रिहैबिलिटेशन संभव हो पाता है। इससे मरीज कम समय में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपनी मोबिलिटी वापस पा सकते हैं। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी ने कहा, “रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सिस्टम एडवांस 3डी इमेजिंग के जरिए हर मरीज के घुटने की बनावट के अनुसार एक पर्सनलाइज्ड सर्जिकल प्लान तैयार करता है। सर्जरी के दौरान रोबोटिक आर्म इस प्लान को बेहद सटीकता के साथ लागू करता हैजिससे सही अलाइनमेंट और बैलेंस सुनिश्चित होता है और नेचुरल स्ट्रक्चर सुरक्षित रहते हैं। पोस्टेरियर क्रूशिएट लिगामेंट को सुरक्षित रखनासबवास्टस अप्रोच के जरिए मसल कटिंग से बचना और टॉर्निकेट का इस्तेमाल न करना जैसे अहम सर्जिकल सिद्धांत घुटने को अधिक नेचुरल फील देने में मदद करते हैंसाथ ही ब्लड लॉस और सर्जरी के बाद होने वाली तकलीफ भी कम होती है। रोबोटिक सर्जरी के मिनिमली इनवेसिव नेचर के कारण मरीजों को कम दर्द होता है और रिकवरी तेज होती है। लोकल एनेस्थीसिया का असर खत्म होते ही कुछ ही घंटों में रिहैबिलिटेशन शुरू कर दी जाती हैजिसमें पहले असिस्टेड मूवमेंट और कई मामलों में स्वतंत्र रूप से चलना भी शामिल है।”

मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली, ने मेरठ में एक्सक्लूसिव न्यूरोलॉजी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत की

मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली, ने मेरठ में एक्सक्लूसिव न्यूरोलॉजी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत की

मेरठ, दिसंबर 18, 2025: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली ने आज मैक्स मेडसेंटर, मेरठ में अपनी एक्सक्लूसिव न्यूरोलॉजी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत की। इस ओपीडी का शुभारंभ मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली, के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ-  मधुकर त्रिवेदी, की मौजूदगी में किया गया।

 

डॉ. मधुकर त्रिवेदी, अब मैक्स मेडसेंटर, मेरठ में हर महीने के पहले और तीसरे बुधवार को दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगे, जहां वे प्राइमरी कंसल्टेशन और फॉलो-अप सेवाएं प्रदान करेंगे।

 

लॉन्च के दौरान, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट - डॉ. मधुकर त्रिवेदी, ने बताया कि, “बड़ी संख्या में मरीज सिरदर्द, माइग्रेन, अचानक या तीव्र चक्कर आना, बेहोशी, चलने में परेशानी, संतुलन या कोऑर्डिनेशन की कमी, हाथ-पैरों में सुन्नपन, एक या दोनों आंखों से देखने में दिक्कत, बोलने में समस्या, निगलने में कठिनाई जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ आते हैं। इन ओपीडी सेवाओं की शुरुआत से मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्ट्रोक मैनेजमेंट, एपिलेप्सी सहित विभिन्न न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स के डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट की सुविधा आसानी से मिल सकेगी।

 

डॉ. मधुकर, ने आगे कहा कि, “स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत इलाज बेहद जरूरी होता है। खासकर इस्केमिक स्ट्रोक के मामलों में गोल्डन आवर के भीतर सही हस्तक्षेप से ब्रेन डैमेज को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर क्लॉट-डिज़ॉल्विंग दवाएं या क्लॉट रिमूवल प्रोसीजर, साथ ही थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी, एंटीकोएगुलेंट्स, एंटीप्लेटलेट मेडिकेशन और ब्लड प्रेशर कंट्रोल जैसे मेडिकल मैनेजमेंट से बेहतर परिणाम मिलते हैं। इसी तरह, एपिलेप्सी भी एक आम न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें अर्ली डायग्नोसिस और नियमित इलाज से सीज़र्स को कंट्रोल किया जा सकता है और मरीज की क्वालिटी ऑफ लाइफ में बड़ा सुधार संभव है। आधुनिक दवाओं और सर्जिकल इंटरवेंशंस की मदद से मूवमेंट डिसऑर्डर्स को भी प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा रहा है।

 

आधुनिक टेक्नोलॉजी, स्पेशलाइज्ड क्लिनिकल अप्रोच, बेहतरीन डायग्नोस्टिक सुविधाओं और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम के साथ मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली, एक 24×7 स्ट्रोक इमरजेंसी रेडी सेंटर के रूप में सेवाएं प्रदान कर रहा है।

December 16, 2025

विद्यामंदिर क्लासेज़ ने लॉन्च किया VINIT 2025

विद्यामंदिर क्लासेज़ ने लॉन्च किया VINIT 2025

जेईई, नीट, बोर्ड्स और ओलिंपियाड की तैयारी के लिए देश के सबसे विश्वसनीय संस्थानों में से एक विद्यामंदिर क्लासेज़ (वीएमसी) ने विद्यामंदिर इंटेलेक्ट नेशनल इंसेंटिव टेस्ट (VINIT) की घोषणा की है। यह वीएमसी का प्रमुख एडमिशन-कम-स्कॉलरशिप-कम-इंसेंटिव टेस्ट है, जो कक्षा 5 से 12 तक के छात्रों के लिए आयोजित किया जाता है। इस वर्ष VINIT पहले से और बड़ा होकर लौट रहा है—ज़्यादा कैश रिवॉर्ड्स, बेहतर स्कॉलरशिप और अधिक अकैडमिक बेनिफिट्स के साथ।

 

यह टेस्ट पूरे देश में 21 और 25 दिसंबर को आयोजित होगा, जिसमें छात्रों को कुल तीन अवसर मिलेंगे। VINIT छात्रों को साइंस और मैथ्स में अपनी कॉन्सेप्चुअल अंडरस्टैंडिंग जांचने, लर्निंग गैप्स पहचानने और वीएमसी के एडवांस्ड एनालिटिकल टूल्स के साथ नेशनल लेवल पर अपना परफॉर्मेंस बेंचमार्क करने में मदद करता है।

 

VINIT के तहत मेरिटोरियस छात्रों को 2.5 करोड़ रुपये तक के मेगा कैश प्राइज़, 100% तक की स्कॉलरशिप, और कई एक्सक्लूसिव अकैडमिक फायदे मिलेंगे, जैसे मौजूदा सत्र के लिए रिविज़न क्लासेज़, साइंटिफिकली डिज़ाइन किए गए प्रैक्टिस टेस्ट, मॉक बोर्ड एग्ज़ाम और विस्तृत ई-स्टडी मटेरियल। सभी क्वालिफ़ाई करने वाले छात्रों को वीएमसी के नेशनल स्तर पर प्रसिद्ध फैकल्टी और फाउंडिंग टीम के एक्सक्लूसिव सेशंस व मेंटरशिप का लाभ मिलेगा। इसके अलावा छात्र वीएमसी के क्लासरूम या ऑनलाइन प्रोग्राम्स में एडमिशन लेकर जेईई, नीट, ओलिंपियाड और बोर्ड परीक्षाओं की दीर्घकालीन तैयारी भी मजबूत कर सकते हैं।

 

इस पहल पर बोलते हुए वीएमसी के को-फाउंडर (आई आई टी - दिल्ली - अलुम्नी) संदीप मेहता ने कहा, “विद्यामंदिर का मिशन हमेशा से छात्रों में साइंटिफिक और एनालिटिकल थिंकिंग की मजबूत नींव बनाना रहा है। VINIT, छात्रों को शुरू से ही हाई-क्वालिटी असेसमेंट का अनुभव देता है, जिससे वे कॉम्पिटीटिव एग्ज़ाम्स के बढ़ते कठिनाई स्तर के साथ आसानी से एडजस्ट कर सकें। हम टैलेंट को पहचानकर बड़े इंसेंटिव और स्कॉलरशिप देते हुए देश के भावी इंजीनियर, डॉक्टर और इनोवेटर्स तैयार करना चाहते हैं।”

 

लगभग चार दशकों से वीएमसी ने पूरे देश में, अपने फाउंडर्स की वैल्यू-ड्रिवन टीचिंग और पर्सनल मेंटरशिप के साथ, लाखों छात्रों की अकैडमिक यात्रा को दिशा दी है । VINIT इसी विरासत को आगे बढ़ाता है, कक्षा 5 से 12 तक के छात्रों को अर्ली स्टार्ट एडवांटेज देते हुए—ताकि वे मजबूत फ़ंडामेंटल बनाएं और ओलिंपियाड, बोर्ड्स तथा भविष्य की JEE/NEET तैयारी के लिए अच्छी बुनियाद विकसित कर सकें।

 

वीएमसी के को-फाउंडर (आई आई टी - दिल्ली - अलुम्नी) मनमोहन गुप्ता  ने कहा, “हर स्टेज पर छात्र की लर्निंग कर्व को समझना हमारी मेथडोलॉजी का मूल है। हमारी एक्सपीरियंस्ड फैकल्टी—जो एक दशक से अधिक समय से JEE और NEET छात्रों को ट्रेन कर रही है—यह सुनिश्चित करती है कि हर छात्र को सही गाइडेंस, क्लैरिटी और मेंटरशिप मिले, ताकि वह नेशनल और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।”

 

VINIT केवल इंजीनियरिंग या मेडिकल आकांक्षी छात्रों के लिए ही नहीं है—यह उन सभी छात्रों के लिए समान रूप से फायदेमंद है जो स्कूल-लेवल और नेशनल-लेवल ओलिंपियाड में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहते हैं, या कक्षा 10 और 12 बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। इसका स्ट्रक्चर्ड इवैल्यूएशन और फीडबैक सिस्टम छात्रों को यह स्पष्ट रूप से बताता है कि वे कहां खड़े हैं और कैसे लगातार सुधार कर सकते हैं।

 

VINIT 2025 के बारे में रजिस्ट्रेशन, टेस्ट डेट्स, रिवॉर्ड्स, सिलेबस और सैंपल पेपर्स जानने के इच्छुक छात्र https://www.vidyamandir.com/ पर विज़िट कर सकते हैं।

December 12, 2025

Max Hospital, Saket Successfully Performs Haploidentical Bone Marrow Transplant on 21-Year-Old patient suffering from high-grade blood cancer

Max Hospital, Saket Successfully Performs Haploidentical Bone Marrow Transplant on 21-Year-Old patient suffering from high-grade blood cancer
Agra, December 12, 2025: Doctors at Max Super Speciality Hospital, Saket have successfully performed a life-saving Haploidentical Bone Marrow Transplant (BMT) on a 21-year-old patient from Agra diagnosed with Acute Myeloid Leukaemia (AML), battling high-risk blood cancer. The complex procedure was led by Dr. Faran Naim, Senior Consultant - Hematology & Bone Marrow Transplantation and Dr. Rayaz Ahmed, Principal Director - Haematology and Bone Marrow Transplant from Max Super Speciality Hospital, Saket 


The patient, Mr. Manan Sharma, a 21-year-old student, first presented in June 2025 with a short history of persistent fever and severe fatigue. Preliminary evaluation in Agra indicated a high suspicion of leukemia, prompting an immediate referral to Max Hospital, Saket. Upon comprehensive testing done at Max Hospital Saket, he was diagnosed with Acute Myeloid Leukaemia, an aggressive form of blood cancer that requires prompt and intensive treatment. 


Mr. Sharma was admitted and placed on immediate supportive care, including antibiotics for persistent fever. The medical team counselled the family regarding the need for intensive chemotherapy, following which he underwent induction chemotherapy with the FLAG-VEN regimen. While he responded positively to treatment, he encountered a serious infectious complication known as Ludwig’s angina. With appropriate medical management, he made a full recovery. 


Dr. Faran Naim, Senior Consultant - Hematology & Bone Marrow Transplantation, Max Super Speciality Hospital, Saket said “Performing a haploidentical transplant requires meticulous planning and careful management of post-transplant complications. Manan responded exceptionally well at every stage of treatment. Seeing him return to a normal life after six months is extremely rewarding. This success highlights the capability of our team and the advanced BMT infrastructure at Max Hospital, Saket.” 


A repeat evaluation revealed that the disease had entered remission. However, due to the presence of high-risk genetic mutations, the treating team advised an allogeneic Bone Marrow Transplant as the best long-term curative approach. Being the only child, Manan did not have a matched sibling donor, making a fully matched transplant impossible. The family was counselled for a haploidentical (half-matched) transplant using his father as the donor. 


Dr. Rayaz Ahmed, Principal Director - Haematology and Bone Marrow Transplant from Max Super Speciality Hospital, Saket said / or Dr Faran further added “Manan’s case reflects how modern advancements in bone marrow transplantation are giving young patients a second chance at life, even in the absence of fully matched donors. Haploidentical BMTs allow us to extend curative therapy to families who otherwise struggle to find a compatible donor. His recovery is a testament to timely diagnosis, coordinated multidisciplinary care, and the unwavering strength of the patient and his family.” 


Manan underwent a successful haploidentical BMT at Max Hospital, Saket. The procedure demanded advanced clinical precision, expert infection control, and continuous monitoring. Today, six months post-transplant, Manan is leading a normal life, requires no major medications, and is steadily returning to his routine activities. His recovery demonstrates how haploidentical transplants are transforming outcomes for high-risk patients, especially when fully matched donors are unavailable. 


Max Hospital, Saket continues to be a leading centre for advanced haematology and bone marrow transplantation, offering cutting-edge treatments that provide renewed hope for patients with complex blood cancers. 


About Max Healthcare:

Max Healthcare Institute Limited (Max Healthcare) is one of India’s largest healthcare organizations. It is committed to the highest standards of clinical excellence and patient care, supported by latest technology and cutting-edge research. 


Max Healthcare operates 20 healthcare facilities (~5,200 beds) with a significant presence in North India. The network consists of all the hospitals and medical centres owned and operated by the Company and its subsidiaries, partner healthcare facilities and managed healthcare facilities, which includes state-of-the-art tertiary and quaternary care hospitals located at Saket (3 hospitals), Patparganj, Vaishali, Rajendra Place, Dwarka, Noida and Shalimar Bagh in Delhi NCR and one each in Lucknow, Mumbai, Nagpur, Mohali, Bathinda, Dehradun, secondary care hospitals in Gurgaon and medical centres at Noida, Lajpat Nagar and  Panchsheel Park in Delhi NCR, and one in Mohali, Punjab. The hospitals in Mohali and Bathinda are under PPP arrangement with the Government of Punjab. 


In addition to the hospitals, Max Healthcare operates homecare and pathology businesses under brand names Max@Home and Max Lab, respectively. Max@Home offers health and wellness services at home while Max Lab provides diagnostic services to patients outside the network.

December 10, 2025

सेंटर फॉर साइट मुरादाबाद ने शुरू की एडवांस्ड सर्जिकल रेटिना सर्विसेज, जानी-मानी रेटिना स्पेशलिस्ट डॉ. उपासना सिंह ने किया जॉइन

सेंटर फॉर साइट मुरादाबाद ने शुरू की एडवांस्ड सर्जिकल रेटिना सर्विसेज, जानी-मानी रेटिना स्पेशलिस्ट डॉ. उपासना सिंह ने किया जॉइन

मुरादाबाद : भारत की प्रमुख सुपर-स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल चेन सेंटर फॉर साइट ने मुरादाबाद में अपनी एडवांस्ड सर्जिकल रेटिना सर्विसेज की शुरुआत की है। वेस्टर्न यूपी के लोगों को वर्ल्ड-क्लास रेटिना ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इस उपलब्धि को और खास बनाते हुए जानी-मानी विट्रियोरेटिनल सर्जन डॉ. उपासना सिंह सीनियर कंसल्टेंट – विट्रियोरेटिनल सर्विसेज के रूप में टीम में शामिल हुई हैं।


1996 में पद्मश्री प्रो. (डॉ.) महिपाल एस. सचदेव द्वारा स्थापित सेंटर फॉर साइट आज देश के सबसे विश्वसनीय आई-केयर नेटवर्क्स में से एक है, जिसके 90+ सेंटर्स, 30+ शहरों में प्रज़ेंस, 350+ विशेषज्ञ डॉक्टर और लगभग तीन दशक की क्लीनिकल एक्सीलेंस शामिल है। हर साल 15 लाख से ज़्यादा मरीज यहां मोतियाबिंद, रिफ्रैक्टिव सर्जरी, कॉर्निया, ग्लॉकोमा, रेटिना, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी, ओकुलोप्लास्टी और ऑक्युलर ऑन्कोलॉजी जैसी सेवाओं का लाभ उठाते हैं।


मुरादाबाद स्थित सेंटर फॉर साइट में शुरू हुई नई सर्जिकल रेटिना यूनिट डायबेटिक रेटिनोपैथी, रेटिनल डिटैचमेंट, एआरएमडी (ARMD), मैक्युलर होल, एपिरेटिनल मेम्ब्रेन और एडवांस्ड विट्रियोरेटिनल डिज़ीज़ जैसी कॉम्प्लेक्स स्थितियों की डायग्नोसिस व मैनेजमेंट के लिए पूरी तरह सक्षम है। नेक्स्ट-जेन डायग्नोस्टिक्स और कटिंग-एज सर्जिकल टेक्नोलॉजी के साथ अब मरीजों को स्पेशलाइज्ड रेटिना ट्रीटमेंट के लिए बड़े शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।


सेंटर फॉर साइट मुरादाबाद की नई टीम में शामिल हो रही हैं डॉ. उपासना सिंह, जो अपनी मज़बूत अकादमिक पृष्ठभूमि, सर्जिकल स्किल्स और पेशेंट सेंट्रिक अप्रोच के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने MBBS गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज मिरज (MUHS) से किया और MS ऑप्थैल्मोलॉजी एमएलएन मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज (KGMU) से। इसके बाद उन्होंने सतगुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट से विट्रियोरेटिनल सर्जरी में फेलोशिप पूरी की—जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित रेटिना संस्थानों में से एक है। सेंटर फॉर साइट से जुड़ने से पहले वे ASMC प्रतापगढ़ में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं और क्लीनिकल व सर्जिकल ट्रेनिंग में उल्लेखनीय योगदान दे चुकी हैं।


लॉन्च के अवसर पर डॉ. उपासना सिंह ने कहा, “कई रेटिनल बीमारियाँ धीरे-धीरे बढ़ती हैं और समय रहते इलाज न मिले तो परमानेंट विज़न लॉस का कारण बन सकती हैं। मुरादाबाद में सर्जिकल रेटिना सर्विसेज की शुरुआत से अब मरीजों को एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स और स्पेशलाइज्ड सर्जरी अपने ही शहर में उपलब्ध होगी। सेंटर फॉर साइट से जुड़कर मैं सम्मानित महसूस कर रही हूँ और लोगों की सेवा संवेदना, सटीकता और लेटेस्ट सर्जिकल इनोवेशन के साथ करने के लिए तत्पर हूँ।”


सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ़ आई हॉस्पिटल्स  के चेयरमैन और मेडिकल डायरेक्टर, प्रो. (डॉ.) महिपाल एस. सचदेव ने कहा, “सेंटर फॉर साइट का लक्ष्य हमेशा से उच्च-गुणवत्ता, नैतिक और सुलभ आंखों की देखभाल उपलब्ध कराना रहा है। मुरादाबाद में सर्जिकल रेटिना सर्विसेज की शुरुआत, जिसका नेतृत्व डॉ. उपासना सिंह कर रही हैं, हमारी इसी प्रतिबद्धता को मज़बूत करती है। इससे हम उन क्षेत्रों तक भी वर्ल्ड-क्लास एक्सपर्टीज़ और टेक्नोलॉजी पहुँचा पा रहे हैं जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”


सेंटर फॉर साइट  मुरादाबाद के मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. ललित मोहन ने कहा, “मुरादाबाद के आई-केयर में यह एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है। एडवांस्ड सर्जिकल रेटिना सर्विसेज और डॉ. उपासना सिंह की विशेषज्ञता के साथ अब जटिल रेटिनल बीमारियों से जूझ रहे मरीज समय पर और स्पेशलाइज्ड ट्रीटमेंट हमारे ही शहर में प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल हमारी कमिटमेंट को और मजबूत करती है—हर मरीज को करुणा, व्यापक देखभाल और हाई-टेक उपचार प्रदान करना।”


इस नए विकास के साथ, सेंटर फॉर साइट पूरे भारत में एडवांस्ड, नैतिक और उच्च-गुणवत्ता वाली आई-केयर सेवाएँ प्रदान करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराता है।

December 06, 2025

मिर्गी के दौरे: जानिए क्यों आते हैं, क्या है इसका इलाज और कितने दिनों में मिलती है राहत

मिर्गी के दौरे: जानिए क्यों आते हैं, क्या है इसका इलाज और कितने दिनों में मिलती है राहत

मिर्गी के दौरे पड़ना गंभीर बीमारी है, लेकिन बिना लापरवाही के डॉक्टर से सही समय पर इलाज मिल जाए तो इससे जिंदगी को नॉर्मल किया जा सकता है। डॉक्टर ने बताया मिर्गी के दौरे पड़ने के क्या कारण हैं?

 

मिर्गी (Epilepsy) एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें मस्तिष्क के अंदर असामान्य विद्युत गतिविधि होती है। भारत में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और समय रहते जागरूकता और सही इलाज के जरिए इसे कंट्रोल किया जा सकता है। मिर्गी का सीधा कनेक्शन हमारे मस्तिष्क (Brain) से होता है। मिर्गी के दौरे पड़ने के अलग-अलग लोगों में कुछ इस तरह के कारण हो सकते हैं। डॉक्टर आदित्य गुप्ता (डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी एंड साइबरनाइफ, आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम) ने बताया कि मिर्गी कई कारणों से हो सकती है, लेकिन इसके मुख्य कारण इनमें से कोई हो सकते हैं।

 

मिर्गी के दौरे क्यों पड़ते हैं?

मस्तिष्क में चोट (Brain Injury)- किसी को सड़क दुर्घटना, गिरने या सिर पर चोट लगने के बाद मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जो बाद में दौरे का कारण बनती हैं।

स्ट्रोक (Stroke)- स्ट्रोक के बाद मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से में असंतुलित विद्युत गतिविधि विकसित हो जाती है, जिससे मिर्गी होने की संभावना बढ़ जाती है।

दिमाग में ट्यूमर या इंफेक्शन (Brain Tumor Or Infection)- ब्रेन ट्यूमर, मैनिन्जाइटिस, एन्सेफलाइटिस जैसे संक्रमण दिमाग की संरचना को प्रभावित करते हैं और मिर्गी के दौरे की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

जन्मजात कारण (Genetic/Early Developmental Issues)- कुछ बच्चों में मस्तिष्क का विकास गर्भावस्था या जन्म के दौरान प्रभावित हो जाता है, जिससे बचपन में मिर्गी के लक्षण दिख सकते हैं।

आनुवंशिक कारण (Genetic)- कुछ प्रकार की मिर्गी परिवार में चलती है और जीन संबंधी बदलावों के कारण होती है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन / मेटाबॉलिक कारण- लो शुगर, हाई या लो सोडियम, किडनी/लिवर की गंभीर समस्याएं भी दौरे ट्रिगर कर सकती हैं।

 

क्या मिर्गी का इलाज संभव है?

डॉक्टर आदित्य गुप्ता बताते हैं कि मिर्गी का आधुनिक उपचार बेहद प्रभावी है। दवाइयों से 70% मरीज पूरी तरह कंट्र्रोल किया जा सकता है। जिन पर दवाइयां असर नहीं करतीं, उनमें एडवांस्ड ब्रेन सर्जरी, लेज़र एब्लेशन या साइबरनाइफ तकनीक बेहतरीन परिणाम दे सकती है। समय पर पता लगना और लगातार फॉलो-अप मरीज के स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी हैं। मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जिसे सही जानकारी, समय पर उपचार और परिवार के सहयोग से पूरी तरह सामान्य जीवन में बदला जा सकता है।