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June 20, 2025

34 वर्षीय महिला में छुपा ट्यूमर, पैंक्रियाटाइटिस की वजह बनी, हाई-रिस्क सर्जरी से सफल इलाज

34 वर्षीय महिला में छुपा ट्यूमर, पैंक्रियाटाइटिस की वजह बनी, हाई-रिस्क सर्जरी से सफल इलाज

नोएडा। यथार्थ हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने एक 34 वर्षीय महिला की जान बचाने में बड़ी सफलता पाई, जिसे बेहद खतरनाक पैंक्रियाटाइटिस की शिकायत थी। जांच में पता चला कि इसके पीछे एक बहुत ही दुर्लभ कारण था प्राइमरी हाइपरपैराथायरॉयडिज्म, जो एक पैराथायरॉइड एडीनोमा नामक ट्यूमर की वजह से हुआ था। 



मरीज को शुरुआत में तेज पेट दर्द और पैंक्रियाटाइटिस के लक्षणों के साथ भर्ती किया गया था। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और प्रमुख डॉ. परवीन मेंदीरत्ता और उनकी टीम ने जब गहराई से जांच की, तो शरीर में कैल्शियम का स्तर बहुत अधिक पाया गया। यह हाइपरकैल्सीमिया नाम की स्थिति थी, जो पैंक्रियाटाइटिस के बहुत कम मामलों (1 प्रतिशत से भी कम) में पाई जाती है। एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की मदद से असली कारण सामने आया — दाहिने तरफ पैराथायरॉइड में एक बेनाइन ट्यूमर। यह ट्यूमर शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगाड़ देता है, जिससे हड्डियों, किडनी, मसल्स और आंतरिक अंगों पर असर होता है। 



मरीज की हालत और भी गंभीर इसलिए थी क्योंकि उसका दिल भी कमजोर था। टेस्ट में दिल की कार्यक्षमता (इजेक्शन फ्रैक्शन) सिर्फ 25 प्रतिशत पाई गई, जो सामान्य से काफी कम है। यह स्थिति ऑपरेशन को बहुत जोखिम भरा बना रही थी। इसके बावजूद, डॉक्टरों की टीम ने सावधानी के साथ सर्जरी का फैसला लिया। एनेस्थीसिया विभाग ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को बारीकी से संभाला। 



सर्जरी के दौरान निकाले गए ट्यूमर की तुरंत जांच की गई, जिससे यह पुष्टि हुई कि यह पैराथायरॉइड टिशू ही था। साथ ही, बायोकैमिस्ट्री विभाग ने हार्मोन स्तर की निगरानी की और पाया कि ट्यूमर निकालने के सिर्फ 20 मिनट के अंदर मरीज का पैराथॉर्मोन लेवल 1233 से गिरकर 140 हो गया। इससे सर्जरी की सफलता तुरंत प्रमाणित हो गई। 



डॉ. परवीन मेंदीरत्ता ने बताया, “यह केस टीमवर्क और तेज़ क्लिनिकल निर्णय का बेहतरीन उदाहरण था। हाइपरकैल्सीमिया की वजह से पैंक्रियाटाइटिस बहुत असामान्य होती है और अक्सर ध्यान नहीं जाता, लेकिन समय पर पहचान होने से हमें इलाज का सही मौका मिला। मरीज की दिल की खराब स्थिति के बावजूद हम सुरक्षित ऑपरेशन कर पाए, क्योंकि सभी विभागों ने मिलकर काम किया। यह मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिसिन की ताकत को दर्शाता है।” 



मरीज की हालत अब स्थिर है और सिर्फ 5 दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। छुट्टी के समय दिल की कार्यक्षमता बढ़कर 45 प्रतिशत हो चुकी थी। 



यह केस दिखाता है कि पैराथायरॉइड ट्यूमर और पैंक्रियाटाइटिस के बीच दुर्लभ संबंध को समझना कितना ज़रूरी है। साथ ही, यह समय पर डायग्नोसिस, सटीक सर्जरी और टीम वर्क के ज़रिए जीवन बचाने की अहमियत को भी सामने लाता है, चाहे केस कितना भी कठिन क्यों न हो।

June 18, 2025

बीयर बेली से कहीं ज्यादा है पुरुषों में फैलता यह स्वास्थ्य संकट

बीयर बेली से कहीं ज्यादा है पुरुषों में फैलता यह स्वास्थ्य संकट

मेरठ। आज का आधुनिक भारतीय पुरुष सिर्फ कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर रहा है, बल्कि एक गहरी और खामोश स्वास्थ्य समस्या से भी जूझ रहा है मोटापा। यह सिर्फ पेट की बढ़ती चर्बी या बीयर बेली तक सीमित नहीं, नहीं, बल्कि पुरुषों की सेहत को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। भारत में पुरुषों में मोटापा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटू बनता जा रहा है, जिससे हर चौथा पुरुष प्रभावित है। आज की जीवनशैली में परंपरागत और संतुलित आहार की जगह प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी खाद्य पदार्थों ने ले ली है। है। कार्यस्थल की दावतों और बैठकों में अत्यधिक खाना, लंबे ऑफिस आवागमन, डेस्क पर बैठे रहने वाला काम और स्क्रीन के सामने बढ़ता समय, सब मिलकर एक निष्क्रिय जीवनशैली को जन्म दे रहे हैं। इसके साथ ही पुरुषों के वजन बढ़ने को लेकर समाज में गंभीरता की कमी और अंदरूनी तनाव भी इस संकट को और बढ़ा रहे हैं। तनावग्रस्त जीवनशैली अक्सर अस्वस्थ भोजन और कम शारीरिक गतिविधि की आदतों को जन्म देती है, जो वजन बढ़ाने के दुष्चक्र को और मजबूत बनाता है।   


मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटलसाकेत के बेरिएट्रिक, मिनिमल एक्सेस जनरल सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अतुल एन.सी. पीटर्स ने बताया कि हमोटापे के दुष्परिणाम गंभीर और दूरगामी होते होते हैं। भारत पहले ही "डायबिटीज की राजधानी" के रूप में जाना जाने लगा है। खासकर पेट और आंतरिक चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस को जन्म देती है जो टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनती है। मोटापा उच्च रक्तचाप, चाप, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है, वो भी कम उम्र में। स्लीप एपनिया, जो नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जोड़ों का दर्द, कुछ प्रकार के कैंसर, पुरुषों में प्रजनन क्षमता की कमी और यौन मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी मोटापे से जुड़ी हुई हैं।   


डॉ. अतुल ने आगे बताया कि इस खतरे से निपटने के लिए जरूरी है कि पुरुष अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं। पारंपरिक भारतीय आहार जिसमें मिलेट्स, दालें, हरी सर्वजयां, फल और लीन प्रोटीन शामिल हों, को अपनाएं। भोजन में हिस्से का ध्यान रखें और अतिरिक्त वसा चीनी से परहेज करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि जैसे तेज चलना, साइक्लिंग या व्यायाम, तथा हफ्ते में दो बार मांसपेशियों की ट्रेनिंग को शामिल करें। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे), तनाव प्रबंधन (ध्यान, योग, शौक), शराब का सीमित सेवन और नियमित हेल्थ चेकअप भी भा जरूरी हैं। यदि जीवनशैली में बदलाव से पर्याप्त लाभ मिले, तो डॉक्टर की सलाह लेना अहम है। वे डाइटिशियन, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या जरूरत होने पर वजन कम करने वाली दवाएं भी सलाह दे सकते हैं।   


मार्विड ओबेसिटी (इटक > 37.5) से जूझ रहे लोगों के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी एक प्रभावशाली विकल्प हो सकती है। ये सर्जरी सिर्फ खाने की मात्रा को सीमित करती है, बल्कि शरीर के हार्मोनल संतुलन को भी बदलती है भूख बढ़ाने वाले हार्मोन को कम और तृप्ति देने वाले हार्मोन को बढ़ाकर लंबे समय तक वजन नियंत्रित करने में मदद करती है। भारत में पुरुष मोटापे से निपटना एक साझा जिम्मेदारी है। यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। अब समय है है कि पुरुष अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, जागरूक निर्णय लें और स्वस्थ, हल्का व संतुलित जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।