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September 28, 2025

25 की उम्र के बाद हर साल ज़रूरी है हार्ट चेकअप

25 की उम्र के बाद हर साल ज़रूरी है हार्ट चेकअप

पानीपत: भारत में हार्ट डिसीस आज भी मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैलेकिन इनकी बड़ी संख्या को समय पर स्क्रीनिंग और सरल जीवनशैली में बदलाव से रोका जा सकता है। दुर्भाग्य सेकई लोग शुरुआती लक्षणों और जांचों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और तब तक इंतजार करते हैं जब तक समस्या गंभीर न हो जाएजिससे हृदय को हुआ नुकसान अक्सर ठीक करना मुश्किल हो जाता है। 


हार्ट डिसीस अचानक विकसित नहीं होते। उच्च कोलेस्ट्रॉलउच्च रक्तचापमधुमेहधूम्रपानतनाव और अस्वस्थ खानपान धीरे-धीरे ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। शुरुआत में ये समस्याएँ कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातींलेकिन समय के साथ आर्टरीज़ को संकरा कर देती हैंरक्त आपूर्ति घटा देती हैं और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देती हैं।     


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलशालीमार बाग के कार्डियोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी डॉ. नवीन भामरी ने बताया कि नियमित जांच से हार्ट डिसीस के छुपे हुए जोखिम कारकों को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है। ईसीजीइकोकार्डियोग्राफीलिपिड प्रोफाइलब्लड शुगर जैसी जांचें और कुछ मामलों में सीटी एंजियोग्राफी जैसी एडवांस जांचें हृदय की छिपी समस्याओं को सामने ला सकती हैं। शुरुआती पहचान डॉक्टरों को समय रहते इलाजजीवनशैली सुधार या आवश्यक हस्तक्षेप करने का मौका देती है और बड़ी आपात स्थितियों से बचाती है। स्क्रीनिंग सिर्फ उन लोगों के लिए नहीं है जिन्हें पहले से हृदय रोग है। हर वयस्क को 25 वर्ष की उम्र के बाद सालाना हृदय जांच पर विचार करना चाहिए। जिनके परिवार में हृदय रोगडायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर का इतिहास हैउन्हें और भी ज्यादा सावधान रहना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के लिए तो नियमित जांच अनिवार्य मानी जानी चाहिएक्योंकि उम्र के साथ हृदय रोग का खतरा स्वतः बढ़ता है।“ 


डॉ. नवीन ने आगे बताया कि जांच के साथ-साथ रोज़मर्रा की आदतें भी हृदय को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। संतुलित आहार जिसमें फलसब्जियांसाबुत अनाज और हल्के प्रोटीन शामिल होंबेहद ज़रूरी है। तैलीयतला-भुना और प्रोसेस्ड भोजन कम करने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। हफ्ते में अधिकांश दिनों पर कम से कम आधे घंटे तेज़ चाल से चलनायोग या साइकिलिंग करने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है और दिल मज़बूत रहता है। साथ ही धूम्रपान से पूरी तरह दूरीशराब का सीमित सेवनध्यान और हॉबीज़ के जरिए तनाव कम करना, 7–8 घंटे की नींद लेना और स्वस्थ वजन बनाए रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी हैं।“ 


छाती में भारीपनअचानक सांस फूलनाअसामान्य थकानचक्कर आना या अत्यधिक पसीना आना – इन लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें। कई मरीज इन्हें गैस्ट्रिक समस्या समझकर देर कर देते हैंजिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। 


आपका दिल समय से पहले ध्यान चाहता है। किसी आपात स्थिति का इंतजार न करें। नियमित जांच कराएंशरीर के संकेतों को सुनें और अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें। आज उठाए गए ये कदम आपके दिल को लंबे समय तक स्वस्थ और मज़बूत बनाए रखेंगे।

September 27, 2025

मैक्स हॉस्पिटल, द्वारका, के डॉक्टर्स ने गर्भवती महिला से बास्केटबॉल आकार का ओवेरियन ट्यूमर सफलतापूर्वक हटाया, मां और बच्चे दोनों को मिली नई जिंदगी

मैक्स हॉस्पिटल, द्वारका, के डॉक्टर्स ने गर्भवती महिला से बास्केटबॉल आकार का ओवेरियन ट्यूमर सफलतापूर्वक हटाया, मां और बच्चे दोनों को मिली नई जिंदगी

भिवाड़ी, सितम्बर 27, 2025: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका, के डॉक्टर्स ने एक दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण केस में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। 25 साल की पहली बार गर्भवती महिला में से  बास्केटबॉल के आकार का ओवेरियन ट्यूमर सफलतापूर्वक हटाया गया और बाद में महिला ने सुरक्षित रूप से स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।  


इस अनोखी उपलब्धि को साझा करने और महिलाओं में कैंसर की शुरुआती पहचान के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए, मैक्स हॉस्पिटल, द्वारका, ने एक अवेयरनेस सेशन का आयोजन किया। इसका नेतृत्व, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका, के गायनी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की कंसल्टेंट - डॉ सरिता कुमारी ने मरीज के साथ मिलकर की।  


मरीज, अनामिका झा, भिवाड़ी की रहने वाली हैं। एक रूटीन अल्ट्रासाउंड में असामान्य रूप से बड़े मास का पता चलने पर उन्हें मैक्स हॉस्पिटल द्वारका रेफर किया गया। शुरुआती जांच में ओवेरियन कैंसर का शक हुआ, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई क्योंकि डॉक्टरों को मां के साथ गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा का भी ध्यान रखना था। गायनी ऑन्कोलॉजी टीम ने गर्भावस्था के इस चरण में एक दुर्लभ और जोखिम भरी सर्जरी करने का फैसला किया, जिसमें ट्यूमर के साथ प्रभावित ओवरी और फैलोपियन ट्यूब को हटाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान गर्भावस्था को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। 

  

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका, के गायनी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की कंसल्टेंट - डॉ. सरिता कुमारी ने कहा, “गर्भावस्था के दौरान ट्यूमर का पता चलना मरीज और परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण होता है। हालांकि ऐसे केस दुर्लभ हैं, लेकिन समय पर डायग्नोसिस, सही योजना और टीमवर्क से इन्हें सुरक्षित रूप से मैनेज किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान इतना बड़ा ओवेरियन ट्यूमर मिलना बेहद असामान्य है और इस समय ऑपरेशन करना बेहद ​हाई लेवल प्रिसिशन की मांग करता है। यह केस इस बात का उदाहरण है कि एडवांस्ड मेडिकल केयर और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीमवर्क से असंभव भी संभव हो सकता है।”  


ऑपरेशन के तीन दिन बाद ही मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। फाइनल पैथोलॉजी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि यह ट्यूमर सारकोमा था, जो केवल ओवरी तक सीमित था और शरीर में कहीं फैला नहीं था। पूरी निगरानी और देखभाल के बाद महिला ने फुल टर्म पर स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।


डॉ. सरिता, ने आगे बताया कि, “मेलिग्नेंट ओवेरियन ट्यूमर लगभग 10,000 गर्भावस्थाओं में से सिर्फ 1 में देखने को मिलता है, और ओवरी का सारकोमा तो अत्यंत दुर्लभ है। ऐसे मामलों में शुरुआती पहचान और समय पर इलाज ही मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।” 


इस सफलता के साथ, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका, ने यह साबित किया है कि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता के जरिए न केवल दुर्लभ बल्कि हाई-रिस्क केसों में भी बेहतरीन परिणाम दिए जा सकते हैं।

September 25, 2025

विद्यामंदिर क्लासेस ने घोषित किया विद्यामंदिर इंटेलेक्ट क्वेस्ट VIQ 2025

विद्यामंदिर क्लासेस ने घोषित किया विद्यामंदिर इंटेलेक्ट क्वेस्ट VIQ 2025

नोएडा ।: आईआईटी-जेईई मेन व एडवांस्ड, नीट, बोर्ड्स और ओलंपियाड्स की तैयारी में अग्रणी विद्यामंदिर क्लासेस VMC ने अपने बहुप्रतीक्षित, सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित परीक्षा विद्यामंदिर इंटेलेक्ट क्वेस्ट VIQ 2025 की तारीखों की घोषणा कर दी है। यह परीक्षा 28 सितंबर, 5, 11, 12 और 26 अक्टूबर 2025 को कई स्लॉट्स में आयोजित होगी और इसमें कक्षा 5 से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। 


यह परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में होगी। यह एक राष्ट्रीय स्तर की योग्यता एवं छात्रवृत्ति परीक्षा है, जो विद्यार्थियों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक और शैक्षणिक क्षमता को आंकने का अवसर देती है। विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सीमित समय तक पंजीकरण निःशुल्क रखा गया है। 


इस अवसर पर संस्थापक, श्री संदीप मेहता आईआईटी दिल्ली एलुमनस ने कहा,“VIQ केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि गंभीर छात्रों के लिए शैक्षणिक सफलता की ओर पहला कदम है। इसमें सफल विद्यार्थियों को 100% तक की छात्रवृत्ति और ₹2.5 करोड़ तक के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। साथ ही, प्रतिभागियों को वर्ष की सबसे कम शैक्षणिक फीस, निःशुल्क ऑफलाइन कक्षाएं, ई-स्टडी मैटेरियल, प्रैक्टिस टेस्ट और मॉक बोर्ड परीक्षाओं का लाभ मिलेगा। 


”ऑफलाइन मोड से पंजीकरण करने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक गुडी बैग्स (स्टडी किट्स, वाटर टम्बलर, रिस्टबैंड आदि) भी प्रदान किए जाएंगे। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जबकि टॉपर छात्रों को मैडल, ट्रॉफी और VMC की प्रतिष्ठित बैचों Citadel of Excellence (COE) तथा Illuminati में प्रवेश का सुनहरा अवसर मिलेगा।विद्यामंदिर क्लासेस हमेशा से अपने अनोखे पैडागॉजी, कठोर टेस्टिंग और समर्पित मेंटरशिप के लिए जानी जाती है। VIQ इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए देशभर के मेधावी छात्रों को सही दिशा और संसाधन उपलब्ध कराने का एक सुनहरा मंच है। 


VIQ 2025, हजारों छात्रों के लिए शैक्षणिक उत्कृष्टता और भविष्य की सफलता की ओर पहला कदम साबित होगा। 

पंजीकरण हेतु : www.vidyamandir.com

September 24, 2025

सड़न कार्डियक अरेस्ट के लिए जीवनरक्षक उपकरण, हृदय की सुरक्षा में आधुनिक वरदान

सड़न कार्डियक अरेस्ट के लिए जीवनरक्षक उपकरण, हृदय की सुरक्षा में आधुनिक वरदान

पटना: हार्ट हेल्थ हमारे ओवरऑल वेल्बीइंग  का सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। अधिकांश लोग हार्ट अटैक के बारे में जानते हैंलेकिन एक और स्थिति है जो और भी अचानक और जानलेवा हो सकती है सड़न कार्डियक अरेस्ट। अक्सर लोग हार्ट अटैक और सड़न कार्डियक अरेस्ट को एक जैसा मान लेते हैंजबकि दोनों अलग हैं।   


हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की आर्टरीज़ में ब्लड फ्लो अवरुद्ध हो जाता हैजिससे सीने में दर्द और हृदय की मांसपेशियों को नुकसान होता है। इसके विपरीतअचानक हृदयगति रुकने पर हृदय का इलेक्ट्रिकल सिस्टमगड़ बड़ा जाता है और हृदय बहुत तेज़ या अनियमित गति से धड़कने लगता है। इससे हृदय का पंप करने का कार्य अचानक बंद हो जाता है। बिना तुरंत मदद केयह स्थिति कुछ ही मिनटों में जानलेवा हो सकती है। 


मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटलद्वारका के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. बिपिन कुमार दुबे ने बताया कि अचानक हृदयगति रुकने की सबसे भयावह बात यह है कि यह बिना किसी चेतावनी के हो सकता है। व्यक्ति अचानक गिर सकता हैबेहोश हो सकता है और सांस लेना बंद कर सकता है। ऐसे समय में हर सेकंड कीमती होता है। सार्वजनिक स्थानों पर सीपीआर और एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर कई जिंदगियां बचा सकते हैंलेकिन उच्च-जोखिम वाले मरीजों को एक निरंतर और भरोसेमंद सुरक्षा की आवश्यकता होती है। यहीं पर ऑटोमैटिक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (AICD) मदद करता है। एआईसीडी एक छोटा उपकरण है जिसे त्वचा के नीचेसामान्यतः छाती के पास लगाया जाता है। यह लगातार हृदय की धड़कन की निगरानी करता है और यदि यह कोई खतरनाक लय पकड़ता है तो तुरंत एक हल्का विद्युत झटका देकर हृदय की धड़कन को सामान्य कर देता है। इसे ऐसे समझें जैसे आपके हृदय के लिए एक “रक्षक देवदूत” होजो हर समय सतर्क रहे और सेकंडों में कार्रवाई करे—चाहे आप सो रहे होंघर पर अकेले हों या चिकित्सा सहायता से दूर हों।“ 


डॉक्टर आमतौर पर एआईसीडी उन लोगों को लगाने की सलाह देते हैं जिन्होंने पहले अचानक हृदयगति रुकने से बचाव किया होजिनका हृदय पंप करने की क्षमता बहुत कमजोर होया जिन्हें ऐसे हृदय रोग हों जिनमें खतरनाक धड़कनें (arrhythmias) होने का खतरा ज़्यादा हो। बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से यह  साबित हुआ है कि एआईसीडी वाले मरीजों की आयु अधिक होती है और वे अचानक मृत्यु के ख़तरे से बेहतर सुरक्षित रहते हैं। 


बेशककिसी भी चिकित्सा उपकरण की तरह एआईसीडी के साथ भी कुछ चुनौतियां आती हैं—इसकी नियमित निगरानीसमय-समय पर चेकअप और इम्प्लांट साइट की देखभाल आवश्यक होती है। कभी-कभी यह बिना ज़रूरत के भी झटका दे सकता है या तकनीकी दिक्कत आ सकती है। लेकिन समग्र रूप से देखें तो उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए इसके लाभ जोखिमों से कहीं अधिक हैं। 


सबसे बड़ा संदेश जागरूकता और रोकथाम का है। नियमित हृदय जांचस्वस्थ जीवनशैली और समय पर कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लेने से उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान जल्दी की जा सकती है। यदि आपका डॉक्टर एआईसीडी लगाने की सलाह देता हैतो यह समझना ज़रूरी है कि यह केवल तकनीक नहींबल्कि एक जीवनरक्षक साधन है जो आपको और आपके परिवार को मानसिक सुकून दे सकता है। 


अचानक हृदयगति रुकना अप्रत्याशित होता हैलेकिन एआईसीडी वह सुरक्षा प्रदान करता है जो जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है।

September 20, 2025

GERD-X प्रक्रिया, लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स से जूझ रही 50 वर्षीय महिला का सफल इलाज

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद में पहली बार GERD-X प्रक्रिया, लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स से जूझ रही 50 वर्षीय महिला का सफल इलाज

फरीदाबाद, : यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने 50 वर्षीय महिला का सफलतापूर्वक इलाज किया, जो कई वर्षों से गंभीर एसिड रिफ्लक्स की समस्या से जूझ रही थी। “यह उपलब्धि इसलिए विशेष है क्योंकि यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, फरीदाबाद में पहली बार पर ओरल एंडोस्कोपिक फुल थिकनेस प्लिकेशन (GERD-X प्रोसीजर) सफलतापूर्वक किया गया। उत्तर भारत में इस अत्याधुनिक प्रक्रिया के अब तक बहुत ही चुनिंदा मामले ही सामने आए हैं।”


मरीज कई वर्षों से गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिज़ीज़ (GERD), जिसे आम भाषा में एसिड रिफ्लक्स कहते हैं, से परेशान थीं। कई बार परामर्श और लंबे समय तक दवाइयों के इस्तेमाल के बावजूद लक्षण बने रहे, जिससे उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। वह यथार्थ हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी ओपीडी में रिफ्लक्स, भोजन वापस आने और असहजता की शिकायत लेकर पहुंची।


यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. ध्रुव कांत मिश्रा ने बताया कि “मरीज की एंडोस्कोपी में लोअर इसोफेजियल स्फिंक्टर के ढीलेपन और हायटस हर्निया की पुष्टि हुई, जिससे एसिड और भोजन वापस भोजन नली में आ रहा था। पारंपरिक इलाज सर्जरी है, लेकिन मरीज इनवेसिव ऑपरेशन नहीं चाहती थीं। इसलिए हमने GERD-X प्रक्रिया का विकल्प दिया, जो एक न्यूनतम इनवेसिव और बिना चीरे वाली एंडोस्कोपिक तकनीक है, जो वॉल्व को मजबूत कर रिफ्लक्स को नियंत्रित करती है। यह प्रक्रिया मरीज ने एनेस्थीसिया में बिना दर्द झेले पूरी की, 24 घंटे के भीतर स्वस्थ होकर छुट्टी पा गईं और कई सालों बाद रिफ्लक्स से मुक्त जीवन का अनुभव कर रही हैं।”


डॉ. मिश्रा ने आगे कहा, “यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद में पहली बार GERD-X प्रक्रिया करना हमारे लिए गर्व का विषय है। उत्तर भारत के कुछ ही केंद्र इस अत्याधुनिक तकनीक को अपना पाए हैं, और हम इसे अपने मरीजों के लिए लेकर आए हैं। एसिड रिफ्लक्स एक आम लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला रोग है। ऐसे मरीज जिन्हें दवाइयों से राहत नहीं मिलती या सर्जरी नहीं कराना चाहते, उनके लिए यह एंडोस्कोपिक विकल्प एक वास्तविक बदलाव साबित हो सकता है।”


हॉस्पिटल ने इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया की सफलतापूर्ण कार्यान्विति में सहयोग देने के लिए एनेस्थीसिया, ओटी और प्रशासनिक टीम का विशेष आभार भी व्यक्त किया।


इस उपलब्धि के साथ, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह मरीजों को उन्नत, सुरक्षित और न्यूनतम इनवेसिव समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। GERD-X प्रक्रिया की सफलता इस क्षेत्र की जनता के लिए विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत, ने प्रयागराज में शुरु की विशेष न्यूरोसाइंसेज़ ओपीडी सेवाएं

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत, ने प्रयागराज में शुरु की विशेष न्यूरोसाइंसेज़ ओपीडी सेवाएं

प्रयागराज, 20 सितम्बर 2025:स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अहम पहल करते हुए मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत (नई दिल्ली) ने प्रयागराज शहर के यश हॉस्पिटल में विशेष न्यूरोसाइंसेज़ ओपीडी (Out Patient Department) सेवाओं की शुरुआत की है। इस नई सुविधा का उद्देश्य प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के उन मरीजों तक उच्च स्तरीय न्यूरोलॉजिकल परामर्श और उपचार पहुंचाना है, जो अब तक ऐसे मामलों में दिल्ली या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करने को मजबूर होते थे।  


इस अवसर पर मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत, के न्यूरोसर्जरी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी और न्यूरो इंटरवेंशन विभाग के यूनिट हेड डॉ. (प्रो.) दलजीत सिंह तथा यश हॉस्पिटल, प्रयागराज के डायरेक्टर डॉ. ए.के. सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने इस पहल को क्षेत्र की बड़ी जरूरत बताते हुए इसे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया। 


हर महीने उपलब्ध रहेंगे विशेषज्ञ

इस नई व्यवस्था के तहत डॉ. (प्रो.) दलजीत सिंह प्रत्येक माह के चौथे शनिवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक यश हॉस्पिटल, प्रयागराज में मरीजों को प्राथमिक परामर्श देंगे। इसका सीधा लाभ उन लोगों को होगा जिन्हें अब तक ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, गिलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS), डीप ब्रेन स्टिम्यूलेशन (DBS) या मिर्गी जैसी जटिल बीमारियों के लिए राजधानी तक का सफर तय करना पड़ता था। 


गंभीर बीमारियों के लिए सुपर स्पेशलिस्ट परामर्श

लॉन्च के मौके पर संबोधित करते हुए डॉ. (प्रो.) दलजीत सिंह ने कहा,

“प्रयागराज और आसपास के मरीज अब उन बीमारियों के लिए सुपर स्पेशलिस्ट परामर्श प्राप्त कर सकेंगे, जिनके इलाज के लिए उन्हें अब तक दिल्ली या अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों का सहारा लेना पड़ता था। न्यूरोसाइंसेज़ के क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति ने यह संभव किया है कि हम सबसे जटिल मामलों में भी मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चीरे वाली) सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से कर पा रहे हैं। इस ओपीडी सेवा से न केवल मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार मिलेगा, बल्कि उन्हें बीमारियों के बारे में सही जानकारी और जागरूकता भी मिल सकेगी।” 


मरीजों के लिए नई तकनीकों का लाभ

उन्होंने आगे कहा कि आज भी कई मरीज पारंपरिक और ओपन सर्जरी से डरते हैं क्योंकि उनमें अधिक रक्तस्राव, लंबे समय तक अस्पताल में रहना और रिकवरी में देर जैसी समस्याएं शामिल होती हैं। लेकिन आधुनिक तकनीकों ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है।

“आज मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के जरिए हम ऐसे ऑपरेशन कर सकते हैं जिनमें मरीज का खून बहुत कम निकलता है, दर्द भी कम होता है और सबसे महत्वपूर्ण बात – मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। इसके साथ ही, इस तकनीक का कॉस्मेटिक लाभ भी है क्योंकि हड्डियों और मांसपेशियों पर अनावश्यक आघात नहीं होता और ऑपरेशन के निशान भी लगभग न के बराबर रह जाते हैं।” 


क्यों जरूरी थी यह सुविधा

प्रयागराज और आस-पास के जिले—जैसे कौशांबी, प्रतापगढ़, भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी के ग्रामीण इलाकों में ऐसे हजारों मरीज हैं जिन्हें गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझना पड़ता है। लेकिन विशेषज्ञ परामर्श और अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें अक्सर बड़ी मुश्किलें उठानी पड़ती हैं।

अब जब मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने यह कदम उठाया है, तो लोगों को लंबी दूरी तय किए बिना ही विशेषज्ञ डॉक्टर से मिल पाने का अवसर मिलेगा। इसका सीधा असर न सिर्फ मरीजों की जेब पर पड़ेगा, बल्कि उनकी सेहत और समय दोनों की बचत होगी। 


शहर और आसपास के लिए बड़ी राहत

यश हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. ए.के. सक्सेना ने कहा, “यह साझेदारी प्रयागराज और आसपास के मरीजों के लिए एक वरदान साबित होगी। हमने अक्सर देखा है कि मरीजों और उनके परिजनों को दिल्ली तक के सफर में समय और पैसों की बड़ी बर्बादी झेलनी पड़ती है। कई बार मरीज समय पर इलाज न मिल पाने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। अब जब मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ यहां नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगे, तो मरीजों को समय पर परामर्श और सही दिशा मिल सकेगी।” 


मिनिमली इनवेसिव तकनीक क्यों है खास 

कम रक्तस्राव – पारंपरिक सर्जरी की तुलना में खून निकलने का खतरा बहुत कम होता है। 

कम दर्द और तेज रिकवरी – मरीज सामान्य जीवन की ओर जल्दी लौट पाता है। 

कम अस्पताल में रहना – लंबे समय तक भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती। 

कॉस्मेटिक लाभ – बड़े चीरे और स्थायी निशान से बचाव। 

जटिल बीमारियों में भी सफलता – जैसे ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों में भी यह तकनीक सुरक्षित मानी जाती है। 

 

इस ओपीडी सेवा की शुरुआत ने प्रयागराज और आस-पास के लोगों में एक नया भरोसा पैदा किया है। चिकित्सा जगत में अक्सर कहा जाता है कि "सही समय पर सही विशेषज्ञ का मार्गदर्शन मरीज की जिंदगी बचा सकता है।" यही कारण है कि इस पहल से उन सैकड़ों परिवारों को उम्मीद मिली है जिनके सदस्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जूझ रहे हैं।

यह केवल एक शुरुआत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे और भी सुपर स्पेशलिटी ओपीडी कार्यक्रमों की जरूरत है, ताकि बड़े शहरों पर चिकित्सा का बोझ कम हो और छोटे शहरों के मरीज भी समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार पा सकें।



प्रयागराज में मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और यश हॉस्पिटल की यह साझेदारी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। न्यूरोसाइंसेज़ जैसे जटिल और गंभीर विषय पर विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा अब मरीजों को अपने ही शहर में उपलब्ध होगी। यह पहल न केवल मरीजों की जान बचाने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों के जरिए सुरक्षित, तेज और प्रभावी उपचार दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

September 01, 2025

Interactive session on Latest Advancements in Neurosciences concludes successfully

interactive session on Latest Advancements in Neurosciences concludes successfully

Agra: Artemis Hospital Gurugram in association with CRREST neuro services, Neurological society of Agra, IACM – Agra recently spearheaded an interactive session in the city focusing on 10 commandments of Brain health. The seminar aimed to shed light on cutting-edge treatments for various types of neuro related disorders, making them more accessible, reliable, and safer than ever before.

 

The session was orated by Dr. Aditya Gupta, Chief Neurosurgery & CNS Radiosurgery & Co-Chief – Cyberknife centre, from Artemis Hospitals, who spoke on the topic Collaborative cases in neurosciences.

 

Dr. Aditya Gupta, Chief Neurosurgery & CNS Radiosurgery & Co-Chief – Cyberknife centre, Artemis Hospitals emphasized the significance of cyberknife radiosurgery in tackling complex neurosurgical cases, said”M6 Cyberknife Radiosurgery is precise, painless, and non-invasive radiation treatment. It is extremely efficient for the treatment of inoperable cancerous and non-cancerous tumors, requires no anesthesia & incision and has no reported risks or side effects. This therapy has a proven clinical success rate of over 95% of the brain tumor patients and works best for tumors up to 2.5-3 cm in size.

 

The seminar aimed to create awareness among both the medical community and the public about these advancements, ultimately striving to enhance patient care and outcomes.

 

Artemis Hospital Gurugram remains committed to pushing the boundaries of medical excellence and introducing state-of-the-art technologies to ensure accurate and effective treatment options for patients worldwide.